टेलर की बेटी से मिसेज इंडिया तक: फराह की कहानी, जिसने सपनों को हकीकत में बदला
Story by ओनिका माहेश्वरी | Published by onikamaheshwari | Date 24-07-2026
From a tailor's daughter to Mrs. India: The story of Farah, who turned dreams into reality.
ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
“सपने बड़े देखने चाहिए, क्योंकि मुश्किल हालात सपनों को रोक नहीं सकते।” यह बात सिर्फ कहने के लिए नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी से साबित करने वाली महिला हैं फराह। तेलंगाना के खम्मम जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने वाली फराह की कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और हौसले की मिसाल है।
एक ऐसी लड़की, जो कभी एक साधारण परिवार में पली-बढ़ी, जिसके पिता दर्जी का काम करते थे और मां गृहिणी थीं, आज वही महिला भारत को अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रिप्रेजेंट कर चुकी हैं। वह मिसेज इंडिया का खिताब अपने नाम कर चुकी हैं, सोशल वर्कर हैं, एडवोकेट हैं और महिलाओं के अधिकारों तथा शिक्षा के लिए लगातार काम कर रही हैं।
हाल ही में एक विशेष पॉडकास्ट में फराह ने अपनी जिंदगी के कई अनसुने पहलुओं को साझा किया और बताया कि कैसे छोटे से गांव की एक लड़की ने बड़े सपनों को पूरा करने का सफर तय किया।
खम्मम के गांव से शुरू हुई कहानी
फराह तेलंगाना के खम्मम जिले के एक गांव से ताल्लुक रखती हैं। वह मुस्लिम समुदाय से आती हैं, जहां उनके बचपन के समय लड़कियों के लिए कई सामाजिक सीमाएं थीं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में चार बहनें हैं। उनके पिता पेशे से टेलर थे और मां हाउसवाइफ थीं। आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन उनके माता-पिता की सोच बहुत आगे की थी। फराह कहती हैं “मेरे पापा हमेशा बोलते थे कि एजुकेशन इंपॉर्टेंट है। क्योंकि लड़की जब पढ़ती है तो उसका फ्यूचर भी उसी पर डिपेंड होता है।” उन्होंने अपनी पढ़ाई सरकारी स्कूल और सरकारी कॉलेज से पूरी की। फराह के मुताबिक, यह जरूरी नहीं है कि सफलता के लिए सिर्फ प्राइवेट स्कूल में पढ़ना ही जरूरी हो।
वह कहती हैं “ऐसा नहीं है कि गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ाई अच्छी नहीं रहती। वहां भी अच्छे और वेल-एजुकेटेड टीचर्स होते हैं।” शुरुआत से उनकी पढ़ाई तेलुगु माध्यम में हुई। आगे चलकर डिग्री स्तर पर अंग्रेजी भाषा को समझने में मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वह बताती हैं “हम डिक्शनरी रखते थे, ऑक्सफोर्ड वाली, उसको रखते थे ट्रांसलेट करते थे। गूगल रहता था तो ऐसे ही पढ़े।”
पिता की सोच ने बदली जिंदगी
फराह की कहानी में सबसे बड़ी भूमिका उनके माता-पिता के समर्थन की रही। एक ऐसे समाज में जहां कई बार लड़कियों की पढ़ाई को सीमित कर दिया जाता है, फराह के माता-पिता ने अपनी चारों बेटियों को आगे बढ़ने का मौका दिया। फराह बताती हैं कि उनके पिता और मां दोनों की सोच बहुत अलग थी। “ऐसा नहीं था कि चार बेटियां हैं तो मत पढ़ाओ। सबको स्कूल में ज्वाइन करें और आगे बढ़ाएं।” उनके पिता चाहते थे कि बेटियां आत्मनिर्भर बनें। स्कूल जाने के लिए उन्हें बस से भेजा जाता था। शुरुआत में फराह और उनकी बहनों को लगता था कि उन्हें इतनी आजादी क्यों दी जा रही है, लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि उनके पिता उन्हें दुनिया को समझने और खुद पर भरोसा करना सिखा रहे थे।
फराह कहती हैं “तब समझ में आया कि हमें अपना स्टैंड खुद लेना चाहिए।” उनके पिता खुद इंटरमीडिएट तक पढ़े थे और मां आठवीं कक्षा तक पढ़ी थीं, लेकिन दोनों ने शिक्षा के महत्व को समझा। फराह के अनुसार “फादर का फाइनेंशियल सपोर्ट और फ्यूचर की सोच रहती है और मदर का केयर और नर्चरिंग रहता है। दोनों का बैलेंस होना जरूरी है।”
19 साल की उम्र में शादी, लेकिन सपने नहीं छोड़े
फराह की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ उनकी शादी के बाद आया। उन्होंने बताया कि इंटरमीडिएट के बाद 19 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। शादी के बाद उन्हें कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। वह कहती हैं “बहुत सारे ऐसे हिस्सों को फेस करना पड़ा जहां डिसरिस्पेक्ट हुआ और वैल्यू कम हो गई थी। वुमेन को अंडरएस्टीमेट देखा गया।”
