आवाज द वॉयस | कोलकाता
कोलकाता में दुर्गापूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं होती। यह शहर की पहचान है। इसकी संस्कृति है। इसकी आत्मा है। जैसे ही खूटी पूजा होती है, पूरा शहर यह मान लेता है कि दुर्गोत्सव का मौसम शुरू हो गया है। ढाक की पहली थाप, पूजा की तैयारियां और पंडालों की हलचल लोगों के मन में उत्साह भर देती है।

बुधवार को इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मोहम्मद अली पार्क यूथ एसोसिएशन ने पारंपरिक खूटी पूजा के साथ अपने 58वें दुर्गापूजा समारोह की औपचारिक शुरुआत की। इस आयोजन के साथ उत्तर और मध्य कोलकाता की सबसे प्रतिष्ठित दुर्गा पूजाओं में से एक की तैयारियों का शुभारंभ हो गया।
एमजी रोड मेट्रो स्टेशन के पास स्थित मोहम्मद अली पार्क दुर्गा पूजा मैदान में सुबह से ही श्रद्धालुओं और समिति के सदस्यों का जुटना शुरू हो गया था। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच खूटी पूजा संपन्न हुई। आयोजन समिति के सदस्यों ने मां दुर्गा से सफल, शांतिपूर्ण और भव्य उत्सव की प्रार्थना की। पूरे परिसर में धार्मिक आस्था के साथ उत्सव का उत्साह साफ दिखाई दे रहा था।
इस अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्री तथा मोहम्मद अली पार्क यूथ एसोसिएशन के चेयरमैन तापस रॉय मौजूद रहे। विधायक विजय ओझा, पार्षद मीना देवी पुरोहित, भाजपा उत्तर कोलकाता के जिला अध्यक्ष तमघ्न घोष, सामाजिक कार्यकर्ता और एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन बिनय दुबे सहित कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक हस्तियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। भाजपा नेता दिनेश पांडे, नवीन मिश्रा, भोला प्रसाद सोनकर और रवि तिवारी समेत अनेक गणमान्य लोग भी इस मौके पर उपस्थित रहे।
कोलकाता में जैसे ही खूटी पूजा होती है, ढाक की गूंज शहर के माहौल को बदल देती है। बाजारों में रौनक बढ़ने लगती है। कलाकार अपनी अंतिम तैयारियों में जुट जाते हैं। पंडाल निर्माण तेज हो जाता है। इसी माहौल के बीच मोहम्मद अली पार्क की खूटी पूजा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि दुर्गापूजा केवल आस्था का पर्व नहीं बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी है।

करीब छह दशक से मोहम्मद अली पार्क दुर्गा पूजा अपनी अनोखी थीम, भव्य पंडाल, कलात्मक प्रस्तुति और उत्कृष्ट प्रबंधन के लिए जानी जाती है। हर वर्ष यहां हजारों नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से आने वाले पर्यटक भी इस पूजा को देखने अपनी यात्रा की योजना बनाते हैं।
समिति ने वर्षों से यह परंपरा कायम रखी है कि हर बार केवल आकर्षक पंडाल बनाना ही उद्देश्य नहीं होता बल्कि किसी सामाजिक संदेश को भी प्रमुखता दी जाती है। यही वजह है कि मोहम्मद अली पार्क की दुर्गापूजा को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं। सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को लेकर भी यह पूजा हमेशा चर्चा में रहती है।
कार्यक्रम के दौरान मोहम्मद अली पार्क यूथ एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी सुरेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि 58वें वर्ष की शुरुआत उनके लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि समिति हर वर्ष श्रद्धालुओं को एक नया और यादगार अनुभव देने का प्रयास करती है। परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाकर ही इस पूजा ने अपनी अलग पहचान बनाई है।
उन्होंने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद उन्हें उम्मीद है कि कोलकाता नगर निगम की ओर से पार्क के नीचे बने जलाशय के पुनर्निर्माण का कार्य जल्द पूरा होगा। इसके बाद पार्क की मूल संरचना भी पहले की तरह विकसित हो सकेगी। उनका कहना था कि समिति की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि आने वाले समय में दुर्गापूजा का आयोजन फिर उसी ऐतिहासिक स्थान पर किया जाए जो वर्षों से इस आयोजन की पहचान रहा है।
सुरेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि मोहम्मद अली पार्क केवल एक पूजा स्थल नहीं है। यह शहर की सांस्कृतिक स्मृतियों का हिस्सा है। यहां आने वाले लाखों लोगों की भावनाएं इस स्थान से जुड़ी हैं। इसलिए समिति चाहती है कि श्रद्धालु एक बार फिर उसी ऐतिहासिक परिसर में दुर्गापूजा का आनंद ले सकें।
मोहम्मद अली पार्क यूथ एसोसिएशन की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी। पिछले कई दशकों में यह संस्था उत्तर और मध्य कोलकाता की सबसे प्रतिष्ठित दुर्गा पूजा समितियों में शामिल हो चुकी है। इसकी पहचान केवल भव्य पंडालों तक सीमित नहीं है। यह संस्था पूरे वर्ष सामाजिक सेवा के कार्यों में सक्रिय रहती है। जरूरतमंद लोगों की सहायता, सामुदायिक कार्यक्रम, स्वास्थ्य शिविर और सामाजिक जागरूकता अभियान भी इसके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं।

