जंग के बाद, कब सुधरेंगे हालात

Story by  हरजिंदर साहनी | Published by  [email protected] | Date 13-04-2026
After the war, when will the situation improve?
After the war, when will the situation improve?

 

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खाड़ी में चल रही जंग का दो हफ्ते का युद्धविराम काफी उम्मीद बंधाने वाला है। बेशक, आपसी दुराग्रह अभी खत्म नहीं हुए हैं और वे तनाव अभी अपनी जगह हैं जिन्हें लेकर यह जंब शुरू हुई थी। लेकिन फिर भी यह उम्मीद तो की जा सकती है कि अगर इस दौरान आपसी बातचीत के दौर कामयाब रहे तो यह युद्धविराम युद्ध के खत्म होने की ओर भी बढ़ सकता है।

अगर ऐसा हुआ, तो क्या यह माना जाए कि हालात फिर सामान्य होने लगेंगे? खासकर दुनिया के आर्थिक हालात।अभी खबर यह है कि 800 से ज्यादा मालवाहक जहाज फारस की खाड़ी में खड़े इंतजार कर रहे हैं कि कब हालात सामान्य हों और वे होर्मुज को पार करके अपनी मंजिल की ओर बढ़े।

ऐसा हुआ तो चीजें कुछ बेहतर होंगी। लेकिन सिर्फ इतने से ही हालात ठीक हो जाएंगे इसकी उम्मीद नहीं की जा सकती।पश्चिम एशिया की इस जंग के कारण दुनिया जिस ऊर्जा संकट से गुजर रही है, उससे इसमें थोड़ी राहत तो मिलेगी लेकिन शायद इतना ही काफी नहीं है।

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ऊर्जा संकट के कारण विश्व बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें काफी तेजी से उछली हैं। युद्धविराम के बाद से इसमें 15 फीसदी की कमीं भी आई है लेकिन कीमतें कब पहले के स्तर पर आ सकेंगी अभी नहीं कहा जा सकता।

इसकी एक वजह यह भी है कि युद्ध के दौरान पेट्रोलियम और गैस उत्पाद के कईं केंद्रों को काफी नुकसान पहंुचा है। जैसे कतर के गैस उत्पादन क्षेत्र रास लफान में, जहां से भारत बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस का आयात करता है। ऐसी जगहों पर उत्पादन सामान्य होने में काफी समय लग सकता है। कुछ आकलन में बताया गया है कि इसमें एक-दो साल या और ज्यादा समय भी लग सकता है।

कोई भी जंग अपने साथ एक और चीज लेकर आती है वह है महंगाई। बहुत से देशों के आम लोगों का भले ही जंग से कोई लेना-देना न हो लेकिन उन पर जंग का असर महंगाई के तौर पर पड़ता है।इसका एक दूसरा असर दुनिया के वित्तीय बाजारों में उबाल के तौर पर दिख रहा है।

 

पर असल सवाल यहां यह है कि अगर जंग वाकई खत्म हो जाती है तो दुनिया की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लौटने में कितना समय लगेगा?हर जंग अपने आप में अलग तरह की होती है और उसके असर का भूगोल भी अलग होता है। अगर हम रूस और यूक्रेन की जंग को लें जो कईं साल से लगातार चल ही रही है। इस जंग की वजह से अनाज और खाद्य तेलों की आपूर्ति पर थोड़ा असर जरूर पड़ लेकिन यह उतना बड़ा नहीं था कि इससे पूरी दुनिया ही किसी न किसी रूप में हिल जाती।

लेकिन खाड़ी के देश पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं इसलिए वहां चली जंग का असर ज्यादा व्यापक रहा है। इसलिए यह सवाल भी उठ रहा है कि हालात कितने समय में सामान्य होंगे।
व्यापक असर वाली लड़ाइयों का इतिहास अगर हम देखें तो माना जाता है कि पहले विश्वयुद्ध के बाद दुनिया के आर्थिक हालात सामान्य होने में सात से दस साल लग गए थे।

कुछ यूरोपीय देशों को तो युद्ध से पहले के उत्पादन स्तर पर पहंुचने में इससे भी ज्यादा समय लगा। जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों को अगले कुछ साल तक भारी महंगाई ने परेशान किया जिसे अर्थशास्त्र की भाषा में सुपर इन्फ्लेशन कहा जाता है। इसके कुछ बाद ही शेयर बाजारों को भारी मंदी का सामना भी करना पड़ा।

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इसी तरह दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दुनिया की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लौटाने में तीन से छह साल का समय लग गया था। यह अलग बात है कि इसके बाद तेज तरक्की का वह दौर शुरू हुआ जिसे ‘पूंजीवाद का स्वर्णकाल‘ कहा जाता है।

दोनों विश्वयुद्धों के बाद से अब तक समय काफी बदल चुका है और अच्छी बात है कि इस लड़ाई को एक हद के बाद रोकने की कोशिशें भी शुरू हो गईं थीं। लेकिन फिर भी दुनिया के आर्थिक हालात केा पटरी पर लौटने में एक लंबा समय तो लगेगा ही। 

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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