नई दिल्ली।
वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर देश में जारी बहस के बीच जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने केंद्र सरकार से संविधान की मूल भावना के अनुरूप कानून लागू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून की विश्वसनीयता तभी बनी रहती है जब उसका पालन बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक पर समान रूप से किया जाए। न्याय किसी समुदाय पर किया गया उपकार नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।
दिल्ली के ऐवान ए गालिब में शुक्रवार को आयोजित अखिल भारतीय मुतवल्ली सम्मेलन को संबोधित करते हुए मौलाना मदनी ने कहा कि वक्फ की चुनौतियां केवल बाहरी दबावों तक सीमित नहीं हैं। कई समस्याएं संस्थागत कमजोरी, प्रशासनिक लापरवाही और रिकॉर्ड के सही रखरखाव की कमी से भी पैदा होती हैं। उन्होंने कहा कि यदि वक्फ संपत्तियों का मजबूत और पारदर्शी प्रबंधन किया जाए तो इनसे जुड़े अनेक विवाद अपने आप कम हो सकते हैं।
मौलाना मदनी ने कहा कि वक्फ संपत्तियों का संरक्षण केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं बल्कि धार्मिक दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि वक्फ अल्लाह के नाम पर समर्पित अमानत है। इसकी सुरक्षा, दस्तावेजों का संरक्षण और अवैध कब्जों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हर मुतवल्ली और पूरे मुस्लिम समाज की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने मुतवल्लियों से अपील की कि वे सभी वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखें। दस्तावेजों का डिजिटलीकरण करें। आय और खर्च का पूरा हिसाब रखें। नियमित ऑडिट कराएं और जहां भी अवैध कब्जे हों वहां समय रहते कानूनी कार्रवाई करें। उनके अनुसार मजबूत दस्तावेज और पारदर्शी व्यवस्था ही वक्फ संस्थानों को भविष्य की चुनौतियों से बचा सकती है।

मौलाना मदनी ने कहा कि यदि समुदाय ईमानदारी, दूरदर्शिता और संगठित योजना के साथ काम करे तो वक्फ के खिलाफ किसी भी साजिश को नाकाम बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को भी इस अभियान से जोड़ना जरूरी है ताकि वक्फ संपत्तियों का संरक्षण लंबे समय तक सुनिश्चित किया जा सके।
सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से पांच सौ से अधिक मुतवल्ली, इस्लामी विद्वान, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता गुलबर्गा स्थित हजरत ख्वाजा बंदा नवाज गेसू दराज की दरगाह के सज्जादानशीन सैयद शाह हाफिज मोहम्मद अली अल हुसैनी ने की। जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने स्वागत भाषण दिया जबकि संचालन मौलाना मुफ्ती हसन कासमी ने किया।
पटना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इकबाल अंसारी ने कहा कि वक्फ संपत्तियों से जुड़े अधिकांश विवाद उस समय सामने आते हैं जब उनकी निगरानी और प्रबंधन कमजोर पड़ जाता है। उन्होंने कहा कि मुतवल्लियों को अपनी जिम्मेदारियां अधिक गंभीरता से निभानी चाहिए। अदालतें संविधान के दायरे में रहकर ही निर्णय देती हैं लेकिन समाज में न्याय व्यवस्था को लेकर जो धारणाएं बन रही हैं उन पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
मरकजी जमीयत अहले हदीस हिंद के अमीर मौलाना असगर अली इमाम मेहदी सलफी ने कहा कि वक्फ संस्थानों की सुरक्षा का दायित्व केवल सरकार या मुतवल्लियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसमें पूरे समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक आम लोग वक्फ के महत्व को नहीं समझेंगे तब तक इन संपत्तियों का प्रभावी संरक्षण संभव नहीं होगा।
