बदनाम इलाके की नई पहचान: यूपीएससी में मेवात के इंशा और शाहरुख चमके

Story by  यूनुस अल्वी | Published by  [email protected] | Date 10-03-2026
New identity of infamous area: Insha and Shahrukh of Mewat shine in UPSC
New identity of infamous area: Insha and Shahrukh of Mewat shine in UPSC

 

यूनुस अल्वी, नूंह/कामां  (हरियाणा-राजस्थान)

‘वह जमाने लद गए जब खलील खां फाख्ता उड़ाया करते थे’ यह पुरानी कहावत अब हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती मेवात क्षेत्र पर सटीक बैठती नजर आती है। वह इलाका जो कभी सोने के नाम पर ठगी, गोकशी और साइबर क्राइम के लिए बदनाम था, आज बदलते समय के साथ नई पहचान बनाने लगा है। अब मेवात की मिट्टी से अपराध की खबरें कम और कामयाबी की गूंज ज्यादा सुनाई दे रही है। यहां के युवा शिक्षा के प्रति उत्साहित हैं और देश के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारियों में शामिल होने के सपने देख रहे हैं।

यूपीएससी 2025 के नतीजों ने इस बदलाव की पुष्टि की है। देशभर में सफल हुए 53 मुस्लिम युवाओं में से दो इंशा खान और शाहरुख खान , मेवात के हैं। यह सफलता केवल एक पद की उपलब्धि नहीं है, बल्कि दशकों से इस इलाके पर लगे नकारात्मक धब्बे को मिटाने की भी कोशिश है।

नूंह के वरिष्ठ वकील नूरुद्दीन नूर का कहना है, "यह बदलाव मेवात के लिए बहुत सकारात्मक संकेत है। अब तक यहां से केवल डॉक्टर और इंजीनियर बनने की खबरें आती थीं, लेकिन प्रशासनिक सेवाओं में सफलता एक नई क्रांति की शुरुआत है।"

इंशा खान की कहानी 

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इंशा खान की कहानी संघर्ष और हिम्मत की मिसाल है। मेवात के कामां जिले के गांव टायरा के रहने वाले इंशा ने यूपीएससी में 678वीं रैंक हासिल की है। इसके पीछे पांच बार की असफलता और छठी बार का अटूट विश्वास छिपा है। साल 2012 में उन्होंने फिरोजपुर झिरका के अरावली पब्लिक स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की और फिर कुरुक्षेत्र के एनआईटी कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें टाटा जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी का ऑफर मिला। लाखों का पैकेज था, लेकिन इंशा ने इसे ठुकरा दिया और यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। कई बार मेंस तक पहुंचे, कई बार इंटरव्यू की दहलीज पर लौट आए, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। आज जब वे सफल हुए हैं, तो पूरा गांव जश्न में डूबा है।

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इंशा अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और बड़े भाई सीए मुख्तियार अहमद को देते हैं। उनका कहना है कि वह कोई टॉपर या असाधारण छात्र नहीं थे, बल्कि औसत विद्यार्थी थे। उनका मानना है कि यदि एक साधारण गांव का लड़का यह मुकाम पा सकता है, तो मेहनत करने वाला कोई भी इसे हासिल कर सकता है।

इंशा की सफलता के पीछे उनके पिता उस्मान खान की मेहनत और संघर्ष की कहानी भी है। उन्होंने करीब 37 साल तक दूध बेचने का काम किया और दिन-रात मेहनत की ताकि उनके बच्चे पढ़ सकें। आज जब बेटा अधिकारी बन गया है, तो उनकी आंखें खुशी से भर आती हैं।

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वे कहते हैं कि यह सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि ईमानदारी की कमाई और समाज की दुआओं का असर है। इंशा की मां ने भी वह वक्त याद किया जब उन्होंने अपने छोटे बेटे को छठी क्लास में ही हॉस्टल भेजा था। उन्होंने बताया कि दिल पर पत्थर रखकर उसे दूर भेजा ताकि वह अच्छी शिक्षा पा सके। आज वही बेटा पूरे इलाके का सिर गर्व से ऊंचा कर रहा है।

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शाहरुख खान की कहानी

मेवात की दूसरी सफलता पलवल जिले के उटावड़ गांव के शाहरुख खान की कहानी है। उन्होंने यूपीएससी में 575वीं रैंक हासिल की। उनके पिता मोहम्मद ताहिर का हमेशा सपना था कि उनका कोई बेटा बड़ा सरकारी अफसर बने, लेकिन पिता यह सफलता देखने के लिए जीवित नहीं रहे।

सात महीने पहले उनका निधन हो गया। शाहरुख ने पिता के उस सपने को अपनी आंखों में बसा लिया और दूसरे प्रयास में सफलता हासिल कर ली। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सेंट जॉन स्कूल से हुई और फिर पलवल और दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। जामिया की आवासीय कोचिंग में दिन-रात मेहनत की। चार भाइयों में तीसरे नंबर के शाहरुख की यह सफलता पूरे जिले में खुशी की लहर लेकर आई। नूंह और हथीन के स्थानीय विधायक भी इसे मेवात के लिए गौरव का पल बताते हैं।

ग्रामीण इलाकों में संसाधनों की कमी हमेशा रहती है, लेकिन मजबूत इरादों से रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं। शाहरुख की सफलता ने साबित कर दिया कि मेवात का युवा अब भटकने के लिए नहीं, बल्कि देश चलाने के लिए तैयार है। सामाजिक कार्यकर्ता वसीम अकरम का कहना है कि मेवात बदल रहा है और अब इसे केवल अपराध और बुराई की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

इंशा और शाहरुख की जीत सिर्फ उनके परिवारों की सफलता नहीं है, बल्कि यह शिक्षा और मेहनत को सबसे बड़ा हथियार मानने वाले समाज की जीत है। मेवात के पिछड़ेपन की बेड़ियां टूटने लगी हैं। इस सफलता ने उन तमाम लड़कों के लिए मिसाल पेश की है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते थे।

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आज नूंह, कामां, डीग और पलवल के गांवों में चर्चा यह नहीं है कि किसने क्या अपराध किया, बल्कि यह है कि अगला कलेक्टर या एसपी हमारे बीच से कौन होगा। मेवात अब साइबर ठगी और अपराध की दुनिया से बाहर निकलकर किताबों और शिक्षा के माध्यम से अपना भविष्य तलाश रहा है।

इंशा और शाहरुख की यह कहानी बताती है कि अगर जज्बा मजबूत हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो कोई भी क्षेत्र पिछड़ा या बदनाम क्यों न हो, वहां से भी देश के लिए सक्षम और सफल अधिकारी उभर सकते हैं। मेवात अब केवल अपने अतीत के लिए नहीं, बल्कि उज्जवल भविष्य के लिए पहचाना जाएगा।

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