मलिक असगर हाशमी
भारत में नीट परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन भले ही अब समाप्ति की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन इस आंदोलन की गूंज सीमा पार पाकिस्तान तक सुनाई दी। भारत के शिक्षा तंत्र पर उठे इस सवाल का भविष्य में क्या प्रभाव पड़ेगा या कॉकरोच जनता पार्टी भारतीय राजनीति में क्या जगह बनाएगी, यह तो वक्त तय करेगा। हालांकि, इस आंदोलन ने अनजाने में ही सही, पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति, उसकी लाचार शिक्षा व्यवस्था और वहां की सेना की तानाशाही की पोल खोलकर रख दी है। पाकिस्तान के युवाओं और अभिभावकों ने भारत के जेन जी प्रदर्शनकारियों की तुलना अपने देश के हालातों से करते हुए खुलकर अपनी राय रखी।
मुख्यधारा की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि खुफिया एजेंसियों को करीब साढ़े चार सौ पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स पर संदेह था। कहा गया कि ये अकाउंट्स भारतीय युवाओं को भड़काने के लिए सामग्री साझा कर रहे थे।
कुछ समाचार चैनलों पर जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को भोजन और विदेशी फंडिंग मिलने के दावे भी दिखाए गए। इन रिपोर्ट्स में विदेशी टूलकिट का जिक्र भी हुआ। हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने ऐसी किसी भी आधिकारिक जानकारी से इनकार किया है। इसके बावजूद देश की जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच में जुटी होंगी।
जंतर मंतर प्रोटेस्ट को लेकर मिडिल ईस्ट देशों के हैंडल से फ़ेक नैरेटिव फैलाने और विदेशों से जंतर मंतर के लिए ऑनलाइन खाना आर्डर किए जाने के सवाल पर विदेश मंत्रालय का जवाब
— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) July 24, 2026
“हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यहां तक कह दिया कि “मिडिल ईस्ट के देशों में… https://t.co/lR6fDw2hX7 pic.twitter.com/JPCiW7NFYc
इसी संदर्भ में जब इस लेखक ने पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स का विश्लेषण किया, तो वहां एक बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाई दी। पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर्स भारतीय आंदोलन को भड़काने के बजाय अपने ही देश के हालात और बदहाल शिक्षा व्यवस्था को कोसते नजर आए।
पाकिस्तान के जाने-माने चैनल 'समा टीवी' पर वरिष्ठ विश्लेषक हसन निसार ने तालीमी निजाम के मामले में अपने देश की नीतियों और कट्टरपंथी सोच को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सदियों से फतवे जारी करके शिक्षा और आधुनिक सोच को उभरने ही नहीं दिया गया। तुर्की में प्रिंटिंग प्रेस लगाने से लेकर मेडिकल कॉलेजों की पढ़ाई तक के खिलाफ इतिहास में फतवे जारी किए गए, जिससे पूरा समाज पिछड़ता चला गया।
पाकिस्तान के एक युवा इफ्ती खान ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में भारतीय पुलिस प्रशासन और भारत के प्रदर्शनकारी युवाओं की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के चार सैन्य जनरलों ने वहां के छात्रों का आत्मसम्मान और आत्मविश्वास पूरी तरह छीन लिया है।
पाकिस्तान में छात्र अपनी जायज मांगों को उठाने से भी डरते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि काली वर्दी वाले सुरक्षाकर्मी उन्हें गायब न कर दें। बलूचिस्तान में ऐसे हजारों मामले दर्ज हैं जहां आवाज उठाने वाले युवाओं का कोई सुराग नहीं मिला।
जंतर मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान जब छात्रों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस ने बल प्रयोग किया था, जिसमें कई छात्र घायल हो गए थे। इसके बाद जनता में उपजे भारी गुस्से को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बेहद संयम बरता। बाद में सीजेपी और केंद्र सरकार के बीच बातचीत हुई, जिसमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ-साथ प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई भी मुकदमा दर्ज न करने का लिखित भरोसा दिया गया।
इस पूरी घटना पर टिप्पणी करते हुए पाकिस्तानी यूजर इफ्ती खान ने लिखा कि भारत की पुलिस और वहां के बच्चे दोनों समझते हैं कि यह उनका अपना देश है। प्रदर्शन के दौरान भारतीय छात्रों के हाथों में तिरंगा था। पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग जरूर किया, लेकिन उन्होंने बच्चों पर गोलियां नहीं चलाईं क्योंकि वे अपने ही देश के नागरिक हैं। पाकिस्तान में ऐसा संभव नहीं है। वहां सेना ने छात्रों से विरोध जताने का अधिकार तक छीन लिया है और छात्र संघों के चुनाव बरसों से बंद हैं।
एक अन्य पाकिस्तानी सोशल मीडिया यूजर अलीना फारूक शेख ने लिखा कि भारत में प्रदर्शन के दौरान युवाओं में एक खास तरह का अनुशासन देखने को मिला। भारतीय छात्र अपने भविष्य और अपने सिद्धांतों के लिए लड़े। उन्होंने किसी राजनीतिक दल का झंडा नहीं थामा। इसके उलट पाकिस्तान में युवा अलग-अलग राजनीतिक धड़ों में बंटे हुए हैं। वे अपने नेताओं की सियासत चमकाने के लिए झंडे उठाते हैं, लेकिन कभी अपनी पढ़ाई और रोजगार के हक के लिए आवाज नहीं उठाते।
भारतीय मीडिया में आंदोलन को पाकिस्तान से फंडिंग मिलने और फूड डिलीवरी ऐप्स के जरिए विदेश से खाना स्पॉन्सर होने के जो दावे चल रहे थे, उनका खुद पाकिस्तानी युवाओं ने मजाक उड़ाया। अलिफ से इसाद नाम के एक पाकिस्तानी हैंडल ने अपने देश की बदहाल अर्थव्यवस्था पर तंज कसते हुए लिखा कि पाकिस्तान के खुद के लाले पड़े हुए हैं। देश में कंगाली का यह आलम है कि पैसों के लिए लोग अपनों को धोखा दे रहे हैं। मरियामाराना नाम की एक अन्य पाकिस्तानी युवती ने भी अपने देश की आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए फंडिंग के दावों को हास्यास्पद करार दिया।
एक अन्य पाकिस्तानी युवा ने अपने देश के पाठ्यक्रम पर नाराजगी जताई। उसने कहा कि पाकिस्तान में सिर्फ 1947 के बाद का एकांगी इतिहास पढ़ाया जाता है, जबकि अखंड भारत के साझा इतिहास को छिपा दिया जाता है। भारतीय युवाओं के आंदोलन को देखकर उसे शहीद भगत सिंह के बारे में जानने की उत्सुकता हुई। जब उसने पाकिस्तान में भगत सिंह पर किताबें ढूंढने की कोशिश की, तो उसे एक भी किताब नहीं मिली।
उस युवा ने भारतीय छात्रों की इस बात के लिए भी प्रशंसा की कि वे पूरे आंदोलन के दौरान अपने सीने पर राष्ट्रध्वज चिपकाए रहे। उसने कहा कि भारतीय अर्धसैनिक बलों ने भी छात्रों की देशभक्ति का सम्मान किया। जब भी छात्र राष्ट्रगान गाने लगते थे, तो सुरक्षाबल शांत होकर उनके सामने खड़े हो जाते थे। यह सम्मान और यह लोकतांत्रिक अधिकार ही भारत को अपने पड़ोसी देशों से अलग और मजबूत बनाता है।