आवाज द वाॅयस/नई दिल्ली
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के मुकाबले शुरू होने में अभी समय है लेकिन टूर्नामेंट की आधिकारिक फुटबॉल ने एक बेहद अनोखा सफर तय कर लिया है। एडिडास कंपनी द्वारा तैयार की गई इस खास फुटबॉल को परीक्षण के लिए अंतरिक्ष में भेजा गया था। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी आईएसएस पर मौजूद वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों ने शून्य गुरुत्वाकर्षण में इस फुटबॉल के साथ कई अहम प्रयोग किए हैं। इस अनोखे टेस्ट का मकसद यह समझना था कि हवा के बिना और माइक्रोगेविटी में एक फुटबॉल किस तरह गति करती है और उसका संतुलन कैसे काम करता है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस प्रयोग की कुछ खास तस्वीरें भी जारी की हैं। नासा ने बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों ने साल 2019 में किए गए एक पुराने अध्ययन को दोबारा दोहराया है। इस प्रयोग से यह साफ हुआ कि फुटबॉल के आंतरिक संतुलन और उसके द्रव्यमान केंद्र में थोड़ा सा भी बदलाव होने पर हवा में उसकी दिशा और गति पूरी तरह बदल जाती है।
The official FIFA World Cup ball went to space!
— NASA (@NASA) June 20, 2026
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क्या है ट्रियोंडा नाम का असली मतलब
नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार खेल इंजीनियर किसी भी मैच बॉल के संतुलन को बहुत बारीकी से ठीक करते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि मैदान पर खिलाड़ियों के शॉट मारने के बाद गेंद हवा में पूरी तरह स्थिर और सटीक दिशा में आगे बढ़े। नासा का मानना है कि अंतरिक्ष से मिले आंकड़ों की मदद से फुटबॉल के भीतर इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीकों को और बेहतर बनाया जा सकेगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने खुशी जताते हुए कहा कि अंतरिक्ष स्टेशन पर होने वाले ऐसे वैज्ञानिक प्रयोगों का एक मुख्य उद्देश्य पृथ्वी पर इंसानी खेल और जीवन को और बेहतर बनाना भी है।
फुटबॉल की शासी निकाय फीफा के मुताबिक इस बार की आधिकारिक गेंद का नाम ट्रियोंडा रखा गया है। यह एक स्पेनिश वाक्यांश से लिया गया शब्द है जिसका सीधा अर्थ तीन तरंगें होता है। यह नाम इसलिए चुना गया क्योंकि फुटबॉल इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब वर्ल्ड कप का आयोजन तीन देश मिलकर कर रहे हैं। इस महाकुंभ की संयुक्त मेजबानी अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के हाथों में है।
डिजाइन में छिपी है तीनों देशों की पहचान
इस फुटबॉल के बाहरी लुक को बेहद आकर्षक और अर्थपूर्ण बनाया गया है। इसमें मुख्य रूप से लाल, हरे और नीले रंगों का इस्तेमाल किया गया है। ये तीनों रंग मेजबान देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अलावा गेंद के ऊपर तीनों देशों से जुड़े खास राष्ट्रीय प्रतीकों को भी उकेरा गया है। इसमें कनाडा की पहचान माना जाने वाला मेपल का पत्ता, मैक्सिको का राष्ट्रीय प्रतीक बाज और अमेरिका की पहचान बताने वाला सितारा शामिल है।
तकनीकी तौर पर भी एडिडास ने इस गेंद को अब तक का सबसे एडवांस मॉडल बताया है। ट्रियोंडा के बाहरी हिस्से पर गहरे सीम यानी टांके लगाए गए हैं जो तेज शॉट खेलने पर हवा में गेंद को डगमगाने से बचाते हैं। इसके अलावा इसकी बाहरी सतह को एक खास टेक्सचर दिया गया है। इसकी वजह से गीले मैदान या बारिश के मौसम में भी खिलाड़ी आसानी से गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रख सकते हैं।
गेंद के अंदर फिट है स्मार्ट चिप
इस वर्ल्ड कप बॉल की सबसे बड़ी खासियत इसके भीतर छिपी आधुनिक तकनीक है। ट्रियोंडा फुटबॉल के केंद्र में एक बेहद ताकतवर 500 हर्ट्ज का मोशन सेंसर लगाया गया है। यह सेंसर मैच के दौरान हर सेकंड में 500 बार गेंद की सटीक लोकेशन और गति का डेटा वीडियो असिस्टेंट रेफरी यानी वीएआर सिस्टम को भेजेगा।
मैदान पर होने वाले मैचों के दौरान यह तकनीक रेफरी और लाइन अंपायरों के लिए बहुत मददगार साबित होगी। इसकी मदद से ऑफसाइड के कठिन फैसलों, गोल लाइन विवादों और फुटबॉल से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पलों का बिल्कुल सटीक और निष्पक्ष फैसला कुछ ही सेकंड के भीतर लिया जा सकेगा। अंतरिक्ष में इस गेंद का सफल परीक्षण होने के बाद अब पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रेमी इसे मैदान पर देखने के लिए उत्सुक हैं।
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