असम बाढ़ संकट: शिवसागर गुरुद्वारा बना पीड़ितों का सबसे बड़ा सहारा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 26-07-2026
Assam Flood Crisis: Sivasagar Gurudwara Becomes the Biggest Support for Victims
Assam Flood Crisis: Sivasagar Gurudwara Becomes the Biggest Support for Victims

 

आरिफुल इस्लाम/ गुवाहाटी

असम में इस बार मानसून ने भारी तबाही मचाई है। पूर्वी असम के कई इलाकों में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कई गांवों में पानी घरों की छत तक पहुंच गया। लोगों को अपना घर, सामान और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। ऐसे मुश्किल समय में शिवसागर का एक छोटा सा गुरुद्वारा इंसानियत की मिसाल बनकर सामने आया है।

शिवसागर शहर के स्टेशन चारियाली के पास स्थितशिवसागर गुरुद्वारा साहिबआज सैकड़ों बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए राहत का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। यहां करीब 200 परिवारों को सुरक्षित ठहराया गया है। इतना ही नहीं, हर दिन 1500 से 2000 बाढ़ प्रभावित लोगों को सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ परोसा जा रहा है।

गुरुद्वारे की इस सेवा में किसी से उसका धर्म, जाति, भाषा या समुदाय नहीं पूछा जाता। जो भी मदद के लिए पहुंचता है, उसके लिए यहां भोजन और आश्रय की व्यवस्था है। यही वजह है कि आज यह गुरुद्वारा केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मानवता और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया है।

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सेवा ही सबसे बड़ा धर्म

आवाज द वॉयस से बातचीत में गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के संयुक्त राज्य सचिवमनिंदर सिंह खालसाने कहा कि गुरुद्वारे में हमेशा से लंगर चलता है। जरूरतमंद लोगों की सेवा करना ही सिख परंपरा का सबसे बड़ा संदेश है। उन्होंने बताया कि जैसे ही शिवसागर में बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई, गुरुद्वारे के दरवाजे सभी प्रभावित लोगों के लिए खोल दिए गए।

उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के घर पूरी तरह पानी में डूब गए हैं, उन्हें गुरुद्वारे में सुरक्षित ठहराया गया है। करीब 200 परिवार यहां रह रहे हैं। सभी के लिए दिन में तीन बार भोजन तैयार किया जाता है। भोजन की गुणवत्ता और साफ सफाई का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है ताकि किसी को कोई परेशानी न हो।

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बिजली नहीं तो जनरेटर का इंतजाम

बाढ़ के कारण शिवसागर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। ऐसे में गुरुद्वारा प्रबंधन ने जनरेटर की व्यवस्था की है ताकि यहां रह रहे लोगों को अंधेरे में रात न बितानी पड़े। मोबाइल फोन चार्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। गर्मी और उमस से राहत देने के लिए पंखों की व्यवस्था की गई है, जिससे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग आराम से सो सकें।

मनिंदर सिंह खालसा ने बताया कि गुरुद्वारे के स्वयंसेवक दिन रात रसोई में काम कर रहे हैं। लगातार भोजन बनाया जा रहा है ताकि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। उन्होंने कहा कि सेवा का यह कार्य तब तक जारी रहेगा, जब तक लोगों को इसकी जरूरत रहेगी।

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सिख समुदाय की छोटी आबादी ने दिया बड़ा संदेश

शिवसागर शहर में सिख परिवारों की संख्या बहुत कम है। यहां केवल लगभग 50 सिख परिवार रहते हैं। यही परिवार मिलकर गुरुद्वारे का संचालन करते हैं। सीमित संसाधनों और छोटी आबादी के बावजूद उन्होंने हजारों लोगों के लिए राहत अभियान शुरू किया। यह पहल बताती है कि सेवा का मूल्य संख्या से नहीं, बल्कि भावना से तय होता है।

