यूनुस अल्वी, अलवर (राजस्थान)
राजस्थान के अलवर से लेकर हरियाणा के नूंह-पलवल, फरीदाबाद और उत्तर प्रदेश के मथुरा-कोसी क्षेत्र तक फैले मेवात के लिए एक नाम प्रेरणा बन चुका है-जाहिदा खान। मेवात की पहली महिला विधायक बनने का गौरव हासिल करने वाली जाहिदा ने वकालत छोड़कर राजनीति में कदम रखा और आज वे न केवल मेवात की बल्कि पूरे राजस्थान की मुस्लिम सियासत का चेहरा बन गई हैं। उनका राजनीतिक सफर अदालत की कार्यवाही से लेकर विधानसभा और मंत्रिमंडल तक फैला हुआ है, और उनकी धमक अब सियासत के गलियारों में भी साफ महसूस की जा रही है।

जाहिदा खान के राजनीतिक सफर की खास बात यह है कि उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक विरासत को अपने कंधों पर उठाया। मेवात की राजनीति में उनके परिवार का लंबा इतिहास रहा है। इस क्षेत्र की राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षिक चेतना में कुछ नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हैं-चौधरी मोहम्मद यासीन ख़ां, चौधरी तैयब हुसैन और जाहिदा खान। जाहिदा अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं, लेकिन उनकी पहचान ने पूरे क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है।
जाहिदा का जन्म 8मार्च 1968को हुआ। वे ऐसे परिवार से आती हैं जिसका इतिहास मेवात की सामाजिक और राजनीतिक चेतना के साथ गहराई से जुड़ा है। उनके दादा चौधरी मोहम्मद यासीन ख़ां, जिन्हें मेवात में 'बाबा-ए-क़ौम' के नाम से जाना जाता है, ने 1921में शिक्षा की अलख जगाई।
उन्होंने ब्रेन मेव हाई स्कूल की स्थापना की, जो आगे चलकर यासीन मेव डिग्री कॉलेज बन गया। उनका सपना था कि मेव समाज शिक्षा के माध्यम से मुख्यधारा में खड़ा हो। यासीन ख़ां संयुक्त पंजाब विधान परिषद के सदस्य (1926-1945) और स्वतंत्रता के बाद पंजाब विधानसभा के सदस्य (1952-1962) रहे।
1957में निर्विरोध विधायक चुने जाने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम दर्ज है। विभाजन के समय उन्होंने मेव समाज के पाकिस्तान पलायन का विरोध किया और महात्मा गांधी को बुलाकर मेवों का मनोबल बढ़ाया। यही कारण है कि आज मेव समाज भारत में आत्मविश्वास के साथ खड़ा है।

जाहिदा के पिता चौधरी तैयब हुसैन भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में से थे, जिन्होंने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान—तीनों राज्यों में मंत्री पद संभाला। वे नूंह और तावडू क्षेत्र से विधायक रहे, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष बने और शिक्षा, अल्पसंख्यक अधिकार तथा सामाजिक न्याय के मजबूत पैरोकार रहे। उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व क्षमता ने पूरे मेवात को विकसित और संगठित करने में मदद की।
जाहिदा के परिवार में दो भाई और एक बड़ी बहन हैं। बड़े भाई जाकिर हुसैन हरियाणा वक्फ बोर्ड के प्रशासक हैं और इससे पहले नूंह और तावडू से तीन बार विधायक रह चुके हैं। छोटे भाई फजल हुसैन राजस्थान के तिजारा क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। बड़ी बहन स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और उनके पति ईएनटी विशेषज्ञ हैं।
जाहिदा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के JMC स्कूल से प्राप्त की और इसके बाद एम.डी.यू. रोहतक से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। एलएलबी की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से की और राजस्थान की राजनीति में कदम रखने से पहले दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत करती रहीं।
राजनीतिक करियर और उपलब्धियां
साल 2000 में, जब उनके पिता चौधरी तैयब हुसैन गहलोत सरकार में मंत्री थे, उस दौरान पंचायत चुनाव हुए। कामा पंचायत समिति महिला कोटे में आरक्षित थी। क्षेत्र के लोगों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जाहिदा ही सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैं। सभी के सहयोग से उन्होंने चुनाव लड़ा और निर्विरोध जीतकर कामा पंचायत समिति की अध्यक्ष बनीं। यह उपलब्धि आज भी रिकॉर्ड के रूप में दर्ज है।
जाहिदा ने राजनीति में आते ही सामाजिक विकास और शिक्षा को प्राथमिकता दी। विशेष रूप से बालिका शिक्षा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता रही। 2008में उनके पिता के निधन के बाद उन्होंने प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस की टिकट पर विधायक बनीं।
इस जीत के साथ वे मेवात की पहली महिला विधायक बनीं। उन्होंने 2013 तक लगातार जनता की सेवा की और 2018में हुए आम विधानसभा चुनावों में भी सफलता प्राप्त की। इस दौरान वे राजस्थान सरकार में शिक्षा मंत्री रहीं और शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कला-संस्कृति, मुद्रण एवं स्टेशनरी जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली।

