आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली
देशभर में शनिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। मंदिरों में विशेष पूजा हुई। भक्तों ने भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया। कई शहरों में झांकियां निकाली गईं। सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। बच्चों ने कृष्ण के बाल रूप को मंच पर प्रस्तुत किया। कई स्थानों पर आधी रात को जन्मोत्सव मनाया गया।
दिल्ली से लेकर वाराणसी, मथुरा, केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड तक जन्माष्टमी का रंग दिखाई दिया। देश के अलग अलग हिस्सों में स्थानीय परंपराओं के साथ भगवान कृष्ण की पूजा की गई।
नेपाल और बांग्लादेश में भी हिंदू समुदाय ने जन्माष्टमी मनाई। काठमांडू में कृष्ण मंदिर में भक्तों की लंबी कतार लगी। ढाका के ऐतिहासिक ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर में विशेष पूजा और पारंपरिक जुलूस निकाला गया।
Devotion in the heart, Dharma in every action.
— MyGovIndia (@mygovindia) September 4, 2026
On Shri Krishna Janmashtami, celebrating the eternal teachings of Lord Krishna that inspire the world to choose truth, fulfil duty with sincerity, and face every challenge with courage and faith. pic.twitter.com/VKXCmsXCay
दिल्ली में इस्कॉन मंदिर पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष
दिल्ली में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित इस्कॉन मंदिर में पहुंचकर भगवान कृष्ण की पूजा की। उन्होंने दिल्ली और पूरे देश में शांति, समृद्धि, सद्भाव और लोगों के कल्याण की कामना की।इस मौके पर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जन्माष्टमी केवल धार्मिक आस्था का त्योहार नहीं है। यह भगवान कृष्ण के शाश्वत संदेश को याद करने का अवसर भी है।
उन्होंने भगवद्गीता का उल्लेख किया। उनके मुताबिक गीता इंसान को ईमानदारी, साहस और समर्पण के साथ अपना कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने सत्य और धर्म के रास्ते पर चलने की बात कही।
वाराणसी में झांकियों ने खींचा ध्यान
वाराणसी में जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण की झांकी प्रस्तुत की गई। इसके साथ कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन कार्यक्रमों में पहुंचे।
बनारस लोकोमोटिव वर्क्स के महाप्रबंधक आशुतोष पंत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भगवान कृष्ण की पूजा की और जन्मोत्सव में हिस्सा लिया।
कलाकारों और बच्चों ने भगवान कृष्ण के जीवन, उनके आदर्शों और शिक्षाओं पर आधारित प्रस्तुतियां दीं। कृष्ण के बचपन और उनके जीवन से जुड़ी विभिन्न घटनाओं को झांकियों के माध्यम से दिखाया गया।
वाराणसी में एक दूसरी झांकी ने धार्मिक विरासत के साथ आधुनिक विकास को भी जोड़ने की कोशिश की। इसमें प्रस्तावित शहर रोपवे और वंदे भारत एक्सप्रेस के मॉडल के साथ प्रमुख मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों को दिखाया गया।
काशी विश्वनाथ धाम में आधी रात को जन्मोत्सव
काशी विश्वनाथ धाम में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा के साथ मनाई गई। मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया। आधी रात को भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव हुआ।मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रों का उच्चारण हुआ। शंख बजाए गए। श्रद्धालुओं ने जय श्रीकृष्ण और हर हर महादेव के जयकारे लगाए।
मंदिर के विद्वानों ने धार्मिक विधि के अनुसार पूजा और अभिषेक किया। लड्डू गोपाल का दक्षिणावर्ती शंख और पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद षोडशोपचार पूजन हुआ। भगवान को नए वस्त्र और आभूषण पहनाए गए। विशेष आरती और भोग भी लगाया गया।
काशी विश्वनाथ धाम में भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा को श्रद्धालुओं ने विशेष अनुभव के रूप में देखा। यहां जन्माष्टमी धार्मिक आस्था के साथ काशी की सांस्कृतिक परंपरा का भी हिस्सा बनी।
