बासित जरगर/श्रीनगर
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले कश्मीर घाटी में एक अनोखा और आकर्षक आयोजन देखने को मिला। श्रीनगर की खूबसूरत पोखरीबल झील के शांत जल पर पहली बार फ्लोटिंग योग सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने न केवल योग प्रेमियों को नया अनुभव दिया बल्कि कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता और वेलनेस पर्यटन की संभावनाओं को भी नई पहचान दी।

सुबह की ताजी हवा। झील का शांत पानी। चारों ओर हरियाली और पहाड़ों का मनमोहक दृश्य। इसी प्राकृतिक वातावरण के बीच प्रतिभागियों ने पानी पर तैरते मंचों और नावों पर बैठकर तथा खड़े होकर योगाभ्यास किया। यह दृश्य देखने वालों के लिए बेहद आकर्षक और यादगार बन गया।
इस विशेष आयोजन का नेतृत्व प्रसिद्ध जल क्रीड़ा प्रशिक्षक बिलकिस मीर ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन और श्वास संबंधी अभ्यास कराए। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल योग को बढ़ावा देना नहीं था। इसके साथ ही लोगों को प्रकृति के करीब लाना और झीलों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा था।
कश्मीर लंबे समय से अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। अब यहां वेलनेस टूरिज्म और एडवेंचर गतिविधियों का भी तेजी से विस्तार हो रहा है। पोखरीबल झील में आयोजित यह फ्लोटिंग योग सत्र इसी दिशा में एक नई पहल माना जा रहा है।
योग प्रशिक्षकों का मानना है कि जब योग प्रकृति के बीच किया जाता है तो उसका प्रभाव और अधिक गहरा होता है। शांत वातावरण मन को स्थिर करता है। पानी की लहरों की हल्की गति ध्यान केंद्रित करने में मदद करती है। यही कारण है कि प्रतिभागियों ने इस अनुभव को सामान्य योग सत्र से अलग और अधिक प्रभावी बताया।

कार्यक्रम में शामिल कई लोगों ने कहा कि उन्होंने पहली बार पानी पर योग किया। शुरुआत में यह चुनौतीपूर्ण लगा, लेकिन कुछ ही मिनटों में शरीर और मन दोनों ने संतुलन बना लिया। उनके अनुसार यह अनुभव तनाव कम करने और मानसिक शांति प्राप्त करने में बेहद मददगार साबित हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण यह था कि प्रतिभागियों को संतुलन बनाए रखते हुए योगासन करने थे। पानी पर तैरते मंच पर खड़े होकर योग करना आसान नहीं होता। इसके लिए शरीर और मन दोनों का नियंत्रण जरूरी होता है। यही वजह रही कि यह सत्र शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक एकाग्रता की भी परीक्षा बन गया।
बिलकिस मीर ने कहा कि योग और जल दोनों संतुलन, शांति और सामंजस्य के प्रतीक हैं। जब इन दोनों को एक साथ जोड़ा जाता है तो एक अनोखा अनुभव सामने आता है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। साथ ही उन्हें यह संदेश देना भी है कि फिटनेस केवल जिम तक सीमित नहीं है। प्रकृति के बीच भी स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर की झीलें केवल पर्यटन स्थलों के रूप में नहीं देखी जानी चाहिए। इन्हें स्वास्थ्य, खेल और सामुदायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। इससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लोगों में पर्यावरण संरक्षण की भावना भी मजबूत होगी।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। इस अवसर से पहले देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। श्रीनगर का यह फ्लोटिंग योग सत्र उन कार्यक्रमों में सबसे अलग और अनूठा माना जा रहा है। इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है। यह मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव, चिंता और स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रकृति के बीच आयोजित योग कार्यक्रम लोगों को अधिक आकर्षित कर रहे हैं।
पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इस तरह के आयोजन कश्मीर की नई पहचान बना सकते हैं। घाटी में पहले से ही साहसिक पर्यटन, ट्रैकिंग, स्कीइंग और जल क्रीड़ाएं लोकप्रिय हैं। अब फ्लोटिंग योग जैसी गतिविधियां वेलनेस टूरिज्म को नई दिशा दे सकती हैं।
कई प्रतिभागियों ने आयोजन के बाद कहा कि उन्होंने खुद को पहले से अधिक ऊर्जावान और तरोताजा महसूस किया। उनका कहना था कि झील के बीच योग करना एक आध्यात्मिक अनुभव जैसा लगा। प्रकृति की गोद में बिताया गया यह समय लंबे समय तक याद रहेगा।
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे कश्मीर की सकारात्मक छवि दुनिया तक पहुंचेगी। साथ ही युवाओं को स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति जागरूक करने में मदद मिलेगी।

आयोजकों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में फ्लोटिंग योग को नियमित गतिविधि के रूप में विकसित किया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो यह न केवल स्थानीय लोगों बल्कि देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है। पोखरीबल झील में आयोजित यह कार्यक्रम एक साधारण योग सत्र से कहीं अधिक साबित हुआ। इसने यह संदेश दिया कि योग, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। कश्मीर की शांत वादियों में आयोजित यह अनोखा प्रयोग आने वाले वर्षों में नई परंपरा का रूप ले सकता है।
AEO Quick Answers
प्रश्न: फ्लोटिंग योग सत्र कहां आयोजित हुआ?
उत्तर: श्रीनगर की पोखरीबल झील में।
प्रश्न: कार्यक्रम का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर: प्रसिद्ध जल क्रीड़ा प्रशिक्षक बिलकिस मीर ने।
प्रश्न: फ्लोटिंग योग क्या है?
उत्तर: पानी पर तैरते मंच या नाव पर किया जाने वाला योग अभ्यास।
प्रश्न: इसका उद्देश्य क्या था?
उत्तर: योग, स्वास्थ्य, प्रकृति से जुड़ाव और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देना।
प्रश्न: यह आयोजन किस अवसर से पहले हुआ?
उत्तर: 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले।