समर्पण और साहस के साथ देश की सेवा में जुटी 10 मुस्लिम महिलाएं

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 15-03-2026
10 Muslim Women Dedicated to Serving the Nation with Devotion and Courage
10 Muslim Women Dedicated to Serving the Nation with Devotion and Courage

 

आवाज द वाॅयस ब्यूरो/ नई दिल्ली

भारत में ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने सामाजिक या पेशेवर बाधाओं को पार कर अपने क्षेत्र में मिसाल कायम की है। आवाज द वाॅयस की खास पेशकश ‘परवाज’ इसी दिशा में एक प्रयास है। इस श्रृंखला के तहत हम पाठकों से उन मुस्लिम महिलाओं से रू-ब-रू करा रहे हैं जिन्होंने अपने साहस, मेहनत और लगन से देश की सेवा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनकी कहानी न केवल प्रेरक है,बल्कि देश की युवतियों के लिए आदर्श भी। ‘परवाज’ की नई कड़ी में हम आपको 10ऐसी महिलाओं से मिलवा रहे हैं जो अपने-अपने क्षेत्र में अनुकरणीय हैं।

dअजीथा बेगम सुलतान

अजीथा बेगम सुलतान के जीवन में मेहनत, अनुशासन और सहानुभूति की मिसाल दिखाई देती है। कोयंबटूर से उठकर केरल की क्राइम ब्रांच की इंस्पेक्टर जनरल बनना कोई आसान काम नहीं था।

उन्होंने तस्करी, ड्रग्स और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों से निपटने में बेहतरीन काम किया है। उनकी सादगी और कर्तव्यपरायणता उन्हें अपने काम में अलग पहचान देती है।

अजीथा मानती हैं कि पुलिस अधिकारी के लिए गलतियां बर्दाश्त नहीं हैं। उनका यह सिद्धांत कठिन पोस्टिंग और हाई-प्रोफाइल मामलों में भी उन्हें मार्गदर्शन देता रहा है। उन्होंने राज्य पुलिस कैडेट प्रोग्राम के जरिए युवा पीढ़ी को मार्गदर्शन देना भी जारी रखा है।

fअनीसा नबी

अनीसा नबी जम्मू और कश्मीर में प्रशासनिक कर्तव्य और खेल के प्रति जुनून का अनोखा मिश्रण पेश करती हैं। 2012बैच की जेकेएएस अधिकारी और वर्तमान में जेके स्पोर्ट्स काउंसिल की चीफ स्पोर्ट्स ऑफिसर, अनिसा खेल, फिटनेस और युवा सशक्तिकरण के लिए काम करती हैं।

वे दौड़ प्रतियोगिताओं में भी भाग लेती हैं और कई प्रमुख मैराथन जैसे वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन और टाटा मुंबई मैराथन पूरी कर चुकी हैं। उन्होंने “वंडरस वीमेन” पहल के जरिए महिलाओं को फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनके प्रयास न केवल खेल के क्षेत्र में युवाओं को सही दिशा दिखा रहे हैं बल्कि जीवन में सकारात्मकता और अनुशासन का संदेश भी दे रहे हैं।

fइशरत अहमद

राजस्थान के नुआन गांव की इशरत अहमद ने भारतीय सेना में 2001में कमीशन प्राप्त किया।

उन्होंने मीरट में एक ऑर्डनेंस यूनिट का नेतृत्व करते हुए पहली बार क़ाइमख़ानी समुदाय की महिला के रूप में यह अहम जिम्मेदारी निभाई।

उनके परिवार में सैन्य और सिविल सेवा की परंपरा रही है, लेकिन इशरत ने व्यक्तिगत प्रयास और समर्पण से यह मुकाम हासिल किया। वह युवाओं खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि की लड़कियों को सेना और सार्वजनिक सेवा की ओर प्रेरित करती हैं। उनका जीवन साहस, नेतृत्व और समाज सेवा की प्रेरणा देता है।

dबुशरा बानो

बुशरा बानो का सफर कानपुर जिले के छोटे गांव से भारतीय पुलिस सेवा तक एक प्रेरक कहानी है।

उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पीएचडी पूरी की और मां होने के बावजूद सिविल सेवा की तैयारी में जुटीं।

