
एड. संजय पांडे
पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदले हैं। अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त सैन्य आक्रमण का सामना करते हुए ईरान न केवल युद्धभूमि में टिका रहा, बल्कि उसने सामरिक बढ़त भी हासिल कर ली।
इस जीत के पीछे ईरान की स्वदेशी सैन्य क्षमता, जनता की एकजुटता और निर्णायक कूटनीति तो थी ही, लेकिन उसे एक मज़बूत आधार-स्तंभ भी प्राप्त हुआ – चीन। "12दिवसीय युद्ध" और "रमज़ान युद्ध" जैसे ताज़ा संघर्षों में ईरानी जनता और उद्यमियों ने जो सामर्थ्य दिखाया और चीन ने जो आ......Read more