देस-परदेस : अमेरिका-ईरान संवाद में ‘कभी हाँ, कभी ना!’

Story by  प्रमोद जोशी | Published by  [email protected] | Date 28-04-2026
Global Watch: ‘Sometimes Yes, Sometimes No!’ in US-Iran Dialogue
Global Watch: ‘Sometimes Yes, Sometimes No!’ in US-Iran Dialogue

 

प्रमोद जोशी

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में प्रस्तावित सीधी बातचीत का दूसरा दौर शुरू ही नहीं हो पाया. उधर राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या के एक और प्रयास की खबर ने मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल लगता है कि अमेरिका और ईरान दोनों लड़ाई को लंबा खींचना नहीं चाहते हैं, लेकिन यह भी अनिश्चित है कि वे स्थायी शांति समझौते की शर्तों पर सहमत हो पाएँगे या नहीं.

शनिवार को वार्ता में उस समय बाधा उत्पन्न हुई, जब ईरानी विदेशमंत्री अब्बास अराग़ची पाकिस्तानी मध्यस्थों के साथ अपनी बैठकों का अंतिम दौर समाप्त कर रहे थे, तभी ट्रंप ने अचानक घोषणा की कि उनके सहयोगी, नए दौर की बातचीत के लिए पाकिस्तान नहीं जाएँगे.

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‘बेहतर’ योजना?

ट्रंप का कहना है कि ईरान ने विलंब से एक ‘बेहतर’ योजना प्रस्तुत की है, लेकिन हमारे वार्ताकार इस्लामाबाद नहीं जाएँगे. ईरान की गरज़ है, तो फोन पर बात कर ले. उन्होंने प्रस्ताव का विवरण नहीं दिया. इतना ज़रूर कहा है कि लड़ाई बहुत जल्द खत्म होने वाली है.

अमेरिकी न्यूज़ वैबसाइट ‘एक्सियोस’ के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका को एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते की माँग की गई है.

एक अमेरिकी अधिकारी और इस मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने ‘एक्सियोस’ को बताया, ईरान ने अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और युद्ध समाप्त करने के लिए एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसमें परमाणु-वार्ता को बाद के चरण के लिए स्थगित करने का सुझाव है.

फॉक्स न्यूज के ‘द संडे ब्रीफिंग’ कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा, ‘अगर वे बात करना चाहते हैं, तो हमें फोन करें. हमारे पास अच्छी, सुरक्षित लाइनें हैं.’ट्रंप ने कहा, ‘ईरान में जिन लोगों से हम अभी बातचीत कर रहे हैं, उनमें से कुछ बहुत ही समझदार हैं, जबकि कुछ नहीं. मुझे उम्मीद है कि ईरान समझदारी से काम लेगा.’

सवाल यह है कि यह ‘बेहतर प्रस्ताव’ क्या है और क्या उसे लेकर ईरान में सर्वानुमति है? ट्रंप ने यह भी कहा, ‘उनके (ईरानियों के) 'नेतृत्व' में जबरदस्त कलह और भ्रम है. किसी को नहीं पता कि असल में कौन सत्ता में है, यहाँ तक कि उन्हें भी नहीं,’

हाल में ‘अलजज़ीरा’ समेत कई मीडिया हाउसों ने इस बात को रेखांकित किया है कि यह स्पष्ट नहीं है कि ईरानी फैसले किस स्तर पर हो रहे हैं. कौन है देश का सर्वोच्च नेता?

ईरानी टीम की वापसी

शनिवार को अमेरिकी शिष्टमंडल की यात्रा के ठीक पहले खबर आई थी कि ईरान के विदेशमंत्री अराग़ची, आए और पाकिस्तानी नेताओं के साथ बातचीत करने के बाद ओमान चले गए. इस दौरान वे फिर से वापस पाकिस्तान आए और वहाँ से रूस चले गए. 

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से फोन पर हुई बातचीत में ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि जब तक ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर अमेरिका नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखेगा, तब तक तेहरान शांति वार्ता में दोबारा शामिल नहीं होगा.  

इस फोन कॉल से संकेत मिलता है कि ईरान ने ही वार्ता के इस दौर को टाला है. पहले सहमत होना और फिर मुकर जाना, बताता है कि कोई बात ज़रूर है. लगता है कि ईरान में दो तरह के विचार हैं. एक पक्ष अमेरिकी पाबंदियों से पार पाने के लिए नाभिकीय-तकनीक और संवर्धित-यूरेनियम के मामले में पीछे हटने को तैयार है और दूसरा पक्ष कठोर रुख अपनाना चाहता है.

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वैचारिक मतभेद?

इस्लामाबाद में वार्ता का दूसरा दौर शुरू होने के पहले ही पश्चिमी पर्यवेक्षकों ने कहना शुरू कर दिया था कि ईरानी नेतृत्व के भीतर कट्टरपंथियों और नरमपंथियों के बीच टकराव है.पता नहीं ये अंतर्विरोध वास्तव में हैं या प्लांट किए गए हैं, पर इस टकराव की बात पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आने के बाद, दूसरे दौर में समझौते की संभावना और भी कम हो गई थी.

‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के अनुसार, ईरानी विदेशमंत्री अब्बास अराग़ची 24अप्रेल को इस्लामाबाद पहुँच गए थे, पर ऐसे में इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी समाचार एजेंसी तसनीम ने कहा, ‘अमेरिका के साथ वार्ता फिलहाल स्थगित है, और अराग़ची की इस्लामाबाद-यात्रा, वार्ता के लिए नहीं है.’ इसका मतलब है कि वार्ता से पीछे हटने का फैसला देर से हुआ.

ईरानी-नेतृत्व ने युद्ध के दौरान एकता दिखाई है और एक कठोर, एकीकृत कमान प्रणाली बनाए रखी है, पर कट्टरपंथी गुट आईआरजीसी और अपेक्षाकृत उदार अराग़ची गुट के संदेशों में विरोधाभास है.

‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ का अनुमान है कि ईरानी नेतृत्व में फूट पड़ने से अमेरिका की राह मुश्किल होगी. ईरान का कट्टरपंथी तबका, वार्ताकारी टीम पर समझौता न करने के लिए दबाव बनाएगा. जिन बातों पर सहमति बन भी गई होगी, उनपर पानी फिरेगा.  

नेतृत्व की आलोचना

खबरें इस आशय की भी हैं कि आईआरजीसी ने संसद के अध्यक्ष मोहम्मद ग़ालिबफ़ और विदेशमंत्री अराग़ची की पहले दौर की वार्ता के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए कड़ी आलोचना की थी.

चिंताजनक पहलू यह भी है कि सुप्रीम नेता मोज़्तबा खामनेई, जो युद्ध के शुरुआती दौर में घायल हो गए थे, राष्ट्रीय सुरक्षा पर अंतिम निर्णय करने में अपने पिता जैसी भूमिका निभाने में असमर्थ लग रहे हैं.अमेरिकी थिंक टैंक विल्सन सेंटर की वैश्विक सलाहकार परिषद के पश्चिम एशिया विशेषज्ञ मोहम्मद अमेरी के अनुसार, ‘ईरान की शीर्ष स्तरीय निर्णय-प्रक्रिया में झिझक और टालमटोल दिखाई पड़ रहा है. इस विषय पर अंदरूनी बहसें निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पा रही हैं.’

ईरान सरकार ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘ईरान में कथित विभाजन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति की लगातार हस्तक्षेपकारी टिप्पणियों के मद्देनजर, सरकार के विभिन्न विभागों के प्रमुखों ने इन निराधार दावों का खंडन किया है. ईरान एकजुट है, और 'कट्टरपंथी' और 'उदारवादी' जैसे लेबल लगाने के प्रयास जमीनी हकीकत को नहीं दर्शाते हैं.

सरकार ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, संसद अध्यक्ष एमबी ग़ालिबफ़ और न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई की एक तस्वीर भी साझा की गई है. ये ईरान के सबसे प्रतिष्ठित नेता हैं, जिनमें मोज़्तबा खामनेई सर्वोच्च नेता हैं.

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उभरते अंतर्विरोध

इस स्पष्टीकरण के बावज़ूद मीडिया ‘कलह’ की बातों पर लगातार ज़ोर दे रहा है. ब्रिटिश साप्ताहिक इकोनॉमिस्ट ने भी ईरानी नेतृत्व के भीतर उभरते अंतर्विरोधों की जानकारी दी है.पत्रिका की वैबसाइट के एक लेख में कहा गया है कि 17अप्रैल को ट्रंप ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य यातायात के लिए खोल दिया गया है और विदेशमंत्री अराग़ची ने इसकी पुष्टि की. उसी दिन आईआरजीसी से जुड़े मीडिया संस्थानों ने अराग़ची की इस बात के लिए आलोचना की कि उन्होंने रास्ता खोलने की शर्तों का उल्लेख नहीं किया.

अगले दिन एक सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि जलडमरूमध्य फिर से बंद कर दिया गया है. ट्रंप ने मार्ग को अवरुद्ध करने के इस कदम का मज़ाक उड़ाते हुए दुनिया को याद दिलाया कि अमेरिका की नाकाबंदी ने पहले ही यह सुनिश्चित कर दिया है कि यह ईरानी जहाजों के लिए बंद रहेगा.

कौन है अधिकृत?

ट्रंप का बार-बार रुख बदलना भी कम आश्चर्यजनक नहीं है. फिर भी, ईरान से आ रहे विरोधाभासी संदेश इस बात का संकेत दे रहे हैं कि ईरान में पूर्ण सर्वोच्च नेता अनुपस्थित है. ऐसे में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के सामने, यह सवाल है कि वे किससे बात करें?

इस्लामाबाद में 11और 12अप्रैल को हुई वार्ता के पहले दौर में ही ईरानी अंतर्विरोधों की झलक मिल गई थी. ईरानी प्रतिनिधिमंडल में करीब 80लोग इस्लामाबाद गए थे. उनमें से कुछ के बीच तीखी बहस होने के कारण मेजबानों ने वार्ता रोक दी. 

माना जाता है कि हाल में पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर विभिन्न गुटों के बीच आमराय बनाने के उद्देश्य से तेहरान गए थे. शासन का कहना है कि है कि युद्ध से लगभग 270अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई होनी चाहिए.

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उत्तर कोरिया मॉडल

देश में एक तबका प्रतिबंधों में राहत के बदले कुछ शर्तें मान लेने का समर्थक है, वहीं कट्टरपंथी समूह उत्तर कोरिया के मॉडल का अनुसरण करते हुए प्रतिरोध के लिए बम विकसित करने का पक्षधर है.औपचारिक रूप से, देश की सत्ता सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पास है, जिसमें राष्ट्रपति, संसदीय अध्यक्ष और सुरक्षा सेवाओं के प्रमुख शामिल हैं. अध्यक्ष मोहम्मद-बग़ेर ग़ालिबफ़ को मुख्य वार्ताकार और अराग़ची को उनका सहयोगी नियुक्त किया गया है.

पूर्व रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बग़ेर ग़ालिबफ़ का महत्व उनकी औपचारिक संसदीय स्थिति से कहीं अधिक युद्ध के बाद से तेहरान में उभरे सुरक्षा तंत्र के सबसे प्रमुख राजनीतिक चेहरे के रूप में उनके उभरा है.

आईआरजीसी की शक्ति

दूसरी तरफ आईआरजीसी के पास अपार शक्ति है. इसका नेतृत्व ईरान के सर्वोच्च नेता करते हैं. ‘अलजज़ीरा’ की रिपोर्ट के अनुसार, इसकी शक्ति संरचना को अक्सर अपारदर्शी और जटिल बताया जाता है.‘अलजज़ीरा’ के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे ईरानी अधिकारी अन्य नेताओं और समूहों की तुलना में आईआरजीसी के साथ अधिक निकटता से जुड़े हुए हैं.

वार्ता के लिए अराग़ची की तत्परता ने भी विरोध को जन्म दिया है. खासतौर से आईआरजीसी की आपत्तियाँ हैं. ‘इकोनॉमिस्ट’ के अनुसार ईरान के भीतर फौजी आक्रामकता में वृद्धि हुई है. सरकार समर्थक भीड़, अराग़ची और ग़ालिबफ़ का नाम लेकर निंदा कर रही है.

दूसरी तरफ ईरान की असैनिक-संस्थाएँ अप्रासंगिक नहीं हुई हैं. राष्ट्रपति कार्यालय, विदेश मंत्रालय और ईरानी राज्य के अन्य अंग सक्रिय हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उनकी भूमिकाओं और प्रभाव को लेकर संशय है.

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रियायतें पाने की रणनीति

पर्यवेक्षकों का एक तबका मानता है कि आपसी विरोध भी एक तरह की रणनीति है, विरोध को बढ़ावा देकर रियायतें हासिल करने का एक तरीका. ईरान में वैचारिक दरारें, क्रांति जितनी पुरानी हैं. शुरुआत से ही, इसके नेताओं में इस बात पर मतभेद रहा है कि अमेरिका ये टकराया जाए या समझौता किया जाए.

वे मानते हैं कि नेताओं के स्वार्थों ने भी मामले को पेचीदा बनाया है. पिछले कुछ वर्षों में जनरलों के बीच भी ऐसा एक वर्ग उभरा है. वे अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी प्रतिबंधों के तोड़ खोजकर कमाई करते हैं. कहा जा रहा है कि इस नेटवर्क के पास विदेशी संपत्तियाँ हैं, और वे मीडिया की नज़र में आ गए हैं. खामनेई के सत्ता से हटने के बाद, ऐसे लोग फिर से उभर कर सामने आ गए हैं, जो पहले हाशिए पर थे.

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