
डॉ. प्रीतम भी. गेडाम
आज के युग में स्वार्थ, लालच, द्वेष, चरित्रहीनता, भ्रष्टाचार, नशाखोरी, मिलावटखोरी, प्रदूषण, भेदभाव और मनुष्य की असीमित इच्छाओं की पूर्ति के लिए चल रहा कभी न खत्म होने वाला संघर्ष जिंदगी का सुकून छीन रहा है। हर कोई अपने ख्वाबों को पूरा करने के लिए भेड़चाल में भाग रहा है। किसी के पास रोजगार नहीं, किसी के पास प्रेम नहीं, परिवार नहीं, चरित्रवान जीवनसाथी नहीं, निरोगी शरीर नहीं, संस्कारशील बच्चे नहीं, सहयोगी परिवार और मित्र नहीं, समय नहीं, नाम और शोहरत नहीं, कोई सहारा नहीं तो किस......Read more