आवाज द वाॅयस / दुबई
ईरान के मिनाब शहर में स्थित शजरेह तय्येबेह गर्ल्स स्कूल पर 28 फरवरी को हुए हमले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह हमला युद्ध के पहले ही दिन हुआ था। रॉयटर्स की एक जांच के अनुसार इस स्कूल की इंटरनेट पर कई सालों से मौजूदगी थी। स्कूल की अपनी वेबसाइट थी। वहां बच्चों की रंगीन ड्रॉइंग, गतिविधियों की तस्वीरें और खेलते हुए छात्राओं के फोटो पोस्ट किए जाते थे।
स्कूल के आसपास ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी का एक सैन्य परिसर था। जांच में पता चला कि उसी परिसर के साथ कम से कम छह और इमारतों को भी निशाना बनाया गया। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि उस दिन कुल 175 लोग मारे गए जिनमें बड़ी संख्या में छात्राएं थीं। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिए ईरान के राजदूत अली बहरेनी ने कहा कि लगभग 150 छात्राओं की मौत हुई। हालांकि रॉयटर्स इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर पाया है।

सैटेलाइट तस्वीरों और पुराने ऑनलाइन रिकॉर्ड से यह साफ दिखता है कि यह इमारत एक स्कूल थी। 2018 की सैटेलाइट तस्वीरों में भी स्कूल की रंगीन दीवारें दिखती हैं। 2025 में वेब आर्काइव में सुरक्षित स्कूल की वेबसाइट पर छात्राएं गुलाबी और सफेद यूनिफॉर्म में पढ़ते और खेलते नजर आती हैं। आसपास के मैदान में खेल के निशान भी सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई देते हैं।
रॉयटर्स ने सैटेलाइट डेटा, फोटो और वीडियो का विश्लेषण किया। इससे संकेत मिलता है कि उस इलाके में कई हथियारों से हमला हुआ था। इनमें कम से कम एक अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल भी शामिल हो सकती है। हमले के बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में करीब 325 मीटर के दायरे में सात अलग अलग धमाकों के निशान दिखे। स्कूल की इमारत पूरी तरह ढह गई थी। पास की एक इमारत की छत में बड़ा छेद था और एक अन्य भवन पूरी तरह समतल हो गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाद में कहा कि संभव है ईरान के पास भी टॉमहॉक मिसाइलें हों। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि ऐसा कैसे संभव है। किसी अमेरिकी अधिकारी ने भी इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। पेंटागन ने कहा कि हमले की जांच चल रही है लेकिन स्कूल की ऑनलाइन मौजूदगी या लक्ष्य चुनने की प्रक्रिया पर उसने कोई टिप्पणी नहीं की।
दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि हो सकता है हमले में पुराने और अपडेट न किए गए टारगेट डेटा का इस्तेमाल किया गया हो। रक्षा विशेषज्ञ और पूर्व अमेरिकी मरीन अधिकारी मार्क कैंसियन का कहना है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड के पास संभावित लक्ष्यों की एक पुरानी सूची होती है जो युद्ध की स्थिति में इस्तेमाल की जा सकती है। उनके अनुसार इस घटना से यह सबक मिलता है कि ऐसे लक्ष्यों की सूची की समय समय पर समीक्षा करना बहुत जरूरी है।

रॉयटर्स की जांच में यह भी सामने आया कि 28 फरवरी से 2 मार्च के बीच पांच किलोमीटर के दायरे में सिर्फ यही स्कूल और आईआरजीसी परिसर की इमारतें ही निशाने पर आईं। इससे संकेत मिलता है कि हमला खास तौर पर इसी इलाके को लक्ष्य बनाकर किया गया था। मिनाब शहर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है और यहां आईआरजीसी का एक बड़ा मिसाइल बेस भी बताया जाता है।
हमले के कुछ दिन बाद सैटेलाइट विश्लेषण में शहर के कब्रिस्तान में भी बड़ा बदलाव दिखा। दो मार्च को वहां बच्चों के शव दफनाए गए थे। जमीन में एक के बाद एक कई नई कब्रें खोदी गई थीं।
शजरेह तय्येबेह स्कूल एक ऐसे शैक्षणिक नेटवर्क का हिस्सा था जिसे पर्शियन गल्फ मार्टियर्स कल्चरल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट चलाता है। यह नेटवर्क आईआरजीसी से जुड़ा बताया जाता है और इसके तहत करीब 59 स्कूल संचालित होते हैं। स्कूल की वेबसाइट पर छात्राओं की कई तस्वीरें थीं जो हमले के बाद सामने आए वीडियो से मेल खाती हैं।
वेबसाइट पर छात्रों के लिए दिए गए कुछ असाइनमेंट भी दिखते हैं। एक तस्वीर में एक भूलभुलैया वाला खेल था जिसमें बच्चों को रास्ता खोजते हुए ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई तक पहुंचना था।
स्कूल का पता भी ऑनलाइन दर्ज था। पता था रेसालत बुलेवार्ड, गली नंबर 9, आसेफ ब्रिगेड के पीछे। एक स्थानीय बिजनेस लिस्टिंग वेबसाइट पर भी यह स्कूल दर्ज था। वहां एक फोटो में गली के बाहर साफ लिखा हुआ था गर्ल्स स्कूल।
इसी परिसर में एक लड़कों का स्कूल भी बताया जाता है जो शायद उसी इमारत के दूसरे हिस्से में था। हमले के बाद की तस्वीरों में वहां टूटी हुई डेस्क और बिखरा मलबा दिखाई देता है। वहीं कभी छात्र बैठकर पढ़ाई किया करते थे।