जानिए कैसे PMJVK योजना से बदल रही अल्पसंख्यक क्षेत्रों की तस्वीर

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 27-07-2026
Find out how the PMJVK scheme is transforming the landscape of minority areas.
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मलिक असगर हाशमी

अधूरा ज्ञान अक्सर लोगों को भ्रमित कर देता है। कई बार राजनीतिक बहसों में यह धारणा बना दी जाती है कि मौजूदा केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों के विकास के प्रति गंभीर नहीं है। लेकिन धरातल पर सच्चाई इससे काफी अलग नजर आती है। केंद्र सरकार की एक ऐसी योजना है जो देश के अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों की तस्वीर बदल रही है। इस योजना का नाम है 'प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम' जिसे संक्षेप में पीएमजेवीके (PMJVK) कहा जाता है। सरकार ने इस कल्याणकारी योजना को 15वें वित्त आयोग के तहत 2026 तक जारी रखने की मंजूरी दी है।

यह योजना किसी व्यक्ति के खाते में सीधे पैसे भेजने वाली योजना नहीं है। यह योजना आपके गांव, कस्बे और जिले में बुनियादी सुविधाएं खड़ा करने का काम करती है। अगर आपके क्षेत्र में अच्छे स्कूल, अस्पताल, पीने के पानी की व्यवस्था या हुनर सीखने के केंद्र नहीं हैं, तो यह योजना उन्हीं कमियों को पूरा करती है।

एमएसडीपी से पीएमजेवीके तक का सफर

इस योजना की शुरुआत लगभग दो दशक पहले हुई थी। उस समय इसे बहुक्षेत्रीय विकास कार्यक्रम यानी एमएसडीपी (MsDP) कहा जाता था। शुरुआत में 2008 में देश के 90 अल्पसंख्यक बहुल जिलों की पहचान की गई थी। इन जिलों में बुनियादी ढांचे की भारी कमी थी। 2011 की जनगणना के बाद योजना का विस्तार किया गया।

साल 2018 में मोदी सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर 'प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम' कर दिया। इसके दायरे में भी बड़ा बदलाव किया गया। पहले यह केवल गिने चुने जिलों तक सीमित थी। अब इस योजना का दायरा बढ़ा दिया गया है।

वर्ष 2022 से इस योजना को देश के सभी जिलों में लागू कर दिया गया है। इसमें देश के सभी आकांक्षी जिले (Aspirational Districts) भी शामिल हैं। अब देश के किसी भी हिस्से का वह क्षेत्र जहां 15 किलोमीटर के दायरे में कम से कम 25 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी रहती है, वह इस योजना के तहत विकास कार्यों का प्रस्ताव भेज सकता है।

किन समुदायों को मिलता है इस योजना का फायदा

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 की धारा 2 (c) के तहत देश में 6 समुदायों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया है। पीएमजेवीके योजना का लाभ इन 6 समुदायों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है:

  1. मुस्लिम
  2. सिख
  3. ईसाई
  4. बौद्ध
  5. जैन
  6. पारसी (ज़ोरोस्ट्रियन)

इन समुदायों की आबादी जहां 25 प्रतिशत या उससे अधिक है, उन क्षेत्रों को अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र मानकर बजट आवंटित किया जाता है। हालांकि, जब किसी इलाके में स्कूल, अस्पताल या सड़क बनती है, तो उसका उपयोग उस क्षेत्र में रहने वाले सभी धर्मों के लोग करते हैं।

इस योजना के तहत गांव और शहरों में क्या काम होते हैं

पीएमजेवीके का मुख्य उद्देश्य पिछड़े अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक ढांचे को मजबूत करना है। इसके तहत कई तरह की निर्माण परियोजनाएं पूरी की जाती हैं:

  • शिक्षा क्षेत्र:नए स्कूल भवन, डिग्री कॉलेज, स्मार्ट क्लासरूम, प्रयोगशालाएं (लैब), छात्रावास और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवासीय कोचिंग सेंटर का निर्माण।
  • तकनीकी और कौशल विकास:आईटीआई (ITI), पॉलिटेक्निक संस्थान और हुनर हब की स्थापना, ताकि युवा हुनर सीखकर रोजगार पा सकें।
  • स्वास्थ्य सुविधाएं:प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), अस्पताल भवन और आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण।
  • जन सुविधाएं:पीने के पानी की टंकी, पक्की सड़कें, सार्वजनिक शौचालय और कृषि उत्पादों के रखरखाव के लिए शेड बनाना।
  • सद्भाव मंडप:सामुदायिक कार्यक्रमों और आयोजनों के लिए बड़े भवनों का निर्माण।

