ईमान सकीना
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या मजहबीहोना जिंदगी को गंभीर और बोरिंग बना देता है। कुछ लोग यह सोचते हैं कि जो व्यक्ति जितना अधिक धार्मिक होता है, उसे हंसी मजाक, दोस्ती, सफर, खेलकूद और जिंदगी की छोटी-छोटी खुशियों से उतनी ही दूरी बना लेनी चाहिए। लेकिन क्या इस्लाम सचमुच यही सिखाता है? क्या कोई दिन में पांच वक्त की नमाज पढ़कर भी फुटबॉल मैच का मजा नहीं ले सकता?
क्या शालीनता अपनाकर अच्छे कपड़े नहीं पहने जा सकते? क्या अपने धर्म को पूरी गंभीरता से लेते हुए दोस्तों के साथ खुलकर हंसा नहीं जा सकता? इन सवालों का जवाब बिल्कुल हां में है। आप पूरी तरह धार्मिक होने के साथ-साथ जिंदगी का भरपूर आनंद भी उठा सकते हैं।

इस्लाम इंसान से उसकी इंसानियत छीनने की बात नहीं करता। यह धर्म अच्छी तरह समझता है कि हर इंसान को आराम, मेल-जोल, खुशी, मनोरंजन और सुकून के पलों की जरूरत होती है। इस्लाम यह नहीं सिखाता कि आप हर तरह की खुशी से मुंह मोड़ लें। वह सिर्फ एक स्वस्थ आनंद और नुकसानदायक अतिरेक के बीच का फर्क समझाता है।
कुरान मजीद में इस बात पर रोशनी डाली गई है कि इस दुनिया की नेमतें और अच्छी चीजें अपने आप में हराम नहीं हैं। यह जीवन संतुलित तरीके से जीना सिखाता है। जिंदगी के वैध सुखों का आनंद लेना कमजोर आस्था की निशानी नहीं है। असली सवाल यह है कि हम उन खुशियों का आनंद कैसे लेते हैं और क्या वे हमें एक जिम्मेदार इंसान बनाती हैं।
पैगंबर हजरत मोहम्मद की जिंदगी इस बात की मिसाल है कि धार्मिक निष्ठा और आम इंसान की खुशियां साथ-साथ चल सकती हैं। वे मुस्कुराते थे, अपने साथियों के साथ हल्के-फुल्के मजाक भी करते थे, परिवार के साथ वक्त बिताते थे, यात्राएं करते थे और सामाजिक आयोजनों में हिस्सा लेते थे।
उन्होंने अपने साथियों को कभी यह नहीं सिखाया कि वे दुनिया को पूरी तरह छोड़ दें। इसके बजाय उन्होंने हमेशा संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। कुरान हमें याद दिलाता है कि हमें अपनी दुनिया और आखिरत दोनों का ख्याल रखना चाहिए। संदेश साफ है कि दुनिया के अस्थाई आनंद आपको आपके असल मकसद से न भटकाएं, लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं है कि हर दुनियािी खुशी गलत है।
अब सवाल यह उठता है कि इस्लाम के दायरे में रहकर मनोरंजन कैसा हो सकता है। मनोरंजन का मतलब यह नहीं है कि वह बोरिंग हो। इस्लाम के मूल्यों का सम्मान करते हुए भी जिंदगी का लुत्फ उठाया जा सकता है। खेलकूद और शारीरिक गतिविधियां इसका बेहतरीन जरिया हैं।
फुटबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन, तैराकी, साइकिल चलाना, ट्रैकिंग और मार्शल आर्ट जैसी चीजें सेहत को दुरुस्त रखती हैं और आपसी रिश्तों को भी मजबूत बनाती हैं। इसके अलावा घूमना-फिरना और नई जगहों की खोज करना भी मन को तरोताजा कर देता है। नए शहरों की सैर करना, प्रकृति की सुंदरता को देखना, ऐतिहासिक जगहों पर जाना और परिवार के साथ रोड ट्रिप पर निकलना दिमाग को सुकून देता है। कुरान में बार-बार लोगों को सफर करने और दुनिया की रचना पर गौर करने के लिए कहा गया है।
परिवार के साथ वक्त बिताना जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा है। पिकनिक मनाना, बोर्ड गेम खेलना, मिलकर खाना बनाना, रिश्तेदारों के यहां जाना और साथ बैठकर बातें करना साधारण पलों को भी यादगार बना देता है। इसके अलावा रचनात्मक शौक जैसे पढ़ना, लिखना, फोटोग्राफी, बागवानी, पेंटिंग और कुकिंग भी मानसिक शांति देते हैं।
अच्छे दोस्तों का साथ होना आस्था के रास्ते में रुकावट नहीं बनता। अच्छे दोस्त इंसान की शख्सियत को निखारते हैं और जीवन को आसान बनाते हैं। असली समस्या मनोरंजन में नहीं बल्कि उसकी अति में है। जब कोई शौक या मनोरंजन इंसान की प्राथमिकता बन जाए और वह अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने लगे, तब दिक्कतें शुरू होती हैं।
यदि मनोरंजन की वजह से जरूरी काम छूटने लगें या गलत आदतें लग जाएं, तो उस पर विचार करने की जरूरत है। कुरान में भी अति से बचने की हिदायत दी गई है। कोई भी फिल्म, खेल या हॉबी तब तक अच्छी है जब तक वह इंसान के नियंत्रण में रहे। एक संतुलित जीवन में इबादत और काम, परिवार और दोस्तों, तथा गंभीरता और हंसी-मजाक सभी के लिए जगह होती है।

कई बार लोग धार्मिक दिखने के चक्कर में जिंदगी की स्वाभाविक खुशियों को भूल जाते हैं। उन्हें हंसने या छुट्टियों का आनंद लेने पर अपराधबोध महसूस होने लगता है। लेकिन मकसद धर्म और मनोरंजन के बीच चुनाव करना नहीं है, बल्कि यह सीखना है कि अल्लाह को याद रखते हुए जीवन का आनंद कैसे लिया जाए।
जिंदगी में संतुलन होना बहुत जरूरी है। नमाज भी पढ़ें और खेलकूद में भी हिस्सा लें। कड़ी मेहनत करें और आराम भी करें। दूसरों की मदद करें और अपने लिए भी वक्त निकालें। अपने परिवार के साथ हंसे-बोलें, यात्रा करें और अच्छी यादें बनाएं।
अपने दिल को उस ताकत से जोड़े रखें जिसने आपको यह खूबसूरत जिंदगी दी है। धार्मिक होने का मतलब दुनिया से कट जाना नहीं है, बल्कि जीवन को एक सही मकसद के साथ जीना है। सबसे खूबसूरत खुशी वह होती है जो अपने पीछे कोई पछतावा नहीं बल्कि सिर्फ आभार छोड़कर जाती है। जब इंसान संतुलन के साथ जीता है, तो उसकी हर सांस सुकून और positivity से भर जाती है।