ब्रिक्स से केरल तक क्यों चर्चा में हैं मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ?

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 15-09-2026
Anwar Ibrahim made waves from BRICS to Kerala, sparking widespread discussion. ibrahi with keralam governer
Anwar Ibrahim made waves from BRICS to Kerala, sparking widespread discussion. ibrahi with keralam governer

 

मलिक असगर हाशमी/ नई दिल्ली

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम भारत में अपनी सक्रिय मौजूदगी को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद उन्होंने केरल का रुख किया। उनकी यह यात्रा केवल राजनीतिक और कूटनीतिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रही। केरल में उन्होंने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता, उलेमा और इस्लामी शिक्षा हासिल कर रहे छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने अपनी यात्रा के अलग-अलग अनुभव सोशल मीडिया पर भी साझा किए।

अनवर इब्राहिम की खास बात यह रही कि उन्होंने भारत यात्रा के दौरान हुई कई महत्वपूर्ण मुलाकातों और चर्चाओं को सार्वजनिक रूप से दर्ज किया। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात से लेकर ब्रिक्स मंच पर मलेशिया का पक्ष रखने और फिर केरल पहुंचने तक उन्होंने करीब बारह पोस्ट किए। इनमें भारत और मलेशिया के रिश्तों के साथ कारोबार, शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल अर्थव्यवस्था, पर्यटन और सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र किया गया।

केरल पहुंचने के बाद अनवर इब्राहिम सबसे पहले करंथूर स्थित मार्कजु सकाफथी सुन्निया पहुंचे। यहां उन्होंने भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और उसके सामाजिक तथा नैतिक प्रभावों पर भी चर्चा हुई।

अनवर इब्राहिम ने सोशल मीडिया पर बताया कि एआई ज्ञान और विकास के नए रास्ते खोल रहा है। हालांकि इसके साथ आस्था, नैतिकता, विश्वास और इंसान की बौद्धिक स्वतंत्रता से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन जरूरी है। इसी संदर्भ में इस्लामी मूल्यों पर आधारित एआई दृष्टिकोण की जरूरत पर चर्चा हुई।

इसके बाद मलेशियाई प्रधानमंत्री ने मार्कजु में करीब 2,000 छात्रों के साथ ज्ञान की एक सभा में हिस्सा लिया। यह मुलाकात उनकी केरल यात्रा का अहम हिस्सा रही। आमतौर पर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की यात्रा में सरकारी बैठकों और कारोबारी कार्यक्रमों को ज्यादा महत्व मिलता है। लेकिन अनवर इब्राहिम ने धार्मिक शिक्षा हासिल कर रहे छात्रों के बीच समय बिताकर अपनी यात्रा को एक अलग रूप दिया।

उनकी केरल यात्रा में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के साथ मुलाकात भी शामिल रही। राज्यपाल ने उनसे शिष्टाचार भेंट की। दोनों के बीच भारत और मलेशिया के पुराने संबंधों पर बातचीत हुई। चर्चा में व्यापार, शिक्षा, लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक आदान प्रदान जैसे मुद्दे सामने आए।

अनवर इब्राहिम ने कहा कि मलेशिया और केरल के संबंध केवल आज के नहीं हैं। मालाबार तट लंबे समय से व्यापार, धर्म, ज्ञान और संस्कृति के आदान प्रदान का महत्वपूर्ण रास्ता रहा है। इन ऐतिहासिक संबंधों को अब आर्थिक सहयोग के नए अवसरों में बदलने की जरूरत है।

उन्होंने केरल और आसपास के राज्यों के निवेशकों को मलेशिया में उपलब्ध अवसरों को देखने का न्योता भी दिया। साथ ही मलेशियाई कंपनियों से भारत और खासकर केरल में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की अपील की। उनका कहना था कि मजबूत व्यापार और निवेश दोनों देशों के लोगों के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन से भी अनवर इब्राहिम की मुलाकात हुई। सतीशन ने राज्य के मंत्रियों सय्यद सादिक अली शिहाब थंगल और पी के कुनहालिकुट्टी के साथ मलेशियाई प्रधानमंत्री से मुलाकात की। इस बैठक में भारत और मलेशिया के बीच संबंधों को और मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

अनवर इब्राहिम ने बताया कि उन्होंने केरल के विपक्ष के नेता वी डी सतीशन के साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, पर्यटन, शिक्षा, व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की। उन्होंने सतीशन को मलेशिया आने का निमंत्रण भी दिया। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत को आगे बढ़ाना और संभावित सहयोग को ठोस रूप देना है।

मलेशियाई प्रधानमंत्री की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष भारत, मलेशिया और खाड़ी देशों की कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी रही। करीब 30 कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अलग अलग क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया। इनमें चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर, निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, रिटेल, ऊर्जा और परिवहन जैसे क्षेत्र शामिल थे।

अनवर इब्राहिम ने इस बैठक में मलेशिया को आसियान के लिए एक प्रवेश द्वार के रूप में पेश किया। उनका जोर इस बात पर रहा कि भारत की तकनीकी और सेमीकंडक्टर क्षेत्र की क्षमता तथा मलेशिया की औद्योगिक क्षमता को साथ लाया जा सकता है। इससे दोनों देशों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है।

उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात और भारत से जुड़े कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ भी अलग से बातचीत की। शराफ ग्रुप और ईएफएस फैसिलिटीज सर्विसेज ग्रुप समेत कई कंपनियों के प्रतिनिधियों से निवेश और रोजगार के अवसरों पर चर्चा हुई। बीईएएच ग्रुप के साथ कचरे से ऊर्जा तैयार करने वाली परियोजनाओं पर भी बातचीत हुई।

शराफ ग्रुप की ओर से मलेशिया को अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए हलाल मांस के क्षेत्रीय वितरण केंद्र के तौर पर विकसित करने में रुचि जताई गई। इसके लिए मलेशिया की कार्गो और लॉजिस्टिक्स क्षमता का इस्तेमाल करने की संभावना पर विचार हुआ। ईएफएस की ओर से मलेशिया के लोगों के लिए फैसिलिटीज मैनेजमेंट क्षेत्र में रोजगार के अवसरों से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी गई।

बीईएएच ग्रुप ने मलेशिया में टिकाऊ वेस्ट टू एनर्जी सुविधाएं विकसित करने में रुचि दिखाई। शारजाह में रीसाइक्लिंग और कचरे से सामग्री हासिल करने के क्षेत्र में कंपनी के अनुभव को मलेशिया के लिए उपयोगी बताया गया।

इस पूरी यात्रा के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अनवर इब्राहिम का रुख भी चर्चा में रहा। उन्होंने ब्रिक्स मंच पर कब्जे, सेटलर कॉलोनियलिज्म और सेटलर टेररिज्म को लेकर मलेशिया की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि किसी भी इंसान की जिंदगी की कीमत उस जगह के आधार पर कम नहीं हो सकती जहां वह रहता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्रिक्स इस मुद्दे पर स्पष्ट और बिना किसी अस्पष्टता के रुख अपनाएगा।

दिल्ली के बाद केरल की यात्रा ने अनवर इब्राहिम के भारत दौरे को व्यापक रूप दिया। एक तरफ उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन में वैश्विक मुद्दों पर मलेशिया का पक्ष रखा। दूसरी तरफ भारत के साथ व्यापार और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। केरल में उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व के साथ बैठक की। राज्यपाल से मुलाकात की। कारोबारी प्रतिनिधियों से बात की। उलेमा और इस्लामी शिक्षा हासिल कर रहे छात्रों के बीच भी पहुंचे।

अनवर इब्राहिम की सोशल मीडिया पोस्टों से उनकी यात्रा के कई पहलू सामने आए हैं। इनमें भारत मलेशिया संबंध, केरल मलेशिया संबंध, ब्रिक्स सम्मेलन, प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात, शेख अबूबकर अहमद से बातचीत, एआई और इस्लामी नैतिकता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, हलाल मांस कारोबार और निवेश जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।

केरल की अपनी यात्रा को उन्होंने केवल एक औपचारिक कार्यक्रम के रूप में पेश नहीं किया। उन्होंने मालाबार और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच पुराने रिश्तों का उल्लेख किया। साथ ही इन रिश्तों को आधुनिक दौर के व्यापार और निवेश से जोड़ने की बात कही। यही वजह है कि उनकी केरल यात्रा को भारत और मलेशिया के रिश्तों के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

भारत और मलेशिया के रिश्तों में व्यापार और निवेश के अलावा शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क की भी अहम भूमिका है। अनवर इब्राहिम के हालिया कार्यक्रमों में इन सभी पहलुओं की झलक दिखाई दी। उनकी यात्रा ने यह संदेश भी दिया कि दोनों देशों के संबंध केवल सरकारों के बीच होने वाली बैठकों तक सीमित नहीं हैं। इनके पीछे समाज, शिक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक संपर्क का भी लंबा इतिहास है।

ब्रिक्स सम्मेलन के बाद अनवर इब्राहिम का केरल दौरा इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्होंने अपने अनुभवों को लगातार सोशल मीडिया पर साझा किया। उनकी पोस्टों में कूटनीति के साथ व्यक्तिगत मुलाकातों और स्थानीय संबंधों का भी उल्लेख रहा। दिल्ली से केरल तक की उनकी यात्रा ने भारत मलेशिया संबंधों के कई पहलुओं को एक साथ सामने ला दिया।