जमात ए इस्लामी हिंद के नायब अमीर मलिक मोतासिम खान ने कहा कि कई स्थानों पर वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर निगरानी का परिणाम हैं। उन्होंने चिंता जताई कि कुछ मामलों में वक्फ की संपत्तियों को निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने ऐसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने और जवाबदेही तय करने की मांग की।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में सैयद शाह मोहम्मद अली अल हुसैनी ने कहा कि वक्फ को लेकर देश में जागरूकता बढ़ी है। अब जरूरत इस बात की है कि इस जागरूकता को मजबूत कानूनी तैयारी और बेहतर संस्थागत प्रबंधन में बदला जाए। उन्होंने समाज के सक्षम लोगों से शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण के लिए नए वक्फ स्थापित करने की भी अपील की।
रौजा खुर्द गुलबर्गा शरीफ के डिप्टी सज्जादानशीन शाह सैयद यादुल्लाह हुसैनी ने सुझाव दिया कि हर राज्य में वक्फ संपत्तियों की निगरानी के लिए विशेष समितियां बनाई जाएं। इन समितियों का काम रिकॉर्ड सुरक्षित रखना, अवैध कब्जों पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना होना चाहिए।
साउथ एशियन माइनॉरिटीज लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट नासिर अजीज ने कहा कि देशभर में वक्फ संरक्षण समितियों और विशेष कानूनी प्रकोष्ठों का गठन किया जाना चाहिए। इससे अवैध कब्जों के मामलों में तेजी से कार्रवाई हो सकेगी और संस्थागत व्यवस्था भी मजबूत होगी।
सम्मेलन में मौजूद सांसद हरिंदर मलिक ने कहा कि कुछ वक्फ संस्थानों में कुप्रबंधन की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ की आय का सबसे बड़ा लाभ गरीबों, जरूरतमंदों और समाज के कमजोर वर्गों तक पहुंचना चाहिए। वहीं सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रयासों की सराहना करते हुए वक्फ संस्थानों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट अभियान चलाने की जरूरत बताई।
सांसद इमरान मसूद ने कहा कि धार्मिक संपत्तियों से जुड़े विवाद किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों की संपत्तियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा समान रूप से होनी चाहिए। यही संविधान की भावना भी है।
सम्मेलन में अब्दुल वहीद हुसैन अंगारा, मौलाना सिद्दीकुल्लाह चौधरी, अकबर उल जब्बार खान, एडवोकेट हाजी मोहम्मद हारून, एडवोकेट इकबाल शेख, सैयद महमूद अख्तर, एडवोकेट ताहिर मोहम्मद हकीम, सांसद अब्दुल वहाब और पूर्व सांसद हारिस बीरान सहित कई वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में नवाब अहमद हमीद, एडवोकेट फिरोज गाजी, मार्जिया खान, प्रोफेसर निसार अहमद अंसारी, मौलाना यहया करीमी, मौलाना मोहम्मद कासिम नूरी, मौलाना आफताब आलम सिद्दीकी, मौलाना कारी अब्दुल समी और ओवैस सुल्तान खान सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए अनेक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
सम्मेलन का मुख्य संदेश स्पष्ट था। वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा केवल अदालतों या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए मजबूत दस्तावेज, पारदर्शी प्रबंधन, कानूनी तैयारी और समाज की सक्रिय भागीदारी एक साथ जरूरी है। वक्ताओं का मानना था कि यदि इन चार स्तंभों पर गंभीरता से काम किया जाए तो वक्फ संस्थानों को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और जनहितकारी बनाया जा सकता है।

FAQ
वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर मौलाना महमूद मदनी ने क्या कहा?
उन्होंने सरकार से संविधान के अनुरूप कानून लागू करने और सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करने की अपील की।
मुतवल्लियों को क्या सलाह दी गई?
रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण करें। वित्तीय पारदर्शिता रखें। नियमित ऑडिट कराएं। अवैध कब्जों के खिलाफ समय पर कानूनी कार्रवाई करें।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
वक्फ संपत्तियों के संरक्षण, बेहतर प्रबंधन, कानूनी तैयारी और संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करना।