महिलाओं और लड़कियों के लिए विशेष प्रावधान

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें कुल आवंटित फंड का 80 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर खर्च करना अनिवार्य है। इसके साथ ही, कुल बजट का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों की सुविधाओं पर खर्च किया जाता है।

उदाहरण के लिए, कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल, लड़कियों के लिए अलग शौचालय, बालिका विद्यालयों में अतिरिक्त कमरे और महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रशिक्षण केंद्र इसी फंड से बनाए जाते हैं। इसका सीधा मकसद अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

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आम नागरिक इस योजना का फायदा कैसे उठा सकते हैं

कई लोगों को लगता है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस योजना में आवेदन कर सकते हैं, लेकिन यह व्यवस्था थोड़ी अलग है। यह एक ढांचागत विकास योजना है। इसका लाभ उठाने का तरीका बेहद सरल है:

  1. अपनी जरूरत पहचानें:अगर आपके गांव या कस्बे में स्कूल का अभाव है, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की इमारत जर्जर है या लड़कियों के लिए कॉलेज नहीं है, तो स्थानीय लोग इसकी एक सूची तैयार कर सकते हैं।
  2. स्थानीय पंचायत से संपर्क करें:ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत और शहरी क्षेत्रों में नगर पालिका इस योजना के लिए प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार करती है।
  3. ब्लॉक और जिला समिति को आवेदन दें:प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी (DM या कलेक्टर) की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय समिति (DLC) होती है। स्थानीय नागरिक, वक्फ बोर्ड प्रतिनिधि या सामाजिक संगठन अपनी मांगों का ज्ञापन ब्लॉक स्तरीय समिति या सीधे जिलाधिकारी को सौंप सकते हैं।
  4. प्रस्ताव की मंजूरी:जिला समिति इन प्रस्तावों की जांच करती है। इसके बाद इसे राज्य स्तरीय समिति और फिर केंद्र सरकार के पास भेजा जाता है। मंजूरी मिलने के बाद सरकारी निर्माण एजेंसियां काम शुरू करती हैं।

कैसे होता है बजट का आवंटन

पीएमजेवीके एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर पैसा लगाती हैं। सामान्य राज्यों में 60 प्रतिशत पैसा केंद्र सरकार देती है और 40 प्रतिशत पैसा राज्य सरकार लगाती है।

पूर्वोत्तर के राज्यों (जैसे असम, मेघालय, नागालैंड आदि) और पहाड़ी राज्यों में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत फंड देती है, जबकि राज्य सरकार को केवल 10 प्रतिशत खर्च करना होता है। जमीन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पूरी तरह से राज्य सरकार की होती है।

योजना से जुड़ा सच और हमारी जिम्मेदारी

सियासी बयानों से इतर, अगर हम आंकड़ों और जमीनी हकीकत को देखें, तो प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम देश के करोड़ों अल्पसंख्यकों की जिंदगी को बेहतर बनाने का काम कर रहा है। जरूरत इस बात की है कि हम अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय जागरूक बनें।

यदि आप किसी ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहाँ अल्पसंख्यक आबादी अच्छी-खासी है और वहाँ बुनियादी सुविधाओं की कमी है, तो जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर पीएमजेवीके के तहत प्रस्ताव भिजवाएं। सही जानकारी ही विकास का सबसे बड़ा जरिया बनती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) क्या है?

उत्तर: पीएमजेवीके केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की एक योजना है, जो अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल, आईटीआई और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं बनाने का काम करती है।

प्रश्न: पीएमजेवीके योजना का लाभ किन समुदायों को मिलता है?

उत्तर: इस योजना के तहत मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय की बहुलता वाले क्षेत्रों में विकास कार्य कराए जाते हैं।

प्रश्न: क्या पीएमजेवीके योजना को आगे बढ़ाया गया है?

उत्तर: हां, केंद्र सरकार ने पीएमजेवीके योजना को 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2026 तक के लिए जारी रखने की मंजूरी दी है।

प्रश्न: अपने गांव में पीएमजेवीके के तहत काम कैसे शुरू करवाएं?

उत्तर: अपने क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों का प्रस्ताव बनाकर ग्राम पंचायत या स्थानीय नागरिक के रूप में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति को सौंपना होता है।



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