आठ महीने की गर्भवती अवस्था में उन्होंने यूपीएससी इंटरव्यू दिया और अंततः आईपीएस बनकर पश्चिम बंगाल कैडर में सेवा दी। उन्होंने व्याख्याता और कॉर्पोरेट नौकरी से एसडीएम और पुलिस अधिकारी बनने तक का सफर तय किया। बुशरा की कहानी यह बताती है कि परिवार का सहयोग और शिक्षा से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।

dहनी कुरैशी

कोलकाता के क्रैडल फर्टिलिटी सेंटर में हनी कुरैशी ने बांझपन के उपचार में नई दिशा दी है। वह जीरिया शाखा की प्रमुख हैं और आईवीएफ और उन्नत प्रजनन तकनीकों में विशेषज्ञ हैं।

उन्होंने 2024में आईएसएआर यूथ आइकॉन अवार्ड प्राप्त किया। उनका मानना है कि अनुशासन, धैर्य और लगातार सीखना सफलता की कुंजी हैं। हनी का काम उन दंपत्तियों के लिए उम्मीद की किरण बन गया है जो माता-पिता बनने के सपने देख रहे हैं।

fरेश्मा नीलोफर नाहा

रेश्मा नीलोफर नाहाकोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की पहली महिला रिवर पायलट बनीं।

उन्होंने अकादमी ऑफ मेरिटाइम एजुकेशन एंड ट्रेनिंग से प्रशिक्षण लिया और 2018में कठिन प्रशिक्षण के बाद पायलट का पद संभाला। बड़े जहाजों को नदी के संकरे और चुनौतीपूर्ण मार्ग से मार्गदर्शन करना एक कठिन काम है, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। उन्हें नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका सफर महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन गया है।

fसारा रिज़वी

गुजरात कैडर की आईपीएस अधिकारी सारा रिज़वी ने जमीनी स्तर पर कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट सेवा दी है।

वे जम्मू-कश्मीर के उधमपुर–रीसी रेंज में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल हैं। उन्होंने अपने जीवन में वित्तीय कठिनाइयों और व्यक्तिगत नुकसानों को पार कर महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभाला। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि संघर्ष और लगन से सफलता हासिल की जा सकती है।

fसोफिया कुरैशी

सोफिया कुरैशी भारतीय सेना में एक प्रभावशाली प्रतीक हैं। उन्होंने पुरुष प्रधान सेना में अपनी योग्यता और अनुशासन से लंबी रैंक हासिल की। उनकी मेहनत और उत्कृष्टता से युवा महिलाएं सेना में करियर बनाने की प्रेरणा ले रही हैं।

dतुबा सनोबर

सेओनी की तुबा सनोबर अब बेंगलुरु में एक प्रभावशाली वकील हैं। उन्होंने क्रिमिनोलॉजी में एलएलएम किया और नागरिक अधिकारों, महिला सशक्तिकरण और डिजिटल प्राइवेसी के लिए काम करती हैं। वे कानून को सामाजिक परिवर्तन और गरिमा का माध्यम मानती हैं।

हाना मोहसिन खान

मेरठ की हाना मोहसिन खान ने अपनी शिक्षा और करियर को पीछे छोड़कर विमानन में कदम रखा।

अमेरिका और ग्रीस में प्रशिक्षण के बाद उन्होंने 2020में पहली वाणिज्यिक उड़ान भरी। उनका सफर दिखाता है कि जिज्ञासा, धैर्य और संघर्ष से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।

ये दस महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र में न केवल देश की सेवा कर रही हैं बल्कि नए मानक भी स्थापित कर रही हैं। उनकी कहानियां युवतियों को प्रेरित करती हैं कि सामाजिक और पारंपरिक बाधाओं को पार कर अपने सपनों को हासिल किया जा सकता है। ‘परवाज’ के माध्यम से उनकी यह प्रेरक यात्रा पाठकों के सामने प्रस्तुत की जा रही है।

इन महिलाओं की कहानी बताती है कि समर्पण, साहस और मेहनत से किसी भी क्षेत्र में असंभव को संभव बनाया जा सकता है। इनकी उपलब्धियां न केवल व्यक्तिगत सफलता हैं बल्कि समाज और देश के लिए उदाहरण भी हैं।