जाहिदा खान का पारिवारिक सहयोग
जाहिदा खान के पति जलीस खान, जो इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं, ने नौकरी करने के बजाय व्यवसाय शुरू किया। जलीस खान राजनीतिक कार्यों में आवश्यकता पड़ने पर सहयोग करते हैं और पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखते हैं। उनका कहना है, “चौधरी तैयब हुसैन के देहांत के बाद कामा से जाहिदा खान के राजनीति में प्रवेश को लेकर दोनों परिवारों की सहमति थी—हमारी भी और पूरे चौधरी परिवार की भी।”
जाहिदा के दो बच्चे हैं। उनकी बेटी डॉक्टर हैं और बेटा साजिद खान एलएलबी कर चुका है। 2021 में साजिद को पहाड़ी पंचायत समिति से निर्विरोध प्रधान चुना गया। वह परिवार के व्यवसाय को भी संभालता है और साथ ही राजनीतिक जिम्मेदारियां भी निभाता है। परिवार ने जाहिदा को पूरा “फ्री हैंड” दिया है, जिससे उन्होंने राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी कार्यशैली, दबंगपन, साफगोई और ईमानदारी के कारण लोग उन्हें उनके पिता की झलक मानते हैं।
पूर्व मंत्री जाहिदा खान का कहना, “ आज के समय में राजनीति में स्पष्ट और निष्पक्ष तरीके से काम करना अत्यंत कठिन हो गया है।: पिछले 15–20वर्षों में राजनीतिक माहौल में काफी बदलाव आया है और अच्छे लोग राजनीति में आने से कतराने लगे हैं। उन्होंने कहा, “अब राजनीति केवल सेवा का माध्यम नहीं रह गई, बल्कि यह व्यापार से भी जुड़ गई है। लोग इसे व्यवसाय की दृष्टि से देखने लगे हैं, जो लोकतंत्र के लिए अत्यंत दुखद और चिंताजनक है।”
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मेवात की विरासत और योगदान
मेवात की सामाजिक और राजनीतिक चेतना के इतिहास में कुछ गिने-चुने परिवारों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इन्हें छोड़कर क्षेत्र का इतिहास अधूरा है। यासीन ख़ां की शिक्षा, तैयब हुसैन की सियासत और जाहिदा खान का महिला नेतृत्व तीन पीढ़ियों की यह विरासत मेवात की पहचान बन चुकी है।
जाहिदा खान ने केवल राजनीति में ही नहीं बल्कि शिक्षा और सामाजिक न्याय को भी अपनी प्राथमिकता बनाया। वे एआईसीसी सदस्य, राजस्थान पीसीसी पदाधिकारी और ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की महासचिव भी रही हैं। उनके भाई जाकिर हुसैन ने हरियाणा और मेवात में तीन बार विधायक रहकर अपने परिवार की राजनीतिक परंपरा को आगे बढ़ाया है।

समाज और लोकतंत्र के लिए संदेश
जाहिदा खान का राजनीतिक सफर यह संदेश देता है कि सेवा और समाज के लिए समर्पण ही सच्ची राजनीति है। उनके नेतृत्व में मेवात के लोग शिक्षा और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। यह परिवार सत्ता से अधिक सेवा, पद से अधिक सिद्धांत और राजनीति से अधिक समाज को प्राथमिकता देने का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
मेवात की पहचान-शिक्षा, सियासत और महिला नेतृत्व तीन पीढ़ियों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है। यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक चेतना की कहानी है, जिसने दशकों तक शिक्षा, अधिकार और स्वाभिमान के लिए संघर्ष किया। जाहिदा खान ने इस विरासत को संभालते हुए आधुनिक राजनीति में महिलाओं और समाज के लिए नए मार्ग खोले हैं।
राजनीति में आजकल स्पष्टता और निष्पक्षता की कमी महसूस होती है, लेकिन जाहिदा खान जैसे नेता यह साबित करते हैं कि सिद्धांत और समाज के प्रति सेवा भाव राजनीति का मूल उद्देश्य होना चाहिए। मेवात के लिए उनका योगदान और नेतृत्व प्रेरक है। यासीन ख़ां की शिक्षा, तैयब हुसैन की दूरदर्शिता और जाहिदा खान का महिला नेतृत्व तीनों मिलकर मेवात को सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से सशक्त बनाने की कहानी बयां करते हैं।