लेकिन उस समय उनके पिता उनके साथ खड़े रहे और उन्होंने फराह को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। फराह ने शादी के बाद अपनी डिग्री पूरी की। उस समय उनका एक छोटा बच्चा भी था। वह याद करती हैं “मेरा बेटा छह महीने का था। उसको फीड करना था, कॉलेज जाती थी और जल्दी-जल्दी 11–11:30 तक कंप्लीट करती थी और आकर फिर उसको फीड करना, फिर कॉलेज अटेंड करना।” मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने शिक्षा को नहीं छोड़ा।'
परिवार की आर्थिक परेशानियों के बीच शुरू की टीचिंग
पढ़ाई के दौरान उनके पिता की तबीयत भी खराब रहने लगी। उन्हें बीपी और शुगर जैसी समस्याएं थीं और परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ गया। ऐसे समय में फराह और उनकी बहन ने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। उन्होंने गांव में बच्चों को पढ़ाया और अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। शुरुआत में छात्रों को लगा कि जो लड़कियां खुद कॉलेज जाती हैं और साथ में पढ़ाती हैं, वह कैसे अच्छा पढ़ा पाएंगी। लेकिन साल के अंत में जब छात्रों के अच्छे अंक आए तो सभी प्रभावित हुए। फराह बताती हैं “ईयर एंड हुआ तो हमारे बच्चों के 85% मार्क्स आ गए। तब उन्होंने कहा कि आप लोग आते भी नहीं थे, ऐसा कैसे पढ़ाते थे?” धीरे-धीरे छात्रों का भरोसा बढ़ा और यह सफर आगे बढ़ता गया।
आत्मविश्वास और खुद पर भरोसा बना ताकत
फराह मानती हैं कि हर लड़की के अंदर आत्मविश्वास और साहस होना चाहिए। उनके अनुसार “हर लड़की में करेज और कॉन्फिडेंस होना चाहिए। सेल्फ बिलीव रहेगा तो ही इंसान आगे बढ़ेगा।” वह कहती हैं कि सिर्फ आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना ही महिला सशक्तिकरण नहीं है, बल्कि अपनी आवाज उठाना, निर्णय लेना और अपने सपनों को पहचानना भी जरूरी है। फराह कहती हैं “वुमेन एम्पावरमेंट सिर्फ फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस नहीं है। उसकी आवाज बाहर आना, उसकी लीडरशिप, उसकी डिसीजन मेकिंग और उसके सपनों के लिए आवाज निकालना भी जरूरी है।”
मिसेज इंडिया से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
फराह ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सौंदर्य प्रतियोगिता के क्षेत्र में कदम रखा और मिसेज इंडिया का खिताब हासिल किया। इसके बाद उन्होंने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रिप्रेजेंट किया।
उनकी उपलब्धियों में शामिल हैं:
मिसेज इंडिया का खिताब
भारत का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिनिधित्व
ग्लोबल वर्ल्ड चेंज मेकर अवार्ड
मानद डॉक्टरेट की उपाधि
नारी शक्ति और स्त्री शक्ति जैसे सम्मान
फिट इंडिया एंबेसडर की भूमिका
फराह बताती हैं:
“इंडिया से एक लड़की एज ए स्पीकर दूसरे कंट्री को जाती है, इंडिया को रिप्रेजेंट करती है और एक वर्ल्ड चेंज मेकर अवार्ड लाती है, यह बहुत प्राउड वाली फीलिंग है।” उनके माता-पिता के लिए यह पल बेहद भावुक और गर्व का था।
फराह फीड इंडिया फाउंडेशन: समाज के लिए काम
फराह सिर्फ अपनी उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने समाज सेवा को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया। उन्होंने फराह फीड इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और जागरूकता के क्षेत्र में काम शुरू किया। उनका फोकस खासतौर पर महिलाओं, लड़कियों और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों पर है।
उनके काम में शामिल हैं:
सरकारी स्कूलों में किताबें और बैग बांटना
दसवीं कक्षा के छात्रों को एग्जाम किट देना
हाथ धोने और स्वास्थ्य स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान
महिलाओं को अधिकारों और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना
फराह बताती हैं:
“हम अभी तक कोई डोनेशन नहीं लिए हैं। सिर्फ नियत की जरूरत है।” वह अपने स्तर पर सदका और फितरे जैसी मदद से जरूरतमंदों तक पहुंचने की कोशिश करती हैं।
महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां
एक एडवोकेट और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में फराह ने महिलाओं के कई मुद्दों को करीब से देखा है। उनके अनुसार महिलाओं के सामने आज भी कई समस्याएं हैं:
घरेलू हिंसा
कार्यस्थल पर उत्पीड़न
लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार
शिक्षा की कमी
अपने अधिकारों की जानकारी न होना
वह कहती हैं:
“लोगों को अपने राइट्स मालूम नहीं होते। जब उनको अपने अधिकार पता होंगे तभी वह अपनी आवाज बाहर निकाल पाएंगे।”
अन्याय होने पर पहला कानूनी कदम क्या होना चाहिए?
