अमेरिका ईरान युद्ध विराम: जानिए विनाशकारी जंग की पूरी टाइमलाइन और परदे के पीछे की कहानी

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 15-06-2026
US-Iran Ceasefire: Discover the full timeline of the devastating conflict and the story behind the scenes.
US-Iran Ceasefire: Discover the full timeline of the devastating conflict and the story behind the scenes.

 

मलिक असगर हाशमी

मध्य पूर्व से एक बहुत बड़ी राहत देने वाली खबर आ रही है। साल 2026 की शुरुआत में भड़का अमेरिका, इजरायल और ईरान का भीषण युद्ध अब खत्म होने जा रहा है। विदेशी मीडिया और वैश्विक कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार दोनों देश एक स्थाई समझौते पर राजी हो गए हैं। इस जंग ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया था। ईरान ने इस समझौते को अपनी बड़ी रणनीतिक जीत बताया है। वहीं अमेरिका ने कहा है कि उसने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को सुरक्षित कर लिया है।

यह युद्ध इतिहास में अपनी तरह का सबसे भयानक और हैरान करने वाला टकराव माना जाएगा। इसमें ऐसे कई मोड़ आए जिसने दुनिया को तबाही के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था। आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि इस युद्ध में कब क्या हुआ और परदे के पीछे कूटनीति कैसे चली।

बातचीत का टूटना और महाविनाश की शुरुआत

बात फरवरी 2026 की है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय वार्ता अचानक पूरी तरह ठप हो गई। इसके तुरंत बाद 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक साझा सैन्य अभियान शुरू किया। इस सीक्रेट मिशन को 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' और 'रोरिंग लायन' नाम दिया गया था।

इजरायल और अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के मिसाइल ठिकानों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। इसी दौरान तेहरान में हुए एक सटीक हमले में ईरान के सबसे ताकतवर नेता और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। उनके साथ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के पचास से अधिक शीर्ष नेता और सैन्य कमांडर भी मारे गए। इस घटना ने पूरे मध्य पूर्व में आग लगा दी।

ईरान का पलटवार और अमेरिकी ठिकानों पर तबाही

अपने सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरान चुप नहीं बैठा। उसने अपने सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइलों की बौछार कर दी। ईरान के इस जवाबी हमले में सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस को बहुत भारी नुकसान पहुंचा।

ईरान समर्थक हिजबुल्लाह ने 2 मार्च को लेबनान की सीमा से इजरायल पर हजारों रॉकेट दागे। इसके जवाब में इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर सीधा हमला बोल दिया और वहां भीषण जमीनी जंग शुरू हो गई। इस युद्ध की सबसे दर्दनाक घटना तब घटी जब एक मिसाइल हमले की चपेट में आने से एक स्कूल के डेढ़ सौ से ज्यादा बेकसूर बच्चों की मौत हो गई। इस त्रासदी ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था।

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समंदर में जंग और नया नेतृत्व

जमीन और आसमान के साथ-साथ यह लड़ाई समंदर तक फैल गई। 4 मार्च 2026 को हिंद महासागर में गश्त कर रही एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के एक बड़े युद्धपोत पर हमला कर उसे डुबो दिया। इस घटना में ईरान के दर्जनों नौसैनिक मारे गए।

इस बीच ईरान के भीतर सत्ता को संभालने की कवायद तेज हुई। 8 मार्च को मारे गए सुप्रीम लीडर के बेटे मोजताबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया। मोजताबा खामेनेई ने पद संभालते ही युद्ध को और आक्रामक तरीके से लड़ने का एलान किया। इसी कड़ी में 3 अप्रैल को ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने पश्चिमी ईरान के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी एफ-15 फाइटर जेट को मार गिराया।

हॉर्मुज की नाकेबंदी और वैश्विक तेल संकट

ईरान ने दुनिया को आर्थिक चोट पहुंचाने के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया। यह दुनिया का वो सबसे खास समुद्री रास्ता है जहां से खाड़ी देशों का सारा कच्चा तेल और नेचुरल गैस बाकी देशों में जाती है। इसके बंद होते ही दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने लगे।

इस कदम से भड़के अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 को ईरान के खिलाफ एक कड़ा कदम उठाया। अमेरिकी नौसेना ने ईरान के सभी बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी। इस समुद्री नाकेबंदी की वजह से ईरान का बचा हुआ व्यापार भी ठप हो गया और उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई।

पाकिस्तान और कतर की कूटनीति लाई रंग

जब यह साफ हो गया कि सैन्य बल से कोई भी देश पूरी तरह नहीं जीत पा रहा है तब बैकचैनल कूटनीति शुरू हुई। इस पूरे विवाद को सुलझाने में पाकिस्तान और कतर ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और कतर के दूतों ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच लगातार चौदह घंटे से ज्यादा की मैराथन बैठकें कीं।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने दोनों पक्षों को इस बात पर राजी किया कि युद्ध को खींचने से सिर्फ नुकसान होगा। आखिरकार 14 जून 2026 को अमेरिका और ईरान ने एक साझा बयान जारी कर सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयां तुरंत रोकने का फैसला किया। अमेरिका अपने नौसैनिक प्रतिबंध हटाएगा और बदले में ईरान हॉर्मुज के रास्ते को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए हमेशा के लिए खोल देगा।

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आगे क्या होगा और स्विट्जरलैंड की बैठक

भले ही युद्धविराम की घोषणा हो चुकी है लेकिन जमीन पर तनाव अब भी बना हुआ है। समझौते वाले दिन भी इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के उपनगरों में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बमबारी जारी रखी। इजरायल इस समझौते से खुश नहीं है और उसका मानना है कि इससे ईरान को दोबारा संभलने का मौका मिल जाएगा।

विदेशी कूटनीतिज्ञों के मुताबिक आगामी 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधि इस शांति समझौते पर आधिकारिक दस्तखत करेंगे। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करने जैसे जटिल मुद्दों पर अगले साठ दिनों तक तकनीकी बातचीत जारी रहेगी। दुनिया उम्मीद कर रही है कि इस समझौते से मध्य पूर्व में लंबे समय से चला आ रहा खूनी खेल हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।