Mathura - Krishna’s birthplace is celebrating Janmashtami with fervour as temples and homes across Braj mark Lord Krishna’s birth anniversary.Devotees from India and abroad have arrived in large numbers to join the festivities. From the mangala period onwards, chants of… pic.twitter.com/gFLYYk3mEO
— NextMinute News (@nextminutenews7) September 4, 2026
मथुरा में भक्तों की भीड़
भगवान कृष्ण की जन्मभूमि मानी जाने वाली मथुरा में भी जन्माष्टमी पर विशेष आयोजन हुए। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिरों में सजावट की गई। भजन और पारंपरिक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए।
जन्माष्टमी को भगवान कृष्ण के जन्म का पर्व माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन व्रत, पूजा, भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मध्यरात्रि जन्मोत्सव जैसी परंपराएं देखने को मिलती हैं।
केरल के गुरुवायूर मंदिर में विशेष आयोजन
केरल के त्रिशूर जिले में स्थित गुरुवायूर मंदिर को जन्माष्टमी के लिए विशेष रूप से सजाया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचे।मंदिर में पारंपरिक नृत्य कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इन प्रस्तुतियों में केरल की सांस्कृतिक परंपराओं की झलक दिखाई दी।
श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस तरह जन्माष्टमी यहां धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय संस्कृति से भी जुड़ी नजर आई।
असम में सरबानंद सोनोवाल ने की पूजा
असम के डिब्रूगढ़ में केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने इस्कॉन मंदिर पहुंचकर भगवान कृष्ण की पूजा की।उन्होंने कहा कि वह भगवान कृष्ण के भक्त हैं। सोनोवाल ने अपने बचपन और परिवार से मिली धार्मिक शिक्षा का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि उन्हें भगवान कृष्ण के चरणों में समर्पण और मानव समाज के लिए काम करने की प्रेरणा मिली।उन्होंने यह भी कहा कि कठिन परिस्थितियों में भगवान कृष्ण भक्तों को चुनौतियों का सामना करने के लिए शक्ति, साहस, शांति और सहनशीलता प्रदान करते हैं।
#WATCH | Rajasthan’s Kota is witnessing grand celebrations of Janmashtami, with special tableaux depicting Lord Krishna’s life drawing crowds in DCM, Talwandi and Nayapura.
— PB-SHABD (@PBSHABD) September 4, 2026
In DCM, 22 motorised tableaux showcasing different Krishna leelas have been prepared. The tradition dates… pic.twitter.com/Cgr9J8HywV
राजस्थान में 21 तोपों की सलामी
राजस्थान के नाथद्वारा में जन्माष्टमी का आयोजन अलग अंदाज में हुआ। ऐतिहासिक श्रीनाथजी मंदिर में भगवान कृष्ण के जन्म के अवसर पर 21 तोपों की सलामी दी गई।मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बिलवा स्थित श्री राधा सरल बिहारी मंदिर पहुंचकर पूजा की। जन्माष्टमी के अवसर पर राज्य के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए।
हरियाणा में आधुनिकता और संस्कार पर जोर
हरियाणा के लाडवा, कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जन्माष्टमी समारोह में शामिल हुए।उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी तक भगवान कृष्ण का संदेश पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहने की अपील की।
सैनी ने कहा कि जीवन में प्रतिभा के साथ विनम्रता और सफलता के साथ सेवा की भावना भी होनी चाहिए। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति की ताकत बताया।
मध्य प्रदेश में मोहन यादव ने किया आयोजन में हिस्सा
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस्कॉन मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह में हिस्सा लिया।उन्होंने भगवान कृष्ण से जुड़ी धार्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं का उल्लेख किया। उन्होंने धार के पास हमका झमका मंदिर से जुड़ी मान्यताओं का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि इस्कॉन इंटरनेशनल ने इस गौरवशाली अतीत को फिर से सामने लाने का संकल्प लिया है। इस संदर्भ में एक भव्य देवी मंदिर बनाए जाने की बात भी कही गई।
उत्तराखंड में कलाकारों का सम्मान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रिजर्व पुलिस लाइंस में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।उन्होंने भगवान कृष्ण के धर्म और सत्य के मार्ग का संदेश याद किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता लोगों को धर्म के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है।
कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। मुख्यमंत्री ने कलाकारों को सम्मानित किया और उनके प्रदर्शन की सराहना की।उन्होंने कहा कि भारत की धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक परंपराएं समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
Hundreds of Hindu devotees from the Hare Krishna Temple in Durban, South Africa celebrate Krishna Janamastami with faith and fervour #Krishna #KrishnaJanmashtami #KrishnaJanmashthami #Janmashtami pic.twitter.com/6M3Os1W7so
— Rajesh Jantilal (@RJantilal) September 4, 2026
बांग्लादेश में भी मनाई गई जन्माष्टमी
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हिंदू समुदाय ने ऐतिहासिक ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई। यहां पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक कार्यक्रम हुए।ढाका में जन्माष्टमी का पारंपरिक जुलूस भी निकाला गया। समुदाय के लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। आयोजन में कई पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को बनाए रखने पर जोर दिया गया।
बांग्लादेश पूजा सेलिब्रेशन कमेटी के पूर्व अध्यक्ष काजल देबनाथ ने कहा कि जन्माष्टमी केवल बांग्लादेश का त्योहार नहीं है। इसे दुनिया के कई हिस्सों में मनाया जाता है।उन्होंने ढाका के जुलूस को ऐतिहासिक बताया और कहा कि राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बावजूद यह परंपरा जारी रही है।
नेपाल में कृष्ण मंदिर के बाहर लंबी कतार
नेपाल की राजधानी काठमांडू में भी जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऐतिहासिक कृष्ण मंदिर पहुंचे। लोग सुबह तड़के दर्शन के लिए पहुंचने लगे। मंदिर परिसर में लंबी कतारें देखी गईं।
Across India, the birth of Lord Krishna is not just remembered — it is celebrated and lived in countless ways.
— Incredible!ndia (@incredibleindia) September 4, 2026
In some places, the joy of his arrival echoes through midnight prayers. In others, it fills the streets with music, colour and celebration. Through dance, devotion and… pic.twitter.com/LNiK2H3974
कई श्रद्धालुओं ने व्रत रखा और पारंपरिक पूजा में हिस्सा लिया।
कृष्ण मंदिर के पुजारी भुवन थपलिया ने इस साल की जन्माष्टमी को विशेष बताया। उन्होंने रोहिणी नक्षत्र के साथ जन्माष्टमी के संयोग का उल्लेख किया। उनके मुताबिक धार्मिक मान्यता में रोहिणी को भगवान कृष्ण का जन्म नक्षत्र माना जाता है।
बच्चों से लेकर मंदिरों तक दिखा कृष्ण उत्सव
इस बार जन्माष्टमी के आयोजनों में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी बड़ी भूमिका रही। मंगलुरु में बच्चों के लिए राष्ट्रीय स्तर का उत्सव और श्रीकृष्ण वेश प्रतियोगिता आयोजित हुई। बच्चों ने कृष्ण के पारंपरिक रूप में हिस्सा लिया।
देश के अलग अलग हिस्सों में मनाई गई जन्माष्टमी ने स्थानीय परंपराओं की विविधता भी सामने रखी। कहीं आधी रात को पूजा हुई। कहीं झांकियां आकर्षण का केंद्र बनीं। कहीं बच्चों ने कृष्ण का रूप धारण किया। कहीं पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए गए।
दिल्ली, वाराणसी, मथुरा, काशी, केरल, असम, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में हुए आयोजनों के साथ नेपाल और बांग्लादेश की तस्वीरों ने यह दिखाया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा पर्व है।
इस दौरान नेताओं और धार्मिक आयोजकों ने भगवान कृष्ण के संदेश में धर्म, कर्तव्य, सत्य, साहस, सेवा, विनम्रता और सद्भाव जैसे मूल्यों पर जोर दिया। यही संदेश जन्माष्टमी के धार्मिक उत्सव को व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ भी देता है।