नई दिल्ली
आज की जीवनशैली में लंबे समय तक बैठकर काम करना आम हो गया है। ऑफिस की कुर्सी, कार की सीट या मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने कई घंटे गुजर जाते हैं। लेकिन लगातार बैठे रहना शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। विशेषज्ञों और विभिन्न अध्ययनों में लंबे समय तक बैठने को मोटापा, मेटाबोलिक सिंड्रोम और हृदय संबंधी समस्याओं जैसे स्वास्थ्य जोखिमों से जोड़ा गया है।
बैठे रहने के दौरान शरीर खड़े रहने या चलने की तुलना में कम ऊर्जा खर्च करता है। यही वजह है कि घंटों बैठे रहने वाली दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि कम होने पर वजन बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है। अत्यधिक बैठना मेटाबोलिक सिंड्रोम से भी जुड़ा पाया गया है। इसमें हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर बढ़ना, कमर के आसपास अतिरिक्त चर्बी और कोलेस्ट्रॉल का असंतुलित स्तर जैसी समस्याएं शामिल हैं।
कुछ बड़े अध्ययनों में बैठने के समय और शारीरिक गतिविधि के बीच संबंध को देखा गया है। शोधकर्ताओं ने 13 अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इनमें 10 लाख से अधिक लोग शामिल थे। विश्लेषण में पाया गया कि जो लोग दिन में आठ घंटे से अधिक समय बैठे रहते हैं और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करते, उनमें समय से पहले मृत्यु का जोखिम अधिक हो सकता है।
हालांकि, नियमित शारीरिक गतिविधि इस जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। अध्ययन में यह भी संकेत मिला कि रोजाना करीब 60 से 75 मिनट की मध्यम स्तर की एरोबिक गतिविधि लंबे समय तक बैठने से जुड़े कुछ जोखिमों को कम कर सकती है। सक्रिय लोगों में लंबे समय तक बैठने का प्रभाव अपेक्षाकृत कम देखा गया।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को रोज कई घंटे कठिन व्यायाम करना जरूरी है। दिनचर्या में छोटे बदलाव भी उपयोगी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, लगातार बैठने के बजाय बीच बीच में उठकर कुछ मिनट चलना शुरू किया जा सकता है।
डेस्क पर काम करने वाले लोग हर 30 मिनट में थोड़ी देर के लिए खड़े हो सकते हैं। पानी लेने, फोन पर बात करने या किसी दूसरे कमरे तक जाने के लिए चलना भी लंबे समय तक बैठे रहने को तोड़ने का एक आसान तरीका है।
ऑफिस में संभव हो तो कुछ मीटिंग बैठने के बजाय चलते हुए की जा सकती हैं। स्टैंडिंग डेस्क भी एक विकल्प है। हालांकि, केवल खड़े रहने से लंबे समय तक बैठने के सभी स्वास्थ्य जोखिम कितने कम होते हैं, इसे लेकर अभी स्पष्ट निष्कर्ष नहीं है।
कुछ लोग कंप्यूटर पर काम करते समय ट्रेडमिल डेस्क का भी इस्तेमाल करते हैं। इसमें स्क्रीन और कीबोर्ड को इस तरह रखा जाता है कि व्यक्ति धीमी गति से चलते हुए काम कर सके। लेकिन ऐसे उपकरण हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं हैं। रोजमर्रा की गतिविधियों में चलना और नियमित व्यायाम शामिल करना अधिक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
शारीरिक गतिविधि का लाभ केवल वजन नियंत्रण तक सीमित नहीं है। इससे कैलोरी खर्च होती है। मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद मिलती है। ऊर्जा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उम्र बढ़ने के साथ नियमित गतिविधि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
इसलिए सवाल केवल यह नहीं है कि रोज कितनी देर व्यायाम किया जाता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि बाकी समय शरीर कितना सक्रिय रहता है। लंबे समय तक बैठने के बीच छोटे ब्रेक लेना एक आसान शुरुआत हो सकती है।
लंबे समय तक बैठने से क्या नुकसान हो सकता है?
अत्यधिक बैठना मोटापा, मेटाबोलिक सिंड्रोम और हृदय संबंधी स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा पाया गया है।
कितनी देर बैठना ज्यादा माना जाता है?
कुछ शोधों में दिन में आठ घंटे से अधिक बैठने और कम शारीरिक गतिविधि को अधिक स्वास्थ्य जोखिम से जोड़ा गया है।
क्या व्यायाम लंबे समय तक बैठने के नुकसान को कम कर सकता है?
नियमित मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि लंबे समय तक बैठने से जुड़े कुछ जोखिमों को कम करने में मदद कर सकती है।
बैठने के दौरान क्या किया जा सकता है?
हर 30 मिनट में उठना, कुछ मिनट चलना और काम के दौरान गतिविधि बढ़ाना उपयोगी कदम हो सकते हैं।
क्या केवल खड़े रहने से फायदा होगा?
खड़े रहना बैठने का एक विकल्प हो सकता है, लेकिन केवल खड़े रहने से लंबे समय तक बैठने के जोखिम कितने कम होते हैं, इस पर अभी पर्याप्त स्पष्टता नहीं है।