नई दिल्ली।
क्या आपको छोटी-छोटी बातों पर जल्दी गुस्सा आ जाता है? क्या एक बार गुस्सा आने के बाद खुद को शांत करना मुश्किल हो जाता है? अगर ऐसा है तो आप अकेले नहीं हैं। गुस्सा इंसानी भावनाओं का स्वाभाविक हिस्सा है। किसी बात पर नाराज या परेशान होना सामान्य है। समस्या तब पैदा होती है जब गुस्सा हमारे व्यवहार पर हावी हो जाए।
लगातार और अनियंत्रित गुस्सा रिश्तों में तनाव पैदा कर सकता है और व्यक्ति के मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। इसलिए गुस्से को दबाने के बजाय उसे सही तरीके से संभालना सीखना जरूरी है।
अगर आप अपने गुस्से पर बेहतर नियंत्रण चाहते हैं तो इन 10 उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।
गुस्से की स्थिति में हम कई बार बिना सोचे ऐसी बातें कह देते हैं, जिनका बाद में पछतावा होता है। इसलिए जब आपको महसूस हो कि गुस्सा बढ़ रहा है तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ पल रुकें।
अपने विचारों को व्यवस्थित करें और फिर बोलें। इससे आप ऐसी बात कहने से बच सकते हैं जो सामने वाले को चोट पहुंचा सकती है। दूसरे व्यक्ति को भी शांत होने का समय दें।
जब आपका गुस्सा थोड़ा कम हो जाए और आप स्पष्ट रूप से सोच सकें, तब अपनी परेशानी सामने रखें। अपनी भावनाओं और जरूरतों को साफ शब्दों में बताएं, लेकिन दूसरे व्यक्ति को अपमानित करने या नियंत्रित करने की कोशिश न करें।
दृढ़ता से अपनी बात रखना अच्छी बात है, लेकिन आक्रामक होना समस्या को और बढ़ा सकता है।
गुस्सा और तनाव बढ़ने पर शरीर में बेचैनी महसूस हो सकती है। ऐसे समय में शारीरिक गतिविधि मददगार साबित हो सकती है।
कुछ देर तेज चलें, दौड़ें, साइकिल चलाएं या अपनी पसंद की कोई अन्य शारीरिक गतिविधि करें। इससे तनाव कम करने और मन को शांत करने में मदद मिल सकती है।
तनावपूर्ण परिस्थितियों से लगातार जूझते रहने के बजाय बीच-बीच में खुद को छोटा सा ब्रेक दें। कुछ मिनट शांत बैठना, गहरी सांस लेना या अकेले समय बिताना आपको मानसिक रूप से बेहतर महसूस करा सकता है।
यह सोचने का मौका भी देता है कि किसी परिस्थिति पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय उससे बेहतर तरीके से कैसे निपटा जाए।
जिस बात ने आपको गुस्सा दिलाया है, केवल उसी के बारे में सोचते रहने से समस्या हल नहीं होगी। इसके बजाय समाधान तलाशने की कोशिश करें।
अगर घर का बिखरा हुआ कमरा परेशान करता है तो परिवार के साथ मिलकर सफाई की व्यवस्था तय करें। अगर साथी के देर से घर आने के कारण परेशानी होती है तो दोनों मिलकर ऐसा समय तय कर सकते हैं जो सभी के लिए सुविधाजनक हो।
यह समझना भी जरूरी है कि हर चीज आपके नियंत्रण में नहीं होती। इसलिए उन परिस्थितियों को स्वीकार करना सीखें जिन्हें आप बदल नहीं सकते। खुद को याद दिलाएं कि गुस्सा समस्या का समाधान नहीं करता, बल्कि कई बार उसे और जटिल बना देता है।
किसी पर सीधे आरोप लगाने से सामने वाला रक्षात्मक हो सकता है और विवाद बढ़ सकता है। इसलिए अपनी बात रखते समय ‘तुम’ या ‘आप’ से आरोप लगाने के बजाय ‘मैं’ वाले वाक्यों का इस्तेमाल करें।
मसलन, “तुम कभी घर का काम नहीं करते” कहने के बजाय यह कहना बेहतर है, “मुझे इस बात से परेशानी हुई कि बर्तन धोने में मेरी मदद नहीं हुई।”
इस तरह आप अपनी भावना स्पष्ट कर सकते हैं और अनावश्यक टकराव से भी बच सकते हैं।
पुरानी नाराजगी और कड़वाहट को लंबे समय तक मन में रखने से तनाव बढ़ सकता है। इसलिए जहां संभव हो, माफ करना और आगे बढ़ना सीखें।
इसका मतलब यह नहीं कि गलत व्यवहार को स्वीकार कर लिया जाए। बल्कि इसका अर्थ है कि किसी घटना को लगातार मन में दोहराकर खुद को परेशान न किया जाए। कई मामलों में माफी रिश्ते को बेहतर बनाने और मन को हल्का करने में मदद कर सकती है।
कई तनावपूर्ण परिस्थितियों में हल्का-फुल्का हास्य माहौल को बेहतर बना सकता है। इससे तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, ध्यान रखें कि हास्य और व्यंग्य में अंतर होता है। किसी व्यक्ति की भावनाओं का मजाक उड़ाने या कटाक्ष करने से स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए ऐसा हास्य इस्तेमाल करें जिससे किसी को ठेस न पहुंचे।
जब गुस्सा या तनाव बढ़ने लगे तो खुद को शांत करने वाली तकनीकों का अभ्यास करें। गहरी और धीमी सांस लें। किसी शांत जगह या सुखद दृश्य की कल्पना करें। मन में कोई सकारात्मक वाक्य दोहराएं, जैसे “मुझे शांत रहना है।”
इसके अलावा संगीत सुनना, डायरी लिखना, ध्यान करना या योग जैसी गतिविधियां भी कई लोगों को तनाव कम करने में मदद करती हैं। आप वही तरीका चुनें जिससे आपको सबसे ज्यादा सुकून मिलता हो।
गुस्से पर नियंत्रण सीखना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता। अगर आपको बार-बार इतना गुस्सा आता है कि आप अपने व्यवहार पर नियंत्रण खो देते हैं, ऐसी बातें या काम कर बैठते हैं जिनका बाद में पछतावा होता है, या आपके गुस्से से परिवार और आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है, तो पेशेवर मदद लेने में संकोच न करें।
मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपको गुस्से के कारणों को समझने और उसे नियंत्रित करने के व्यावहारिक तरीके सीखने में मदद कर सकते हैं।
याद रखें, गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन गुस्से में क्या करना है, यह आपके नियंत्रण में हो सकता है। थोड़ी देर रुकना, गहरी सांस लेना, अपनी बात शांत तरीके से रखना और समाधान पर ध्यान देना गुस्से को संभालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।