हरजिंदर
जब दुनिया में जंग की आग धधक रही हो तो धार्मिक नेताओं को कैसा बर्ताव करना चाहिए? यह ऐसा सवाल है जिसका कोई सीधा जवाब नहीं हो सकता। लेकिन कैथोलिक समुदाय के सबसे बड़े धार्मिक नेता पोप लियो ने इसकी एक मिसाल जरूर पेश कर दी है।जब से डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी फौज से ईरान पर हमला किया है वे हर किसी से यह उम्मीद कर रहे हैं कि वह उनका समर्थन करे। यही उम्मीद उन्होंने पोप लियो से भी की थी।
वर्तमान पोप से उनकी उम्मीद के कारण भी स्पष्ट थे। एक तो युद्ध के लिए अमेरिका में ही ट्रंप का काफी विरोध हो रहा है। अमेरिका में कैथोलिक समुदाय के लोगों की संख्या काफी ज्यादा है और यह माना जा रहा था कि अगर पोप ट्रंप के समर्थन में बयान दे देते हैं तो यह विरोध कुछ हद तक शांत हो सकता है।
इस लड़ाई मंें यूरोपीय देश अभी तक अमेरिका का साथ नहीं दे रहे और ट्रंप को उम्मीद थी कि अगर पोप लियो उनके समर्थन में कुछ बोल देते हैं तो इससे यूरोपीय देशों पर भी अपनी रणनीति बदलने के लिए दबाव बनेगा।तीसरा कारण यह है कि पोप लियो कैथोलिक इतिहास के पहले ऐसे पोप हैं जो अमेरिका में पैदा हुए थे। उनसे उम्मीद बांधने का सबसे बड़ा कारण यही था। इसी को देखते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में रहने वाले उनके भाई को भी अपने साथ लेने की कोशिश की।

पर बात बनी नहीं। पोप लियों ने युद्ध को लेकर पहले तो कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया और बाद में शांति स्थापित करने की अपील कर डाली।नाराज ट्रंप ने उन पर आरोपों की झड़ी लगा दी। यहां तक कहा कि पोप ईरान के परमाणु बम रखने का समर्थन करते हैं। हालांकि जल्द ही इस बात को गलत साबित भी कर दिया गया।
Best POP so far—humane, fair, and driven by real love for people, not bias or division. A reminder that beyond religion, we’re human first.
— 𝗦𝗶𝗿. 𝗘𝗻𝗴𝗿. 𝗔.𝗬🇵🇸💔 (@A_Y_Rafindadi) April 17, 2026
If Muslims and Christians truly saw each other as brothers, so much would change. pic.twitter.com/mylNoUy964
पिछले हफ्ते जब यह विवाद चल रहा था पोप अफ्रीका के दौरे पर थे। वहां इस पर सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा कि वे यहां लोगों से मिलने आए हैं, ट्रंप से बहस करने के लिए नहीं।वे यहीं नहीं रुके। पोप लियो जब कैमरून में थे तो उन्होंने वहां मुस्लिम समुदाय के नेताओं और प्रतिनिधियों का आमंत्रित किया। इस मुलाकात में उन्होंने अपील की कि सभी धर्मों के लोगों को मिलकर विश्व शांति के लिए कोशिश करनी चाहिए।
इसके बाद उन्होंने फिर एक बयान दिया और कहा कि ऐसे लोगों की निंदा की जानी चाहिए जो अपने सैनिक, आर्थिक और राजनीतिक हितों के कारण धर्म व भगवान का इस्तेमाल करते हैं, वे सबको अंधेरे और कीचड़ में धकेलते हैं।पोप फ्रांसिस के बाद पिछले साल मई मंें जब लियो को पोप का दर्जा दिया गया था तब से उनके बारे में यह बात लगातार कही जाती रही वे बहुत कम बोलते हैं। कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि वे बहुत बोरिंग हैं। इसलिए लोगों को उनका वर्तमान रवैया हैरान भी कर रहा है।

न्यूयाॅर्क टाईम्स की मोटको रिच ने तो इस बदलाव पर यहां तक लिखा कि ट्रंप ने विवाद पैदा कर एक शांत पोप को आवाज दे दी है।जो भी हो पोप लियो ने इसकी एक मिसाल तो पेश कर दी है कि जब इंसानियत पर संकट आए तो धार्मिक नेता को हवा में बह जाने या अपने स्वार्थ पर ध्यान देने के बजाए किस तरह से दुनिया के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए।
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
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