मलिक असगर हाशमी, नई दिल्ली
भारत की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 का परिणाम घोषित हो चुका है। हर साल की तरह इस बार भी लाखों युवाओं ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया, लेकिन अंतिम सूची में जगह केवल चुनिंदा उम्मीदवारों को ही मिल पाई। आधिकारिक घोषणा के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों को भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय विदेश सेवा और अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए अनुशंसित किया गया है। इस परिणाम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इस बार 53 मुस्लिम युवाओं ने इस परीक्षा में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि बदलती सामाजिक सोच और शिक्षा के बढ़ते महत्व की एक मजबूत झलक भी है।
पिछले कुछ वर्षों में मुस्लिम समाज के भीतर शिक्षा और विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर जागरूकता बढ़ी है। कई सामाजिक संस्थाएं, शिक्षण केंद्र और मार्गदर्शन कार्यक्रम युवाओं को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं। इन प्रयासों का असर अब दिखाई देने लगा है।
यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले इन युवाओं की कहानी यह बताती है कि लगातार मेहनत, सही दिशा और मजबूत इरादों के साथ किसी भी पृष्ठभूमि से आने वाला छात्र देश की सर्वोच्च सेवाओं तक पहुंच सकता है।
इस वर्ष के परिणाम में जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का योगदान भी उल्लेखनीय माना जा रहा है। इस संस्था के मार्गदर्शन में तैयारी करने वाले 14 छात्रों ने यूपीएससी परीक्षा पास की है। जकात फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। संस्था के संस्थापक जफर महमूद का कहना है कि यह सफलता अचानक नहीं आई है। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और लगातार प्रयास शामिल हैं। उनका मानना है कि यदि इसी तरह तैयारी और मार्गदर्शन जारी रहा तो आने वाले समय में और भी बेहतर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया का रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी भी इस बार अपने परिणाम को लेकर चर्चा में है। यहां से तैयारी करने वाले 38 उम्मीदवारों ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। इनमें से चार उम्मीदवारों ने शीर्ष पचास रैंक के भीतर स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि किसी भी प्रशिक्षण संस्थान के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। खास बात यह भी है कि इन सफल उम्मीदवारों में 15 महिलाएं शामिल हैं, जो यह दर्शाता है कि अब लड़कियां भी सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ ने सफल छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की मेहनत और समर्पण की संस्कृति को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर अध्ययन और धैर्य की आवश्यकता होती है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो देश की प्रशासनिक व्यवस्था में ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ योगदान दे सकें।
#WATCH: #Pulwama’s Dr. Tawseef Isaq clears UPSC, qualifies for #IAS; currently posted as veterinary doctor in Poonch pic.twitter.com/ygoOTLnjbg
— Greater Kashmir (@GreaterKashmir) March 6, 2026
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी से भी इस वर्ष चार उम्मीदवारों ने यूपीएससी परीक्षा पास की है। इनमें नाजिया परवीन, गुलफिजा, यासिर अहमद भट्टी और शाहिद रजा खान के नाम शामिल हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन छात्रों की सफलता को गर्व का विषय बताया है और उम्मीद जताई है कि ये युवा आगे चलकर देश की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस वर्ष का परिणाम हरियाणा के मेवात क्षेत्र के लिए भी खास महत्व रखता है। मेवात लंबे समय से देश के पिछड़े जिलों में गिना जाता रहा है, जहां शिक्षा और रोजगार के अवसर सीमित माने जाते हैं। लेकिन इस बार मेवात के तीन युवाओं ने यूपीएससी परीक्षा पास करके एक नई मिसाल पेश की है। उटावड़ के शाहरुख खान को रैंक 575, बिघावली की ऋचा सिंह तंवर को रैंक 632 और टायरा की इंशा खान को रैंक 678 मिली है। इन तीनों की सफलता ने पूरे क्षेत्र में उत्साह और उम्मीद का माहौल बना दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल इन छात्रों की नहीं है। इसमें उनके परिवारों की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और समाज के सहयोग की भी बड़ी भूमिका है। जिन इलाकों में शिक्षा की सुविधाएं सीमित होती हैं, वहां से इस तरह की सफलता पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन अंतिम सूची में केवल कुछ सौ लोग ही जगह बना पाते हैं। इस परीक्षा में सफलता के लिए वर्षों की तैयारी, व्यापक अध्ययन, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता की आवश्यकता होती है। जो छात्र लगातार मेहनत करते रहते हैं और अपने लक्ष्य से विचलित नहीं होते, वही अंततः इस परीक्षा में सफल हो पाते हैं।

इस वर्ष सफल हुए 53 मुस्लिम उम्मीदवार देश के अलग अलग राज्यों से आते हैं। इनमें बड़े शहरों के साथ साथ छोटे कस्बों और गांवों के छात्र भी शामिल हैं। इनकी सफलता यह संदेश देती है कि मेहनत और शिक्षा के माध्यम से कोई भी युवा अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठकर बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है।
इस बार की मेरिट सूची में कुछ मुस्लिम उम्मीदवारों ने बहुत अच्छी रैंक भी हासिल की है। ए आर रजाह मोहईदीन को रैंक 7, इफरा शम्स अंसारी को रैंक 24 और नबिया परवेज को रैंक 29 मिली है। इसके अलावा भी कई उम्मीदवारों ने अच्छी रैंक प्राप्त कर सिविल सेवा में अपनी जगह बनाई है।
इस परिणाम का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि कई मुस्लिम युवतियों ने भी इस परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इफरा शम्स अंसारी और नबिया परवेज जैसी उम्मीदवारों ने यह साबित किया है कि अब लड़कियां भी सिविल सेवा परीक्षा में बराबरी से आगे बढ़ रही हैं। यह उन पुरानी धारणाओं को भी चुनौती देता है जिनमें यह कहा जाता था कि मुस्लिम समाज में लड़कियों की शिक्षा को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफलताएं समाज में सकारात्मक बदलाव लाती हैं। जब किसी छोटे कस्बे या साधारण परिवार से निकलकर युवा सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित सेवा में पहुंचते हैं तो वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। मेवात जैसे क्षेत्रों में तो इन सफलताओं का असर और भी अधिक होता है। यहां के युवाओं के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा ही वह रास्ता है जो जीवन की दिशा बदल सकता है।
यूपीएससी 2025 का यह परिणाम बताता है कि यदि समाज के भीतर शिक्षा को लेकर प्रयास लगातार जारी रहें तो आने वाले वर्षों में और बेहतर नतीजे देखने को मिल सकते हैं। सामाजिक संस्थाओं, शिक्षकों और परिवारों की भूमिका इसमें बहुत महत्वपूर्ण है। सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर देश का कोई भी युवा सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकता है।
इस वर्ष सफल हुए सभी उम्मीदवारों की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत जीत नहीं है। यह पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी यह यात्रा बताती है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत, धैर्य और शिक्षा के सहारे बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
उम्मीद की जा रही है कि इन युवाओं की सफलता से देश भर में हजारों नए छात्र प्रेरित होंगे और सिविल सेवा में जाने का सपना देखेंगे। आखिरकार किताब और कलम ही वह ताकत है जो किसी भी समाज को आगे बढ़ाती है और जब युवा इस रास्ते को चुनते हैं तो सफलता केवल उनके लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए मायने रखती है।
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