युवा पीढ़ी को समझना होगा कि आजादी हमें इतनी आसानी से नहीं मिली: एनएसए अजित डोभाल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 01-08-2026
The younger generation needs to understand that we did not get independence so easily: NSA Ajit Doval.
The younger generation needs to understand that we did not get independence so easily: NSA Ajit Doval.

 

आवाज द वाॅयस/पुुणे

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया है। पुणे में आयोजित एक विशेष समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें इस सम्मान से नवाजा। यह कार्यक्रम तिलक स्मारक ट्रस्ट द्वारा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस मौके पर अजित डोभाल ने देश के युवाओं से निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में काम करने की अपील की।

अजित डोभाल ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत के सामने प्रगति का एक बड़ा अवसर मौजूद है। देश के इतिहास में ऐसा समय बार-बार नहीं आता। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस मौके का पूरा फायदा उठाएं। युवाओं को छोटे-मोटे व्यक्तिगत फायदों को किनारे रखकर केवल देश के विकास और सुरक्षा के बारे में सोचना चाहिए।

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राष्ट्रीय सुरक्षा में ऐतिहासिक योगदान

अजित डोभाल भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। उन्होंने देश के कई बेहद संवेदनशील इलाकों में अपनी सेवाएं दी हैं। मिजोरम, पंजाब, सिक्किम और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में शांति और सुरक्षा कायम करने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही है।

इसके अलावा वे भारत और चीन के बीच सीमा वार्ता के लिए भारत के विशेष प्रतिनिधि भी रहे हैं। वर्ष 2017 के डोकलाम संकट के समय उन्होंने जिस तरह कूटनीतिक रास्ते से स्थिति को संभाला, उसकी सराहना पूरी दुनिया में हुई थी। भारतीय खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने और देश की सुरक्षा रणनीति को नया रूप देने में उनके योगदान को देखते हुए ही तिलक स्मारक ट्रस्ट ने उन्हें इस पुरस्कार के लिए चुना है।

पुणे के मंच से युवाओं को सीधा संदेश

अपने संबोधन में एनएसए अजित डोभाल ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि आजादी इतनी आसानी से नहीं मिली है। कई महान हस्तियों ने इसके लिए अपनी जान की बाजी लगाई थी। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग अपने अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन उन अधिकारों के पीछे छिपे त्याग को भूल जाते हैं।

डोभाल ने लोकमान्य तिलक के जीवन का एक भावुक प्रसंग साझा किया। जब पुणे में प्लेग की महामारी फैली थी, उस समय तिलक जी के 21 साल के बेटे का निधन हो गया था। इसके बावजूद वे शहर छोड़कर नहीं गए। वे लोगों की मदद के लिए वहीं डटे रहे। डोभाल ने कहा कि स्वतंत्रता केवल अपनी मनमर्जी करने का नाम नहीं है, बल्कि यह देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का माध्यम है।

इस अवसर पर बोलते हुए अमित शाह ने लोकमान्य तिलक और लोकशाहिर अन्नाभाऊ साठे के कार्यों को याद किया। उन्होंने अजित डोभालऔर लोकमान्य तिलक के बीच समानताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वे अजित डोभालको तब से जानते हैं जब वे गुजरात के गृह मंत्री थे और वे जन्म से ही देशभक्त हैं।

अपने 45 मिनट लंबे भाषण में शाह ने अजित डोभालके कार्यों की जमकर प्रशंसा की। शाह ने दो-तीन बार कहा, 'जिस प्रकार आप उन्हें पुरस्कार के लिए चुनकर प्रसन्न हैं, उसी प्रकार मैं अजित डोभालको यह पुरस्कार प्रदान करके प्रसन्न हूं।'

2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद, उन्होंने अजित डोभालको पहला राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया, जो उनके कार्यों के महत्व को दर्शाता है। अजित डोभालइस पद पर सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले सलाहकार हैं और शाह ने उनके 100 वर्ष के दीर्घायु होने की कामना की।

पुरस्कार स्वीकार करने के बाद, अजित डोभालने पुणेकर, तिलक मेमोरियल कमेटी और रोहित तिलक को धन्यवाद दिया। उन्होंने पुणे में बिताए अपने शुरुआती डेढ़ से दो वर्षों की यादें ताजा कीं। इसी दौरान उन्हें लोकमान्य तिलक के वास्तविक कार्यों का ज्ञान हुआ और उन्होंने कहा कि 76वर्षों के बाद यह पुरस्कार प्राप्त करना एक बड़ा संयोग है।

