ईद मिलाद जुलूस को लेकर देशभर में शांति और अनुशासन की अपील

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 26-08-2026
Appeal for peace and discipline across the country regarding the Eid-e-Milad procession.
Appeal for peace and discipline across the country regarding the Eid-e-Milad procession.

 

आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली/पुणे

ईद मिलाद उन नबी के मौके पर देश के अलग अलग हिस्सों में होने वाले जुलूसों को लेकर मुस्लिम संगठनों और पुलिस प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पुणे में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा जुलूस में डीजे के इस्तेमाल को लेकर है। मिस फराह चैरिटेबल फाउंडेशन ने पुणे पुलिस से साफ कहा है कि 26 अगस्त 2026 को निकलने वाले ईद मिलाद उन नबी के जुलूस को पूरी तरह डीजे मुक्त रखा जाए। फाउंडेशन का कहना है कि केवल डीजे की आवाज कम करने की अपील पर्याप्त नहीं होगी। ध्वनि प्रदूषण से जुड़े कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का जुलूस के पूरे मार्ग पर सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए।

फाउंडेशन की ओर से इस संबंध में पुणे पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत भी भेजी गई है। फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. फराह अनवर हुसैन शेख और निदेशक अनवर शेख ने 23 अगस्त की रात करीब 9 बजकर 35 मिनट पर पुणे पुलिस आयुक्त कार्यालय को ईमेल भेजा।

इसमें पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त, सभी डीसीपी, एसीपी, क्राइम ब्रांच, स्पेशल ब्रांच और संबंधित पुलिस थानों के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।फाउंडेशन ने कहा है कि नाना पेठ से शुरू होकर कैंप और एमजी रोड से गुजरने वाला जुलूस गणेश पेठ में समाप्त होगा।

इतने बड़े धार्मिक आयोजन में ध्वनि प्रदूषण को लेकर पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि जुलूस के दौरान डीजे बजाया गया और पुलिस ने कानून के मुताबिक कार्रवाई नहीं की तो वह अदालत का रुख करेगी। फाउंडेशन ने इसे धमकी नहीं बल्कि कानूनी अधिकार के इस्तेमाल का मामला बताया है।

ईद मिलाद उन नबी को पैगंबर हजरत मोहम्मद की पैदाइश की याद में मनाया जाता है। मुस्लिम समाज के लिए यह धार्मिक और भावनात्मक महत्व का अवसर है। फाउंडेशन का कहना है कि इस अवसर का मूल संदेश शांति, प्रेम, मानवता और भाईचारा है। ऐसे में जुलूस में तेज आवाज वाले डीजे, फिल्मी गाने या अश्लील गीतों को धार्मिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।

संस्था ने यह भी सवाल उठाया है कि बड़े डीजे कौन उपलब्ध कराता है, उनका संचालन कौन करता है और इनके लिए पैसा कहां से आता है। पुलिस प्रशासन से इस पहलू की भी जांच करने की मांग की गई है।

फाउंडेशन ने 2022 की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि तेज डीजे की आवाज से एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई थी। संस्था के मुताबिक, तेज ध्वनि का असर केवल बुजुर्गों पर नहीं पड़ता। छोटे बच्चों, बीमार लोगों और आम नागरिकों को भी इससे परेशानी होती है। इसलिए ईद मिलाद के जुलूस में ध्वनि सीमा का पालन केवल कागज पर नहीं बल्कि जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए।

फाउंडेशन ने पुलिस से यह भी कहा है कि जुलूस के दौरान केवल औपचारिक रूप से डीजे बंद कराने या आवाज कम कराने की घोषणा न की जाए। पुलिस अधिकारी पूरे मार्ग पर निगरानी रखें। नियम तोड़ने वालों पर तत्काल कार्रवाई हो।

संस्था का कहना है कि पिछले कई वर्षों से मुस्लिम समुदाय के लोग इस मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से उठा रहे हैं। उसका उद्देश्य ईद मिलाद जुलूस को रोकना नहीं है। मांग सिर्फ इतनी है कि जुलूस धार्मिक मर्यादा, शांति और अनुशासन के साथ निकले।

इसी बीच देश के दूसरे हिस्सों से भी ईद मिलाद उन नबी को लेकर अनुशासन और शांति की अपील सामने आई है। हिंदुस्तान इस्लामिक सेंटर ने रबी उल अव्वल के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों और जुलूसों के लिए एक सलाह जारी की है। इसमें मुसलमानों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की अपील की गई है।

सलाह में कहा गया है कि जुलूस केवल प्रशासन की ओर से निर्धारित मार्ग से निकाला जाए। जुलूस में शामिल होने वाले संगठन अपने घरों से झंडे और बैनर लपेटकर लाएं और निर्धारित स्थान पर पहुंचने के बाद ही उन्हें खोलें। जुलूस के दौरान कलिमा और दुरूद शरीफ पढ़ने की अपील की गई है। ऐसे नारे और गीतों से बचने को कहा गया है जिनसे किसी दूसरे समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।

युवाओं से विशेष रूप से अपील की गई है कि वे मोटरसाइकिल स्टंट से दूर रहें। किसी भी तरह का खतरनाक प्रदर्शन जुलूस की धार्मिक गरिमा और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। सलाह में देश की सुरक्षा, शांति और विकास के लिए विशेष दुआ करने की बात भी कही गई है।

उत्तर प्रदेश के बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमाअत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भी ईद मिलाद उन नबी के मौके पर मुसलमानों को बधाई दी और जुलूसों में अनुशासन बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जुलूस ए मोहम्मदी के दौरान कुछ ऐसी गतिविधियां सामने आने लगी हैं जिन्हें इस्लामी परंपरा के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने मुस्लिम युवाओं को ऐसी गतिविधियों से बचने की सलाह दी है।

लखनऊ में शिया धार्मिक नेता मौलाना सैफ अब्बास ने भी बारावफात के मौके पर शांति और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पैगंबर मोहम्मद की पैदाइश की खुशी में मनाए जाने वाले इस अवसर का मूल संदेश अमन और इंसानियत है। उनके मुताबिक, कुछ शरारती तत्व धार्मिक आयोजनों में विवाद पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए सभी लोगों को संयम रखना चाहिए। खासकर चुनावी माहौल में किसी भी तरह के विवाद से बचने की जरूरत है।

कर्नाटक के विजयपुर ग्रामीण पुलिस थाने में भी 22 अगस्त को ईद मिलाद को लेकर शांति बैठक आयोजित की गई। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने थाना क्षेत्र के विभिन्न समुदायों के प्रमुख लोगों को बुलाकर त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से मनाने की अपील की। बैठक में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने की सलाह दी गई।

मुंबई में भी ईद मिलाद के वार्षिक जुलूस से पहले खलीफत हाउस में बैठक हुई। इसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, रजा अकादमी के सैयद नूरी, मुफ्ती अशरफ सैयद, विधायक मनोज जामसुतकर, विधायक अमीन पटेल, पूर्व विधायक वारिस पठान और स्थानीय प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य जुलूस को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने और प्रशासन तथा समुदाय के बीच बेहतर समन्वय कायम करना था।

देशभर में ईद मिलाद उन नबी के कार्यक्रमों को लेकर प्रशासन की सक्रियता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग जुलूसों और धार्मिक सभाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में कानून व्यवस्था, यातायात, ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक सुरक्षा अहम मुद्दे बन जाते हैं। पुणे में डीजे को लेकर उठी मांग ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल पुणे पुलिस की भूमिका को लेकर है। क्या 26 अगस्त के ईद मिलाद जुलूस में डीजे पूरी तरह बंद रहेगा? क्या पुलिस ध्वनि प्रदूषण के नियमों को जुलूस के पूरे रास्ते पर लागू कर पाएगी? और क्या धार्मिक आयोजन अपने मूल संदेश अमन, प्रेम, भाईचारे और इंसानियत के साथ संपन्न होगा? इन सवालों पर पुणे के लोगों की नजर है।

मुस्लिम संगठनों की ओर से भी लगातार यही संदेश दिया जा रहा है कि ईद मिलाद उन नबी केवल जुलूस निकालने का अवसर नहीं बल्कि पैगंबर मोहम्मद के जीवन, उनके नैतिक मूल्यों और शांति के संदेश को याद करने का दिन है। इसलिए धार्मिक उत्सव की गरिमा बनाए रखना आयोजकों, समुदाय और प्रशासन तीनों की साझा जिम्मेदारी है।