
आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली
19 दिसंबर 1927 को दिसंबर की एक ठंडी सुबह फैजाबाद जेल में 27 वर्ष की अल्प आयु में एक नौजवान फांसी के तख्ते की तरफ बढ़ा। उसने फंदे को चूमते हुए यह ऐलान किया कि उसके हाथ किसी इंसान के खून से नहीं रंगे हैं। उनका नाम था अशफाक उल्ला खां शाहजहांपुर के एक महान शायर, एक गौरवशाली पठान और एक ऐसे क्रांतिकारी जिन्होंने स्वतंत्र भारत के सê...Read more
डॉ. प्रीतम भी. गेडाम
गरीबी बहुत बुरी बीमारी है, यह अपने साथ सैकड़ों समस्याओं को लेकर आती है और जीवनमान और विकास को चरमरा देती हैं। लगातार बढ़ती आर्थिक विषमता गरिबी मुक्त देश बनाने में रोड़े खड़े करती है, ऊपर से महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी गरीबी कम होने नहीं देती। हर क्षेत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप और भाई-भतीजावाद दबाव बने रहता हैं।
मिलावटखोरी, प्रदूषण, कांक्रीट के बढ़ते जंगल और कटते वन ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाते है, इससे प्राकृतिक आपदाएं आती है, बीमारियां बढ़ती है, से......Read more