
अलवीरा
गांवों में जब बच्चे अपने भविष्य की बात करते हैं तो उनके सपनों में कोई बहुत असाधारण चीज नहीं होती। शहरी बच्चों की तरह ही वहां भी कोई शिक्षक बनना चाहता है, कोई डॉक्टर, कोई पुलिस अधिकारी, कोई इंजीनियर तो कोई ऐसा काम करना चाहता है जिससे वह अपने परिवार और गांव का नाम रोशन कर सके।
उनकी आंखों में भी पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा है। लेकिन उनके सपनों और हकीकत के बीच व्यवस्था की एक लंबी दीवार खड़ी है। गांवों में भी स्कूल है, बच्चे स्कूल जाते हैं, परीक्षाएं दे&......Read more