मुहम्मद उवैस सिद्दीक़ी/ मुंबई
मुंबई का गोवंडी इलाका, जिसे अक्सर झुग्गी-बस्तियों और तंग गलियों के लिए जाना जाता है। इन गलियों में पलने वाले नौजवानों के लिए ज़िंदगी कभी आसान नहीं होती। लेकिन इन्हीं तंग गलियों से निकलकर एक लड़के ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो आज हज़ारों लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण बन गया है। हम बात कर रहे हैं मुहम्मद सीमाब ख़ान की, जिन्होंने तमाम मुश्किलों को मात देते हुए यूपीएससी जैसा कड़ा इम्तिहान पास किया है।
आज वह असम के धुबरी ज़िले में डिस्ट्रिक्ट यूथ ऑफिसर के तौर पर अपनी खिदमात अंजाम दे रहे हैं। उनका यह सफर कैसा रहा, इसी सफरनामे पर 'आवाज़ द वॉयस' ने उनसे खास बातचीत की।

'आवाज़ द वॉयस' से बात करते हुए सीमाब बताते हैं कि उनका खानदान बहुत मामूली था। उनके वालिद पेशे से एक बढ़ई थे और वालिदा एक घरेलू खातून हैं। घर की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाने के लिए दिन-रात एक कर दिया। सीमाब की शुरुआती तालीम चेंबूर के न्यू मॉडल इंग्लिश हाई स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने के.
जे. सोमैया कॉलेज से माइक्रोबायोलॉजी और बायोकैमिस्ट्री में ग्रेजुएशन पूरा किया।सीमाब मानते हैं कि मुस्लिम नौजवान बड़ी तादाद में UPSC की तरफ़ नहीं आते, क्योंकि उनके सामने बेदारी और सही गाईडेंस की कमी एक बहुत बड़ी चुनौती है।
SSC पास करने के बाद अच्छे नंबर आने की वजह से उन्होंने साइंस स्ट्रीम चुन ली थी। वह चाहते तो कोई भी आम नौकरी कर सकते थे। लेकिन समाज के हाशिए पर खड़े कमज़ोर और पिछड़े लोगों की ज़िंदगी बेहतर करने की चाहत ने उन्हें सिविल सर्विसेज की तरफ मोड़ दिया।
गोवंडी जैसे इलाके की पहचान हमेशा से सामाजिक पिछड़ेपन, जुर्म और नशे जैसी समस्याओं के लिए रही है। जब सीमाब ने UPSC की तैयारी करने का फैसला किया, तो उनके आसपास कोई अच्छा 'पीयर ग्रुप' (तैयारी करने वाले साथी) नहीं था। ऐसे में उन्होंने इंटरनेट का सहारा लिया। दादर में 'Pursue IAS' नाम की एक अच्छी कोचिंग तलाश कर उन्होंने अपना फाउंडेशन कोर्स पूरा किया और असल तैयारी शुरू की।
UPSC का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। सीमाब कहते हैं कि यह इम्तिहान सिर्फ आपके ज्ञान का नहीं, बल्कि आपके किरदार, ज़ेहनी मज़बूती और यकीन का भी टेस्ट है। लगातार 6-8 साल तक एक ही मंज़िल के लिए मेहनत करने के दौरान कई बार उन्हें मायूसी मिली। उन्होंने अपनी पूरी सलाहियत लगाने के बावजूद अलग-अलग मरहलों में महज़ 0.66 नंबर से भी कामयाबी गंवाई थी।
पैसों की तंगी, 6-7 साल की तैयारी और 'तुम क्या कर रहे हो?' जैसे समाज के सवालों के बीच सबसे दुखद मोड़ तब आया, जब सात साल पहले उन्होंने अपने वालिद को खो दिया। उस वक्त उन्हें लगा कि जैसे उन्होंने अपनी ज़िंदगी का सबसे मज़बूत सहारा खो दिया है।
कई बार UPSC छोड़ने का ख्याल भी आया, लेकिन अल्लाह पर यकीन और अपनी सालों की मेहनत पर भरोसे ने उन्हें फिर से खड़े होने की हिम्मत दी।इस लंबे सफर में सीमाब ने अपनी रणनीति में लगातार बदलाव किए, जिसे वह इस इम्तिहान के लिए सबसे ज़रूरी मानते हैं।

तीसरी कोशिश में प्रीलिम्स पास करने के बाद वह मुंबई के हज हाउस में रेसिडेंशियल कोचिंग में गए, जहां से उन्हें मेंस की आंसर राइटिंग में काफी मदद मिली। अपने पांचवें प्रयास में वह कुछ महीनों के लिए दिल्ली भी गए, जहां उन्होंने मेंस और इंटरव्यू की तैयारी की।
पैसों की तंगी को लेकर वह कहते हैं कि EdTech प्लेटफॉर्म्स ने तैयारी को थोड़ा आसान ज़रूर किया है, लेकिन टेस्ट सीरीज़ जैसी चीज़ें काफी महंगी होती हैं। उन्हें हज हाउस में मुफ्त टेस्ट सीरीज़ की सहूलियत मिली। वह मानते हैं कि ज़कात फाउंडेशन जैसी तंज़ीमें भी होनहार छात्रों की बहुत मदद कर रही हैं।
सीमाब इस बात से खुश हैं कि अब देशभर में ऐसे कई रेसिडेंशियल कोचिंग इंस्टिट्यूट खुल रहे हैं, जो ज़रूरतमंद छात्रों को मुफ्त तालीम दे रहे हैं।सीमाब की राय में भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की असल ताकत तभी बढ़ेगी जब उसमें समाज के हर तबके की बड़े पैमाने पर हिस्सेदारी होगी।
वह मुस्लिम नौजवानों से अपील करते हैं कि वे इन इम्तिहानों को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि देश के बड़े फैसलों में अपनी हिस्सेदारी के तौर पर देखें। जब UPSC इंटरव्यू 2023 के आधार पर 2025 में मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स के तहत डिस्ट्रिक्ट यूथ ऑफिसर के तौर पर उनका चयन हुआ, तो परिवार को बड़ी राहत मिली और मिठाइयां बांटी गईं।
मुंबई के गोवंडी से निकलकर सीधे असम के धुबरी ज़िले में पोस्टिंग मिलना उनके लिए एक बिल्कुल नया और हैरतअंगेज़ चैलेंज था। लेकिन वह इसे पब्लिक सर्विस की खूबसूरती मानते हैं, जो भारत की अनेकता में एकता को करीब से समझने का मौका देती है। धुबरी के नौजवान बहुत टैलेंटेड हैं। अब सीमाब 'मेरा युवा भारत' (MY Bharat) के ज़रिए धुबरी के इन होनहार नौजवानों को एक बड़ा मंच देना चाहते हैं।

रिसोर्सेज की कमी की वजह से अपने बड़े सपने छोड़ने की सोच रहे नौजवानों को सीमाब एक खास पैगाम देते हैं। वह कहते हैं, "मैं जानता हूं कि आपके सामने खड़े चैलेंजेस इस वक्त आपको बहुत बड़े लग सकते हैं और आपको बेबसी महसूस हो सकती है।
लेकिन हिम्मत मत हारिए, क्योंकि सूरज निकलने से ठीक पहले रात सबसे ज़्यादा अंधेरी होती है। अगर आप मज़बूती के साथ चलते रहें, तो कामयाबी ज़रूर आपका रास्ता तलाश लेगी।"