अशफाक कायमखानी/ जयपुर
राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य के तबादले को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। जारोड़ा गांव स्थित पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहम्मद अख्तर नदीम के स्थानांतरण के विरोध में ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने स्कूल में तालाबंदी कर दी है। आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। अब ग्रामीण इसे अनिश्चितकालीन आंदोलन बनाने की बात कह रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मोहम्मद अख्तर नदीम ने इस स्कूल को केवल नौकरी की तरह नहीं चलाया। उन्होंने करीब तीन दशक तक स्कूल और विद्यार्थियों के लिए लगातार काम किया। उनका दावा है कि प्रधानाचार्य के प्रयासों से स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर करीब 1500 तक पहुंची। आसपास के कई गांवों के बच्चों को भी इसी विद्यालय में दाखिला दिलाया गया।
धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि नदीम की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता ऐसी रही कि वह सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक स्कूल में मौजूद रहते थे। छुट्टियों के दौरान भी जरूरत होने पर स्कूल में पढ़ाई कराई जाती थी। आसपास के गांवों से विद्यार्थियों को स्कूल लाने के लिए बसों की व्यवस्था भी की गई।
ग्रामीणों के अनुसार, जारोड़ा का पीएम श्री स्कूल अब आसपास के गांवों के लिए शिक्षा का बड़ा केंद्र बन चुका है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के किसी सरकारी स्कूल में 1500 विद्यार्थियों का नामांकन होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
प्रधानाचार्य की जगह दूसरे शिक्षक का इंतजार नहीं
धरने पर बैठे एक बुजुर्ग ग्रामीण ने मोहम्मद अख्तर नदीम के काम करने के तरीके का उदाहरण देते हुए बताया कि जब कभी गणित या विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय के शिक्षक का तबादला हो जाता था, तब नदीम बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं देते थे।
ग्रामीण का दावा है कि कई मौकों पर नदीम ने अपनी जेब से पैसे खर्च कर निजी शिक्षक की व्यवस्था की। यह व्यवस्था तब तक जारी रखी जाती थी, जब तक स्कूल में संबंधित विषय का नया शिक्षक नहीं आ जाता था।
ग्रामीणों का कहना है कि इसी वजह से प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भरोसा बनाया। यही भरोसा अब उनके तबादले के खिलाफ आंदोलन की वजह बना है।
तीन महीने तक रिलीव नहीं करने का आश्वासन भी बेअसर
मामला बढ़ने के बाद बुधवार दोपहर मेड़ता के उपखंड अधिकारी सुनील चौधरी और पुलिस उपाधीक्षक रामकरण मलिंडा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत की। जिला प्रशासन से चर्चा के बाद ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया कि मोहम्मद अख्तर नदीम को अगले तीन महीने तक स्कूल से रिलीव नहीं किया जाएगा।
हालांकि, ग्रामीण इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना है कि तीन महीने बाद फिर वही स्थिति पैदा हो जाएगी। इसलिए उनकी मांग केवल रिलीव नहीं करने की नहीं है। वे स्थानांतरण आदेश पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक प्रधानाचार्य का तबादला रद्द नहीं होता, स्कूल का ताला नहीं खोला जाएगा। उनका आंदोलन जारी रहेगा।
नागौर के मेड़ता ब्लॉक के जारोड़ा गांव में शिक्षक नदीम खान के तबादले के विरोध में छात्र-अभिभावक धरने पर बैठे हैं।
— S. Kholwad (@kholwad_santram) August 19, 2026
स्कूल में तालाबंदी कर तबादला निरस्त करने की मांग की जा रही है।
अभिभावकों का कहना है कि उनके प्रयासों से स्कूल ने जिले में बेहतरीन पहचान बनाई है।#SchoolThikKaro pic.twitter.com/CQCmsDo4Nr
विद्यार्थियों ने सेकंड टेस्ट का किया बहिष्कार
तालाबंदी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। स्कूल में विद्यार्थियों ने द्वितीय परख टेस्ट का बहिष्कार कर दिया। इससे शिक्षा विभाग के सामने भी मुश्किल खड़ी हो गई है।