गुरुद्वारे की इस पहल ने आसपास के समाज को भी प्रेरित किया है। मारवाड़ी समाज, कई सामाजिक संगठन और स्थानीय लोग राहत कार्य में सहयोग के लिए आगे आए हैं। कई लोग राशन, सब्जियां, दूध और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध करा रहे हैं ताकि राहत कार्य बिना रुके चलता रहे।

सरकार से डॉक्टर भेजने की अपील

गुरुद्वारे में बड़ी संख्या में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग रह रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इसे देखते हुए गुरुद्वारा प्रबंधन ने राज्य सरकार से दो डॉक्टर और एक मेडिकल टीम उपलब्ध कराने की अपील की है।

मनिंदर सिंह खालसा ने कहा कि यदि सरकार दो डॉक्टर और एक मेडिकल टीम भेज दे तो राहत शिविर में रह रहे लोगों की बेहतर देखभाल हो सकेगी। उन्होंने कहा कि दवाइयों की व्यवस्था गुरुद्वारा स्वयं कर लेगा। जरूरत केवल चिकित्सा सेवाओं की है ताकि किसी भी बीमारी को समय रहते रोका जा सके।

असम में बाढ़ की भयावह तस्वीर

सरकारी आंकड़ों के अनुसार असम के 25 जिलों के 18 हजार से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। करीब 7.21 लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में हैं। अब तक 47 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हुई है। लगभग 70 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हजारों मवेशी भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गए हैं।

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि वास्तविक स्थिति सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर है। कई लोगों का दावा है कि मृतकों और लापता लोगों की संख्या सौ से भी अधिक हो सकती है। दूरदराज के इलाकों में अब भी कई गांव ऐसे हैं, जहां राहत और बचाव दल समय पर नहीं पहुंच पाए हैं।

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राहत हर जरूरतमंद तक नहीं पहुंची

राज्य सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज किया है। राष्ट्रीय और राज्य आपदा राहत दल कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं। इसके बावजूद अनेक गांव अब भी पानी से घिरे हुए हैं। सड़कें टूट चुकी हैं। कई जगह नाव ही एकमात्र सहारा है। ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को अभी भी राहत सामग्री का इंतजार है।

शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने आरोप लगाया है कि जिले के बिहूबर क्षेत्र में करीब 100 लोग बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। हालांकि सरकारी रिकॉर्ड में इस घटना का कोई उल्लेख नहीं है। इस दावे के बाद बाढ़ में मौतों के वास्तविक आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

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मुख्यमंत्री कर रहे हैं लगातार निगरानी

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई दिनों से पूर्वी असम में मौजूद हैं। वह लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं। राहत शिविरों में जाकर लोगों से मिल रहे हैं और उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। सरकार ने राहत कार्यों की निगरानी के लिए चार मंत्रियों को अलग अलग जिलों की जिम्मेदारी भी सौंपी है।

मंत्री सुशांत बोरगोहैन, केशव महंत और बिमल बोरा शिवसागर और चराइदेव जिलों में राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। वहीं जोरहाट जिले में वरिष्ठ मंत्री अजंता नियोग राहत अभियान का नेतृत्व कर रही हैं।

इंसानियत की सबसे बड़ी पहचान

प्राकृतिक आपदाएं अक्सर यह याद दिलाती हैं कि संकट की घड़ी में इंसानियत सबसे बड़ी ताकत होती है। शिवसागर गुरुद्वारा साहिब ने यही संदेश पूरे देश को दिया है। सीमित संसाधनों के बावजूद जिस तरह हजारों बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, आश्रय और सम्मान की व्यवस्था की गई, वह सामाजिक सद्भाव और मानवीय सेवा की प्रेरक मिसाल है।

आज जब असम के लाखों लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं, तब यह गुरुद्वारा केवल राहत केंद्र नहीं, बल्कि उम्मीद का प्रतीक बन चुका है। यहां धर्म नहीं, इंसान देखा जाता है। यही भावना भारत की साझा संस्कृति और सामाजिक एकता की सबसे बड़ी पहचान है।



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