नई दिल्ली
हमारी सेहत पर सबसे ज्यादा असर डालने वाली चीजों में हमारा खानपान भी शामिल है। हम रोज क्या खाते हैं, इससे हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम प्रभावित हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने में भी संतुलित आहार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
स्वस्थ आहार का मतलब केवल कम खाना या कुछ खाद्य पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाना नहीं है। इसके लिए ऐसे खाद्य पदार्थों को रोजमर्रा की डाइट में शामिल करना जरूरी है, जिनमें विटामिन, मिनरल, प्रोटीन, स्वस्थ वसा और फाइबर जैसे पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद हों।
पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों में आमतौर पर चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा कम होती है। फाइबर, विटामिन, मिनरल और फाइटोन्यूट्रिएंट्स से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर को अतिरिक्त पोषण देते हैं। इन्हें संतुलित मात्रा में नियमित रूप से खाने से लंबे समय में कई बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
ऐसे ही चार खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें रोजाना की डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।
1. मेवे
मेवे प्रोटीन और स्वस्थ वसा के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। इन्हें बीज, मांस और अंडे जैसे प्रोटीन देने वाले खाद्य पदार्थों की श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि, मेवों की खासियत केवल प्रोटीन और वसा तक सीमित नहीं है। इनमें विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।
बादाम इसका अच्छा उदाहरण है। इसे नाश्ते से लेकर सलाद, स्नैक्स और मिठाइयों तक कई तरह से खाया जा सकता है। बादाम में मैग्नीशियम, कैल्शियम और फोलेट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। लगभग 28 ग्राम बादाम विटामिन ई की दैनिक जरूरत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा कर सकता है।
बादाम में मौजूद अधिकांश वसा मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड के रूप में होती है। संतृप्त वसा की जगह इस तरह की स्वस्थ वसा का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है।
हालांकि, मेवों में कैलोरी भी काफी होती है। इसलिए इन्हें खाते समय मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। मुट्ठी भर मेवे पर्याप्त हो सकते हैं। साथ ही ऐसे मेवे चुनना बेहतर है जिनमें अतिरिक्त नमक या चीनी न मिलाई गई हो।
2. सेब
फल स्वस्थ आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन बहुत से लोगों की डाइट में फलों की मात्रा पर्याप्त नहीं होती। रोजाना एक सेब खाना फल को अपनी डाइट में शामिल करने का आसान तरीका हो सकता है।
सेब की कई किस्में बाजार में उपलब्ध हैं और यह फल फाइबर का अच्छा स्रोत है। इसके छिलके में अघुलनशील फाइबर पाया जाता है, जबकि अंदरूनी हिस्से में घुलनशील फाइबर मौजूद होता है। दोनों तरह के फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी होते हैं।
फाइबर भोजन को पाचन तंत्र से आसानी से आगे बढ़ाने में मदद करता है। घुलनशील फाइबर आंतों में जेल जैसा पदार्थ बनाता है और इसे हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।
सेब में फाइटोन्यूट्रिएंट्स भी पाए जाते हैं। इनमें विटामिन सी और फ्लेवोनोइड्स जैसे यौगिक शामिल हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट गतिविधियों से जुड़े होते हैं और शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं।
सेब को छिलके समेत खाना अधिक फाइबर प्राप्त करने का एक आसान तरीका है। हालांकि, खाने से पहले इसे अच्छी तरह धोना जरूरी है।
3. फलियां, दालें और मटर
फलियां किसी भी संतुलित भोजन का हिस्सा बन सकती हैं। इनमें राजमा, छोले, विभिन्न प्रकार की दालें और मटर शामिल हैं। इन्हें सब्जी के तौर पर भी खाया जा सकता है और प्रोटीन के स्रोत के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
अलग-अलग फलियों का पोषण अलग हो सकता है, लेकिन सामान्य तौर पर ये कम वसा वाले प्रोटीन और फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। इनमें थायमिन, मैग्नीशियम, आयरन, जिंक, फोलेट, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।
इसके बावजूद कई लोगों के रोजाना के भोजन में दालों और फलियों की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। इसे बढ़ाने का एक आसान तरीका यह है कि भोजन में अधिक वसा वाले प्रोटीन स्रोतों की जगह कभी-कभी दाल, राजमा, छोले या अन्य फलियों को शामिल किया जाए।
दाल को चावल या रोटी के साथ, राजमा और छोले को सब्जी या सलाद के रूप में और मटर को विभिन्न व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है।
4. ब्रोकली
ब्रोकली पत्तागोभी परिवार की क्रूसिफेरस सब्जी है। इसमें कई तरह के फाइटोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। इनमें ग्लूकोसिनोलेट्स और ल्यूटिन जैसे यौगिक शामिल हैं।
ग्लूकोसिनोलेट्स सल्फर युक्त पौधों के यौगिक हैं। वहीं, ल्यूटिन आंखों के स्वास्थ्य से जुड़ा पोषक तत्व है। ब्रोकली में विटामिन ए से संबंधित पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो सामान्य दृष्टि बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ब्रोकली को दाल, अनाज या अंडे जैसे खाद्य पदार्थों के साथ खाना भी उपयोगी हो सकता है। इसमें मौजूद विटामिन सी पौधों से मिलने वाले आयरन के अवशोषण में शरीर की मदद करता है।
ब्रोकली कैल्शियम का भी एक स्रोत है। इसे सलाद में कच्चा या हल्का पकाकर खाया जा सकता है। इसके अलावा इसे भूनकर, सूप में डालकर या अन्य सब्जियों के साथ पकाकर भी खाया जा सकता है।
डाइट में संतुलन सबसे जरूरी
मेवे, सेब, फलियां और ब्रोकली पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ हैं और इन्हें संतुलित मात्रा में रोजाना के भोजन में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी डाइट का आधार बनाने के बजाय अलग-अलग खाद्य समूहों को शामिल करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
संपूर्ण अनाज, फल, सब्जियां, दालें, मेवे और पर्याप्त प्रोटीन को संतुलित तरीके से डाइट में शामिल करने से शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। साथ ही व्यक्तिगत जरूरत, उम्र, गतिविधि के स्तर और कुल कैलोरी सेवन को ध्यान में रखना भी जरूरी है।