आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
नेपाल में बाढ़ का पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन तबाही का खौफ अभी लोगों के दिलों से नहीं उतरा है। बच्चे रात में डरकर नींद से जाग जाते हैं और रोते हुए कहते हैं कि फिर बाढ़ आई है। कई वयस्क डर और बेचैनी से जूझ रहे हैं, जबकि उफनती नदियों और बाढ़ के पानी के बीच अपनों से बिछड़े परिवार अपने प्रियजनों की बेसब्री से तलाश कर रहे हैं।
विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल में तबाही के साथ-साथ ऐसा गहरा मानसिक आघात भी छोड़ा है, जिसकी भयावह तस्वीर अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है।
पिछले एक दशक में आई इस सबसे भीषण बाढ़ से जूझ रहे नेपाल में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब उस त्रासदी के शुरुआती संकेत देख रहे हैं, जो आसपास हुई भौतिक तबाही की तुलना में कम दिखाई देती है।
बाढ़ में मरने वालों की संख्या 900 के पार पहुंच चुकी है और करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं। ऐसे में अपनों को खोने, घर-बार छोड़ने और भविष्य को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता का मानसिक बोझ हजारों लोगों पर बढ़ता जा रहा है। इसे देखते हुए सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की कवायद शुरू की है।