
मलिक असगर हाशमी/ नई दिल्ली
सफेद बर्फ की चादर से ढकी ऊँची पहाड़ियां और हाड़ कंपा देने वाली ठंड। इसी खामोश सन्नाटे के बीच एक आवाज गूँजती है। "रोज़ा भी रखेंगे, पहरा भी देंगे। फौजी हैं जनाब, अपना वादा पूरा करेंगे।" यह बोल फौजी साहिल के हैं। उनका यह वीडियो जब सोशल मीडिया पर आया तो हर हिंदुस्तानी का सिर गर्व से ऊँचा हो गया। तेरह से चौदह घंटे का कड़ा रोज़ा और हाथ में मुस्तैदी ì...Read more
डॉ. ख्वाजा इफ्तिखार अहमद
इक्कीसवीं सदी में भारत की प्रगति का आकलन केवल उसके एक्सप्रेसवे की लंबाई, अर्थव्यवस्था के आकार या प्रौद्योगिकी की उन्नतता से नहीं किया जा सकता। उतना ही महत्वपूर्ण उसके नागरिकों का नैतिक और सामाजिक चरित्र भी है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश के लिए स्थायी विकास तभी संभव है जब वह शांति, बंधुत्व, अंतरधार्मिक सद्भाव और मजबूत सामाजिक एकजुटता पर आधारित हो। ये कोई अमूर्त आदर्श नहीं हैं, बल्कि वही आधारशिला हैं जिन पर भारत की एकता, अखंडता औ......Read more