
अल्फिया शेख, सोलापूर
उर्दू ज़बान-ओ-अदब के मोतबर नाम, मारूफ़ शायर, नक़्क़ाद और उस्ताद-ए-मुहतरम बशीर परवाज़ 82बरस की उम्र में इस दुनिया-ए-फ़ानी से कूच कर गए। सोलापुर के नोबल हॉस्पिटल में उन्होंने आख़िरी सांस ली। उनके इंतेक़ाल की ख़बर मिलते ही पूरे महाराष्ट्र समेत मुल्क के अदबी और तअलीमी हल्क़ों में रंज-ओ-ग़म की लहर दौड़ गई। सोलापुर के जडे साहब क़ब्रिस्तान में नमाज़-ए-...Read more
डॉ. प्रितम भि. गेडाम
कहने को सभी शिक्षा ज्ञान मंदिर को पवित्र पेशे के रूप में देखते है, लेकिन क्या आज व्यापारीकरण के युग में यह वहीं मंदिर रहा है, जहां क्रांतिज्योति सावित्री बाई फुले शिक्षा की ज्ञानज्योत जलाने के लिए विपरीत विचारों, कुरीतियों वाले पूरे समाज से घृणा और द्वेष सहन करती रही थी।
महात्मा ज्योतिराव फुले ने सामाजिक बहिष्कार, अपमान और विरोध की परवाह किए बिना शिक्षा को वंचितों की मुक्ति का माध्यम बनाया; राजर्षि शाहू महाराज ने शिक्षा में सामाजिक न्याय औ......Read more