 उन्होंने युवाओं को याद दिलाया कि यदि वे अपने कर्तव्यों का दुरुपयोग करते हैं, तो जिन्होंने उन्हें ये अधिकार दिए हैं, उन्हें दुख होगा। देश प्रगति कर रहा है और हमारी प्रगति सभी को पसंद नहीं आएगी, इसलिए हमें सावधान रहना चाहिए। जिस प्रकार लोकमान्य तिलक ने कहा था कि स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, यदि आज की बात हो, तो मैं कहता कि एक विकसित और बेहतर भारत का निर्माण मेरा अधिकार है और मैं इसे पूरा करूंगा; आइए हम भी यही प्रतिज्ञा लें, अजित डोभालने अपील की। ​​

देश के हित में कार्य करते समय, व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (वीईटी) के मानदंड, यानी पहले महत्वपूर्ण, फिर आवश्यक और अंत में वांछित, लागू किए जाते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसमें देश के लिए जो महत्वपूर्ण है, उसे सबसे अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।

इस समारोह में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अजित डोभालके कार्यों की सराहना की। शिंदे ने कहा, 'जेम्स बॉन्ड की उपाधि अब पुरानी हो चुकी है और अजित डोभालएक ऐसे राष्ट्रीय नायक हैं जो इससे कहीं आगे हैं।' उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अजित डोभालके करियर की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में देश को रक्षात्मक आक्रमण के नए तंत्र और सिद्धांत मिले। सुप्रिया सुले ने भी उनके कार्यों की प्रशंसा की।

इस अवसर पर तिलक मेमोरियल ट्रस्ट के रोहित तिलक ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, 'कई लोगों को लग सकता है कि हमने यह निर्णय फिल्म धुरंधर के बाद लिया है, लेकिन अजित डोभालका काम बहुत बड़ा है और हम उन्हें लंबे समय से जानते हैं। उन्हें यह पुरस्कार देना हमारे लिए गर्व की बात है। लोकमान्य तिलक पुरस्कार के लिए यह एक बहुत ही उपयुक्त चयन है और हमें बेहद खुशी है कि उन्होंने इस पुरस्कार को स्वीकार किया है।'

 

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का योगदान

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और विचारक थे। उनका जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई ऊर्जा दी थी। उनका प्रसिद्ध नारा "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा" आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का जज्बा पैदा करता है।

तिलक जी ने लोगों में राष्ट्रवाद की भावना जगाने के लिए समाचार पत्रों का सहारा लिया। उन्होंने मराठी भाषा में 'केसरी' और अंग्रेजी में 'मराठा' नाम से अखबार निकाले। इन अखबारों के जरिए उन्होंने ब्रिटिश सरकार की नीतियों का विरोध किया और आम जनता को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

लोकमान्य तिलक पुरस्कार का इतिहास

तिलक स्मारक ट्रस्ट, पुणे ने वर्ष 1983 में इस पुरस्कार की शुरुआत की थी। इस पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य लोकमान्य तिलक के विचारों को जीवित रखना और समाज के लिए उत्कृष्ट काम करने वाले लोगों को सम्मानित करना है। यह सम्मान हर साल 1 अगस्त को तिलक जी की पुण्यतिथि पर दिया जाता है।

पुरस्कार के तहत सम्मानित व्यक्ति को एक प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और नकद राशि प्रदान की जाती है। यह पुरस्कार किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह राजनीति, समाज सेवा, विज्ञान, उद्योग, प्रशासन, शिक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण काम करने वाली हस्तियों को दिया जाता है।

अब तक इन दिग्गजों को मिल चुका है सम्मान

पिछले चार दशकों में देश की कई महान हस्तियों को लोकमान्य तिलक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

  • एस. एम. जोशी (1983 में पहले प्राप्तकर्ता)
  • पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
  • पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
  • वरिष्ठ राजनेता शरद पवार और सोनिया गांधी
  • प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ माशेलकर
  • सुपर कंप्यूटर 'परम' के जनक डॉ. विजय भटकर
  • इंफोसिस के सह-संस्थापक एन. आर. नारायण मूर्ति
  • 'मेट्रो मैन' के नाम से मशहूर ई. श्रीधरन
  • उद्योगपति साइरस पूनावाला
  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल (2026)

राष्ट्र निर्माण में पुरस्कार का महत्व

लोकमान्य तिलक पुरस्कार भारत के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक माना जाता है। यह सम्मान केवल किसी व्यक्ति की सफलता का जश्न नहीं मनाता, बल्कि राष्ट्र निर्माण में दिए गए उसके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है।

वर्ष 2026 में अजित डोभाल को यह पुरस्कार मिलना इस बात को साबित करता है कि देश की सुरक्षा और कूटनीतिक मजबूती भी राष्ट्र निर्माण का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज के दौर में जब भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है, तब लोकमान्य तिलक के विचार और अजित डोभाल जैसे रणनीतिकारों का नेतृत्व देश को एक नई दिशा दे रहा है।