
सरिता गोदारा
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में सुबह से शाम तक महिलाएं अपने काम में जुटी रहती हैं। कोई घर के काम निपटाने के बाद पापड़ और अचार बनाने बैठती है, तो कोई खेतों में बुवाई, निराई और कटाई करती है। कई महिलाएं पशुपालन के साथ-साथ मनरेगा के तहत सड़क निर्माण, तालाब की खुदाई, सफाई, पौधारोपण और खेतों की मेड़ बनाने जैसे कामों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करती हैं। उनकी मेहनत ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बावजूद सवाल यह है कि क्या इस मेहनत के बदले उन......Read more