समिति का मानना है कि दुर्गापूजा केवल चार या पांच दिनों का उत्सव नहीं होना चाहिए। समाज के प्रति जिम्मेदारी पूरे वर्ष निभाई जानी चाहिए। यही सोच इसे अन्य पूजा समितियों से अलग बनाती है।
हर वर्ष यहां तैयार होने वाले पंडाल अपनी कलात्मकता के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बनते हैं। कलाकार महीनों पहले से अपनी तैयारी शुरू कर देते हैं। नई थीम पर काम होता है। पारंपरिक बंगाली संस्कृति को आधुनिक प्रस्तुति के साथ जोड़ने का प्रयास किया जाता है। यही कारण है कि मोहम्मद अली पार्क का नाम कोलकाता की सबसे अधिक देखी जाने वाली दुर्गा पूजाओं में शामिल है।
कोलकाता की दुर्गापूजा को यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया है। इसके बाद दुनिया भर में इस उत्सव की पहचान और मजबूत हुई है। ऐसे में मोहम्मद अली पार्क जैसी ऐतिहासिक पूजा समितियों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। समिति इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
इस वर्ष भी श्रद्धालुओं को नई थीम, बेहतर व्यवस्था और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू हो चुकी है। आयोजन समिति का कहना है कि आने वाले दिनों में पूजा की थीम और अन्य विशेष आकर्षणों की घोषणा की जाएगी।
दुर्गापूजा केवल धार्मिक विश्वास का पर्व नहीं है। यह कला, संस्कृति, पर्यटन और सामाजिक समरसता का भी उत्सव है। मोहम्मद अली पार्क की खूटी पूजा ने एक बार फिर इस परंपरा की शुरुआत कर दी है। अब पूरा कोलकाता उस क्षण का इंतजार कर रहा है जब मां दुर्गा के स्वागत में शहर एक बार फिर रोशनी, संगीत और आस्था से जगमगा उठेगा।

FAQ
प्रश्न: मोहम्मद अली पार्क में खूटी पूजा कब हुई।
उत्तर: बुधवार को पारंपरिक विधि से खूटी पूजा कर 58वें दुर्गापूजा समारोह की औपचारिक शुरुआत की गई।
प्रश्न: मोहम्मद अली पार्क दुर्गा पूजा क्यों प्रसिद्ध है।
उत्तर: यह पूजा अपनी भव्य थीम, कलात्मक पंडाल, उत्कृष्ट प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक संदेशों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है।
प्रश्न: मोहम्मद अली पार्क यूथ एसोसिएशन की स्थापना कब हुई थी।
उत्तर: इस संस्था की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी।
प्रश्न: इस वर्ष समिति की प्रमुख उम्मीद क्या है।
उत्तर: समिति चाहती है कि पार्क के पुनर्निर्माण का कार्य जल्द पूरा हो और दुर्गापूजा का आयोजन फिर अपने ऐतिहासिक स्थल पर किया जा सके।
प्रश्न: मोहम्मद अली पार्क दुर्गापूजा की खास पहचान क्या है।
उत्तर: सामाजिक सरोकार, सांप्रदायिक सद्भाव, आकर्षक पंडाल, नई थीम और सामुदायिक सेवा इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं।