
जीतू कुमारी
गांवों में लड़कियों की शिक्षा को लेकर तस्वीर पहले से बदली है। कुछ दशक पहले जहां गिने चुने घरों की लड़कियों का स्कूल जाना ही बड़ी बात माना जाता था, वहीं अब लगभग सभी ग्रामीण परिवार की किशोरियां स्कूल जाने लगी हैं। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के बाद लड़कियां 12वीं तक पढ़ रही हैं और कुछ उच्च शिक्षा के लिए भी गांव से बाहर जा रही हैं।
लेकिन सवाल उठता है कि क्या केवल स्कूल की दहलीज तक पहुंच जाना ही लड़कियों की आजादी का मतलब पूरा हो जाता है? क्या किताबें हाथ में आने के बाद उनके जì......Read more