भारत की भाषाई विविधता हमारी एकता की आधारशिला है: प्रो. एम. जे. वारसी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 29-08-2025
India's linguistic diversity is the cornerstone of our unity: Prof. M.J. Warsi
India's linguistic diversity is the cornerstone of our unity: Prof. M.J. Warsi

 

आवाज द वाॅयस / अलीगढ़

 

भारत की भाषायी बहुलता को राष्ट्रीय एकता का सशक्त माध्यम बताते हुए प्रसिद्ध भाषाविद् और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के पूर्व भाषा विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. एम. जे. वारसी ने कहा कि "भारत की भाषाएं केवल संवाद के साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विविधता और साझा विरासत की जीवंत प्रतीक हैं."

प्रो. वारसी  दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय भाषा परिवार: भाषाई और साहित्यिक आदान-प्रदान के माध्यम से राष्ट्रीय एकता की सुदृढ़ता” में आमंत्रित वक्ता के रूप में शामिल हुए. इस आयोजन का संयुक्त रूप से आयोजन ईएफएलयू, शिलॉंग और भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने किया.

उनके व्याख्यान का विषय था  “भारत के विविध सांस्कृतिक परिदृश्यों के बीच सामंजस्य बनाए रखने में भाषाई और साहित्यिक परंपराओं की भूमिका.” इस अवसर पर उन्होंने बताया कि कैसे भाषाई और साहित्यिक संवाद सहानुभूति को बढ़ावा देते हैं, एकता को पोषित करते हैं और साझा राष्ट्रीय दृष्टिकोण के निर्माण में सहायक होते हैं.

प्रो. वारसी ने कहा, “भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि समुदायों के बीच आपसी समझ का पुल है. जब हम एक-दूसरे की भाषाओं, साहित्य और अभिव्यक्तियों को समझते हैं अनुवाद, शिक्षा और सांस्कृतिक संवाद के ज़रिए,तो यह प्रक्रिया हमारे दिलों को जोड़ती है, न कि केवल शब्दों को.”

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक भारतीय भाषा अपने भीतर शताब्दियों पुरानी साहित्यिक, दार्शनिक, लोक-कथाओं और मौखिक परंपराओं को संजोए हुए है. संस्कृत, तमिल, कन्नड़, बांग्ला, हिंदी, उर्दू, मलयालम, तेलुगु, मराठी, पंजाबी जैसी समृद्ध भाषाओं से लेकर सैकड़ों जनजातीय भाषाएं भारत की सांस्कृतिक संपदा की धरोहर हैं, जो वर्तमान पीढ़ी को उनके पुरखों की बुद्धिमत्ता और मूल्यों से जोड़ती हैं.

अपने समापन भाषण में प्रो. वारसी ने यह स्पष्ट किया कि भाषाई और साहित्यिक संवाद के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के लिए नीतिगत प्रतिबद्धता आवश्यक है. उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म 'भाषिणी प्रोजेक्ट' के महत्व को रेखांकित किया, जो भाषाई संसाधनों को सहज और सुलभ बनाता है.

इसके साथ ही उन्होंने “एक भारत श्रेष्ठ भारत” जैसे सांस्कृतिक अभियानों के विस्तार, बहुभाषी शिक्षा को प्रोत्साहन और नई शिक्षा नीति 2020 के तहत मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया..

उन्होंने कहा, “भारत की भाषाएँ हमारी आत्मा की आवाज़ हैं. जब हम इनका आदान-प्रदान करते हैं, तो केवल शब्द नहीं, दिल जुड़ते हैं. यही जुड़ाव भारत को एक राष्ट्र के रूप में परिभाषित करता है.”

इस प्रेरणादायक व्याख्यान ने दर्शाया कि किस प्रकार भाषा और साहित्य न केवल अभिव्यक्ति के साधन हैं, बल्कि राष्ट्रीय समरसता और सांस्कृतिक संवाद की नींव भी हैं.