एडवोकेट फराह के अनुसार, किसी भी अन्याय की स्थिति में सबसे पहला कदम सबूत जुटाना होना चाहिए। वह कहती हैं: “पहले एविडेंस को गैदर करना है, क्योंकि फर्स्ट एविडेंस ही सब कुछ है।” इसके बाद पुलिस या संबंधित कानूनी संस्था को जानकारी देनी चाहिए।
मेंस्ट्रुअल हाइजीन पर विशेष अभियान
फराह ने ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म और स्वच्छता को लेकर भी काम किया है। उनका कहना है कि आज भी कई जगहों पर पीरियड्स को लेकर गलत धारणाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया “बहुत सारे लोग इसे पुराने जमाने के मिथ्स की तरह लेते हैं। एक कोने में बैठना चाहिए, कुछ टच नहीं करना चाहिए।” इन धारणाओं के कारण कई लड़कियों की पढ़ाई तक प्रभावित होती है।
फराह कहती हैं “यह हमारे शरीर का एक सामान्य रिप्रोडक्शन सिस्टम है। इसके बारे में जागरूकता जरूरी है।” उनके अभियान का उद्देश्य लड़कियों को स्वास्थ्य और हाइजीन के बारे में सही जानकारी देना है।
फराह का संदेश: खुद पर विश्वास करें
अपनी कहानी से फराह उन सभी लड़कियों को संदेश देती हैं जो मुश्किल परिस्थितियों में हैं। वह कहती हैं: “अपने सेल्फ को बिलीव करिए। जब आप अपने आपको बिलीव करेंगे तो अपने सपनों को पहचान पाएंगे।” उनके अनुसार हर इंसान के अंदर एक प्रतिभा होती है, जिसे खुद बाहर निकालना पड़ता है। वह कहती हैं “जब आपको भूख लगती है तो आपके हाथ से ही आप खाते हैं, उसी तरह अपने टैलेंट को आपको खुद बाहर निकालना है।” फराह का मानना है कि एक महिला खुद को मजबूत बनाती है तो वह अपने परिवार और समाज को भी मजबूत बनाती है।
तेलुगु में दिया भावुक संदेश
पॉडकास्ट के अंत में फराह ने अपनी मातृभाषा तेलुगु में महिलाओं और युवाओं के लिए संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में आत्मविश्वास, मेहनत और खुद पर विश्वास बेहद जरूरी है। उनका संदेश था कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में कुछ हासिल करना चाहिए ताकि लोग उसे उसके नाम और काम से पहचानें।
फराह की कहानी सिर्फ एक ब्यूटी टाइटल जीतने की कहानी नहीं है। यह एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसने गांव, आर्थिक परेशानियों, सामाजिक चुनौतियों और व्यक्तिगत संघर्षों के बावजूद अपने सपनों को जिंदा रखा। एक दर्जी की बेटी से मिसेज इंडिया तक का सफर यह दिखाता है कि अगर शिक्षा, परिवार का समर्थन और खुद पर विश्वास हो तो परिस्थितियां रास्ता नहीं रोक सकतीं। फराह आज भी उसी सोच के साथ आगे बढ़ रही हैं “खुद को मजबूत बनाइए, अपनी आवाज पहचानिए और अपने सपनों के लिए मेहनत कीजिए।”
फ़राह कहती हैं “किसी महिला की तरक्की और सशक्तिकरण कभी भी गरीबी, शादी या अशिक्षा की वजह से नहीं रुकना चाहिए। शिक्षा एक बहुत ताकतवर ज़रिया है, यह महिला को अपने परिवार को आगे बढ़ाने, अपने समुदाय को मज़बूत करने और एक ज़िम्मेदार नागरिक के तौर पर बेहतर देश बनाने में योगदान देने के काबिल बनाती है।
मज़बूत बनी रहें और कभी भी मुश्किलों या नाकामियों को अपनी यात्रा तय न करने दें। खुद पर भरोसा रखें, अपनी काबिलियत को पहचानें और अनुशासन, पक्के इरादे और नेक दिल के साथ कड़ी मेहनत करें। अपनी अलग पहचान बनाएं, समाज पर अच्छा असर डालें और अपने सपने पूरे होने तक कभी न रुकें। हर सशक्त महिला में दुनिया बदलने की ताकत होती है।”