जारोड़ा का पीएम श्री स्कूल राजस्थान के चुनिंदा पीएम श्री विद्यालयों में शामिल है। लगातार दूसरे दिन स्कूल में तालाबंदी होने से यह मामला आसपास के क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे बच्चों की पढ़ाई खराब नहीं करना चाहते। उनका कहना है कि मौजूदा स्थिति के लिए वे नहीं, बल्कि प्रधानाचार्य का तबादला जिम्मेदार है। उनका मानना है कि जिस शिक्षक और प्रधानाचार्य ने वर्षों तक स्कूल को मजबूत किया, उसे अचानक हटाने का फैसला विद्यार्थियों के हित में नहीं है।
आठ गांवों के ग्रामीण आंदोलन में शामिल
आंदोलन में आसपास के करीब आठ गांवों के ग्रामीणों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। धरना स्थल पर ग्रामीण तिरपाल और दरी लगाकर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक मोहम्मद अख्तर नदीम को वापस जारोड़ा स्कूल में नहीं भेजा जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे।
कुछ ग्रामीणों ने प्रशासन को आगे की रणनीति भी बता दी है। उनका कहना है कि वे पहले जिलाधिकारी से मुलाकात करेंगे। यदि वहां से समाधान नहीं निकला तो बसों से जयपुर जाएंगे और मुख्यमंत्री के सामने अपनी मांग रखेंगे।
कुछ विद्यार्थियों की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि प्रधानाचार्य को यहां से स्थानांतरित किया जाता है तो वे स्कूल छोड़ने और टीसी कटवाने तक का फैसला कर सकते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय विधायक ने बनाई दूरी
इस पूरे विवाद में स्थानीय मेड़ता विधायक की भूमिका को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी बताई जा रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि जनप्रतिनिधि मामले में हस्तक्षेप करें और सरकार के सामने उनकी मांग रखें। फिलहाल स्थानीय विधायक की ओर से इस स्थानांतरण विवाद में सक्रिय हस्तक्षेप सामने नहीं आया है।
शिक्षा विभाग के लिए भी यह मामला आसान नहीं है। एक तरफ तबादला प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। दूसरी तरफ ग्रामीण और विद्यार्थी प्रधानाचार्य के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। स्कूल में तालाबंदी और परीक्षा का बहिष्कार होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
सोशल मीडिया पर भी नदीम के समर्थन में प्रतिक्रिया
मोहम्मद अख्तर नदीम के तबादले का मामला सोशल मीडिया तक भी पहुंच गया है। उनके समर्थन में कई लोगों ने टिप्पणियां की हैं। सोशल मीडिया पर लोग उनके शिक्षा के प्रति समर्पण और ग्रामीणों के साथ बनाए गए संबंधों का उल्लेख कर रहे हैं।
चिरंजी लाल नाम के एक व्यक्ति ने टिप्पणी करते हुए नदीम के प्रति सम्मान जताया। वहीं मुश्ताक हुसैन ने लिखा कि लोग अच्छाई की कद्र करते हैं और समाज में एक दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना अब भी मौजूद है।
सोशल मीडिया की इन प्रतिक्रियाओं से भी संकेत मिलता है कि यह मामला केवल एक सरकारी कर्मचारी के स्थानांतरण तक सीमित नहीं रह गया है। यह ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था, शिक्षक और विद्यार्थियों के रिश्ते तथा लंबे समय तक किसी स्कूल के लिए काम करने वाले शिक्षक की भूमिका से भी जुड़ गया है।
अब सरकार के फैसले पर नजर
जारोड़ा पीएम श्री स्कूल में जारी विवाद का समाधान अब राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के स्तर पर निर्भर करता दिखाई दे रहा है। प्रशासन ने फिलहाल तीन महीने तक प्रधानाचार्य को रिलीव नहीं करने का आश्वासन दिया है। लेकिन ग्रामीण स्थानांतरण आदेश रद्द कराने पर अड़े हैं।
उनका कहना है कि अस्थायी राहत उन्हें स्वीकार नहीं है। वे मोहम्मद अख्तर नदीम को वापस उसी स्कूल में प्रधानाचार्य के रूप में देखना चाहते हैं।
करीब 1500 विद्यार्थियों वाले इस सरकारी स्कूल में जारी तालाबंदी ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है। अगर किसी प्रधानाचार्य के लंबे कार्यकाल और शिक्षा के लिए किए गए काम से ग्रामीण संतुष्ट हैं, तो क्या उसके तबादले पर स्थानीय समुदाय की राय को भी महत्व मिलना चाहिए। फिलहाल जारोड़ा गांव में ग्रामीण इसी सवाल के साथ धरने पर बैठे हैं।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस विवाद का स्थायी समाधान कैसे निकालता है। फिलहाल ग्रामीणों का आंदोलन जारी है और स्कूल के मुख्य द्वार पर लगा ताला शिक्षा विभाग के सामने एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।