
राजीव नारायण
भारत अब वैश्विक व्यवस्था के पीछे नहीं चल रहा है। वह इसके नियम खुद लिख रहा है। लंबे समय तक भारत की विदेश नीति को हिचकिचाहट भरी और जरूरत से ज्यादा सावधान माना जाता रहा। पश्चिमी देशों को लगता था कि भारत शीत युद्ध के दौर की पुरानी सोच में फंसा है। वे भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखते थे जो फैसला लेने से डरता है और दो गुटों के बीच बस तालमेल बिठाने की कोशिश करता है। लेकिन आज वही 'दुविधा' भारत की कूटनीतिक समझदारी मानी जा रही है।
वजह साफ है। भारत अब किसी एक पक्ष को नहीं चुनना चा&......Read more