
राजजीव नारायण
ब्रिक्स (BRICS) ने हाल ही में यह साबित कर दिया है कि तीव्र मतभेदों और परस्पर-विरोधी हितों के बावजूद भी देश एक साझा मंच ढूंढ सकते हैं। लेकिन वाशिंगटन का नया रूस-प्रतिबंध विधेयक एक बड़ा सवाल खड़ा करता है: आने वाले समय में देशों के पास अपनी स्वतंत्र आर्थिक और विदेश नीति चुनने के लिए आखिर कितनी गुंजाइश बचेगी?
इस पूरे घटनाक्रम का समय थोड़ा संदिग्ध जरूर है, लेकिन इससे कोई पक्का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। फिर भी, यह एक ऐसा सवाल ज़रूर खड़ा करता है जिस पर गहराई से सोचने कì......Read more