ईमान सकीना
इंसान की समझ से परे एक बात यह है कि जितना हम बांटते हैं, उतने ही हम अमीर होते जाते हैं. दुनिया हमें सिखाती है कि पैसा बचाने और जोड़ने से बढ़ता है. मगर इस्लामी तालीम हमें एक अलग ही हिसाब समझाती है. जो हाथ से निकलता है, वह ऐसे रास्तों से वापस आता है जिसकी उम्मीद भी नहीं होती. कभी यह दौलत बनकर लौटता है, तो कभी अच्छी सेहत, दिल का सुकून या फिर किसी अनजान मुसीबत से हिफाजत बनकर. इसी अनदेखी नेकी को बरकत कहते हैं.
बरकत का मतलब सिर्फ गिनती में ज्यादा होना नहीं है. यह कम चीजों में भी अल्लाह की तरफ से बहुत फायदा होना है. दो लोग एक जैसी कमाई करते हैं. फिर भी एक शख्स तंगी में रहता है. दूसरा कम में भी सुकून से रहता है, दूसरों की मदद करता है. एक घर में बहुत पैसा है, फिर भी कलह रहती है. दूसरे घर में सूखी रोटी है, मगर सब साथ बैठकर मुस्कुराते हैं. यह अंतर रकम का नहीं, बल्कि बरकत का है.
गुणा होता है आपका दिया हुआ दान
बरकत पाने का सबसे बड़ा जरिया सदका है, जो दिल की सफाई से जरूरतमंदों को दिया जाता है. कुरआन में कहा गया है कि अल्लाह के रास्ते में खर्च करने वालों की मिसाल उस दाने जैसी है, जिससे सात बालियां निकलती हैं और हर बाली में सौ दाने होते हैं. अल्लाह जिसे चाहता है, उसे बढ़ाकर देता है.
कुरआन यह भी याद दिलाता है कि जो कुछ भी तुम खर्च करोगे, अल्लाह उसका बदला देगा. वह सबसे बेहतर रोजी देने वाला है. बदला मिलने का मतलब हमेशा वही रुपया वापस आना नहीं होता. कई बार अल्लाह पैसों की जगह अच्छे मौके, मजबूत रिश्ते, बच्चों की सेहत या मन की शांति दे देता है.
पैगंबर साहब ने भी साफ कहा था कि दान देने से धन कभी कम नहीं होता. पहली बार में यह बात अजीब लग सकती है. अगर सौ रुपये में से दस रुपये दे दिए, तो नब्बे ही बचेंगे. लेकिन यहां बात सिर्फ आंकड़ों की नहीं है. बरकत वाले एक हजार रुपये वो काम कर जाते हैं, जो बिना बरकत के दस हजार रुपये भी नहीं कर पाते.
मुश्किलों से बचाती है आपकी ईमानदारी
एक मशहूर वाकया एक गुफा का है. तीन मुसाफिर बारिश से बचने के लिए गुफा में छिपे. अचानक पहाड़ से एक भारी पत्थर गिरा और गुफा का मुंह बंद हो गया. बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा. अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने अपने उन कामों को याद किया जो सिर्फ अल्लाह की रजा के लिए किए गए थे.
एक ने अपने बूढ़े मां-बाप की खिदमत का जिक्र किया. दूसरे ने गुनाह का मौका होते हुए भी खुद को रोकने की बात कही. तीसरे ने अपनी ईमानदारी की कहानी सुनाई. उसने बताया कि एक मजदूर बिना मजदूरी लिए चला गया था. उसने उस मजदूरी के पैसे को व्यापार में लगा दिया. जब सालों बाद मजदूर अपनी छोटी सी मजदूरी मांगने आया, तो मालिक ने उसे उस पैसे से बढ़ा पूरा मवेशी और धन सौंप दिया.
उनकी इस नीयत और ईमानदारी की वजह से अल्लाह ने उस भारी पत्थर को थोड़ा-थोड़ा करके खिसका दिया और तीनों सुरक्षित बाहर आ गए. यह घटना बताती है कि सच्चे दिल से की गई भलाई वक्त पड़ने पर ढाल बन जाती है.
अबू तलहा की कुर्बानी और दिल की सफाई
हजरत अबू तलहा के पास मदीना में एक बहुत खूबसूरत बाग था. उन्हें वह बाग बेहद प्यारा था. जब यह आयत नाजिल हुई कि तुम तब तक भलाई को नहीं पा सकते जब तक अपनी सबसे प्यारी चीज खर्च न कर दो, तब अबू तलहा ने बिना देर किए वह बाग दान कर दिया. पैगंबर साहब ने उनके इस कदम की तारीफ की और उसे रिश्तेदारों में बांटने की सलाह दी.
यह बात आज भी सच है. जो चीज हमारे काम की नहीं है, उसे देना अच्छी बात है. लेकिन जिससे हमें गहरा लगाव हो, उसे किसी के भले के लिए छोड़ देना इंसान के दिल को बदल देता है.
आज की जिंदगी में सदके के करिश्मे
इतिहास और रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसी अनगिनत मिसालें मिलती हैं. एक व्यापारी हमेशा सफर शुरू करने से पहले थोड़ा सा सदका देता था. एक बार उसका जानवर पीछे छूट गया और उसका रास्ता बदल गया. बाद में पता चला कि जिस मुख्य रास्ते से उसे जाना था, वहां डाकुओं ने हमला कर दिया था. वह छोटी सी मदद उसकी जान बचा गई.
पुराने बुजुर्गों का मानना था कि जब भी कोई बीमारी आए या परेशानी बढ़े, तो शिकायत करने से पहले थोड़ा दान देना चाहिए. दान इंसान को अल्लाह की रहमत के करीब लाता है.आज भी लोग ऐसे अनुभव महसूस करते हैं. कोई परीक्षा से पहले किसी की मदद करता है और उसका मन शांत हो जाता है. कोई किसी गरीब का इलाज कराता है और उसके अपने घर की पुरानी बीमारी ठीक होने लगती है.
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दान से बदलता है इंसान का स्वभाव
सदका लेने वाले से ज्यादा देने वाले की सोच को बदलता है. यह मन से लालच को मिटाता है. इंसान को यह एहसास दिलाता है कि वह दुनिया की चीजों का मालिक नहीं, सिर्फ देखभाल करने वाला है.
जब हम तंगी में भी दूसरों की मदद करते हैं, तो हम यह साबित करते हैं कि हमारा भरोसा बैंक खाते पर नहीं, बल्कि ऊपर वाले पर है. यही भरोसा जीवन में बरकत लाता है. फिर ईमानदारी की कमाई काफी लगने लगती है. खाना सुकून देता है. घर में शांति रहती है और जिंदगी का भारीपन दूर हो जाता है. ये वो खुशियां हैं जिन्हें दुनिया का कोई बैंक बैलेंस नहीं खरीद सकता.