नई दिल्ली।
जब किसी व्यक्ति को मधुमेह का पता चलता है या वह अपनी खानपान की आदतों को बेहतर बनाने की कोशिश करता है, तो सबसे पहली सलाह अक्सर चीनी का सेवन कम करने की होती है। इसके बाद कई लोग चीनी की जगह कृत्रिम मिठास या गुड़ का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। हालांकि, केवल चीनी की जगह गुड़ इस्तेमाल करने से आहार अपने आप ज्यादा स्वस्थ नहीं हो जाता।
खासकर मधुमेह से जूझ रहे लोगों और वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि गुड़ और चीनी में वास्तविक अंतर कितना है। गुड़ को आमतौर पर प्राकृतिक मिठास माना जाता है, लेकिन इसके स्वास्थ्य लाभ को लेकर कई गलतफहमियां भी हैं।
क्या गुड़ में चीनी से कम कैलोरी होती है?
गुड़ को अक्सर चीनी का बेहतर और प्राकृतिक विकल्प बताया जाता है। लेकिन कैलोरी के मामले में दोनों के बीच बहुत बड़ा अंतर नहीं है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, एक चम्मच चीनी और लगभग इतनी ही मात्रा में गुड़ से करीब 60 कैलोरी मिल सकती हैं।
इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति वजन कम करने के उद्देश्य से चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करता है, लेकिन उसकी कुल मात्रा कम नहीं करता, तो कैलोरी का सेवन बहुत ज्यादा कम नहीं होगा।
इसलिए केवल चीनी छोड़कर गुड़ खाना शुरू कर देना वजन घटाने का कोई आसान उपाय नहीं है। वजन नियंत्रित करने के लिए कुल कैलोरी, भोजन की मात्रा और पूरे आहार की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है।
ब्लड शुगर पर कितना असर?
गुड़ को लेकर एक आम धारणा है कि यह चीनी की तुलना में रक्त शर्करा के लिए बेहतर होता है। लेकिन उपलब्ध पोषण संबंधी जानकारी इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं ठहराती।
चीनी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स करीब 60 बताया जाता है, जबकि गुड़ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स करीब 70 हो सकता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स किसी खाद्य पदार्थ के सेवन के बाद रक्त में ग्लूकोज के स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने का एक पैमाना है।
इस लिहाज से गुड़ को चीनी का ऐसा विकल्प नहीं माना जा सकता, जिसका इस्तेमाल मधुमेह वाले व्यक्ति बिना किसी चिंता के कर सकें। गुड़ भी शरीर में शर्करा की मात्रा बढ़ा सकता है।
इसलिए मधुमेह के मरीजों के लिए गुड़, चीनी या किसी अन्य मीठे पदार्थ का सेवन करने से पहले डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
क्या गुड़ में ज्यादा पोषक तत्व होते हैं?
चीनी की तुलना में गुड़ को अधिक प्राकृतिक माना जाता है। इसका कारण यह है कि गुड़ के निर्माण की प्रक्रिया में कुछ खनिज पदार्थ और अन्य घटक थोड़ी मात्रा में बने रह सकते हैं। इसी वजह से इसे कभी कभी परिष्कृत चीनी से ज्यादा पौष्टिक बताया जाता है।
हालांकि, यहां मात्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। उदाहरण के लिए, एक बड़े चम्मच गुड़ में लगभग 1 मिलीग्राम आयरन हो सकता है। यह मात्रा इतनी कम है कि केवल गुड़ को आयरन का प्रमुख स्रोत मानना उचित नहीं होगा।
अगर शरीर में आयरन की कमी है, तो केवल गुड़ खाने पर निर्भर रहने के बजाय आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह पर ध्यान देना चाहिए।
तो क्या चीनी की जगह गुड़ खाना चाहिए?
अगर सवाल केवल यह है कि चीनी और गुड़ में से कौन ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक है, तो इसका जवाब व्यक्ति की जरूरत और सेवन की मात्रा पर निर्भर करता है। गुड़ में कुछ खनिज पदार्थ जरूर होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे बड़ी मात्रा में खाना स्वस्थ विकल्प बन जाता है।
खासकर वजन घटाने और मधुमेह को नियंत्रित करने के मामले में गुड़ को चीनी का सुरक्षित विकल्प मानना सही नहीं होगा। दोनों ही मीठे पदार्थ हैं और दोनों का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
इसलिए स्वस्थ आहार का सबसे बेहतर तरीका केवल चीनी को गुड़ से बदलना नहीं, बल्कि कुल मिलाकर मीठे खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों का सेवन सीमित करना है।
अगर आप मधुमेह से पीड़ित हैं, वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं या अपनी डाइट में बड़ा बदलाव करना चाहते हैं, तो किसी योग्य डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा उपयोगी रहेगा।