नई दिल्ली
फल हमारी रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा हैं। इनमें फाइबर, विटामिन, खनिज और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग नियमित रूप से फल खाना पसंद करते हैं। कोई सुबह नाश्ते में फल खाता है तो कोई दोपहर या रात के खाने के बाद।
लेकिन अक्सर सवाल उठता है कि फल खाने का सबसे अच्छा समय आखिर कौन सा है? क्या इन्हें खाली पेट खाना चाहिए या भोजन के बाद? क्या सही समय पर फल खाने से शरीर को ज्यादा फायदा मिलता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, स्वस्थ लोगों के लिए फल खाने का कोई एक ऐसा समय वैज्ञानिक रूप से तय नहीं है, जिसे सभी के लिए सबसे बेहतर माना जाए। फल को भोजन से पहले, भोजन के साथ या भोजन के बाद खाया जा सकता है। शरीर दिन के अलग-अलग समय में फलों से मिलने वाले विटामिन, खनिज, फाइबर और प्राकृतिक शर्करा को पचा और अवशोषित कर सकता है।
फलों में पानी और फाइबर की मात्रा अच्छी होती है। इसलिए भोजन से पहले या हल्के स्नैक के रूप में फल खाने से कुछ लोगों को लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है। इससे जरूरत से ज्यादा खाने से बचने में भी मदद मिल सकती है।
हालांकि, भोजन के बाद फल खाना भी पूरी तरह सामान्य है। अगर किसी व्यक्ति को फल खाने के बाद पेट फूलने, एसिडिटी या किसी तरह की असहजता का अनुभव होता है, तो उसे खाली पेट फल खाने के किसी तय नियम का पालन करने की जरूरत नहीं है। वह दिन में अलग समय पर फल खाकर देख सकता है और अपने शरीर के अनुसार सही समय चुन सकता है।
फलों के मामले में सबसे ज्यादा मायने रखता है कि आप कितनी मात्रा में और किस तरह के फल नियमित रूप से खाते हैं। संतुलित आहार में अलग-अलग मौसमी फलों को शामिल करना बेहतर माना जाता है।
जूस की तुलना में साबुत फल ज्यादा अच्छा विकल्प है। साबुत फलों में फाइबर मौजूद रहता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा महसूस हो सकता है। इसके अलावा फल खाने से भोजन में पोषक तत्वों की विविधता भी बढ़ती है।
जिन लोगों को मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, उन्हें फल पूरी तरह बंद करने के बजाय अपनी जरूरत के अनुसार फलों की मात्रा और पूरे दिन के कार्बोहाइड्रेट सेवन पर ध्यान देना चाहिए।
Nutrients पत्रिका में 2023 में प्रकाशित एक अध्ययन में यह देखने की कोशिश की गई कि अलग-अलग समय पर फल खाने से रक्त शर्करा और पेट भरे होने की अनुभूति पर क्या असर पड़ता है।
शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को नाश्ते से 90 मिनट पहले, 30 मिनट पहले, नाश्ते के साथ और नाश्ते के 30 मिनट बाद कीवी फल दिया। अध्ययन में पाया गया कि अनाज की तुलना में फल को नाश्ते से पहले खाने पर प्रतिभागियों के कुल रक्त शर्करा स्तर में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक कमी देखी गई और उन्हें ज्यादा भूख भी महसूस नहीं हुई।
इस अध्ययन में सबसे बेहतर परिणाम उस समय देखने को मिले जब प्रतिभागियों ने मुख्य भोजन से करीब 30 मिनट पहले फल खाया।
शोध के मुताबिक, केवल अनाज खाने की तुलना में भोजन से लगभग आधा घंटा पहले फल खाने पर रक्त शर्करा में करीब 50 प्रतिशत तक कम वृद्धि देखी गई।
वहीं, अनाज के साथ फल खाने या भोजन खत्म होने के करीब 30 मिनट बाद फल खाने पर रक्त शर्करा में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को नियंत्रित करने का असर उतना प्रभावी नहीं रहा।
शोधकर्ताओं का मानना है कि भोजन से ठीक पहले फल खाने पर उसमें मौजूद फाइबर और प्राकृतिक अम्ल बाद में खाए जाने वाले अधिक कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन के पाचन को प्रभावित कर सकते हैं। इससे भोजन से मिलने वाली शर्करा शरीर में अपेक्षाकृत धीरे पहुंच सकती है।
हालांकि, अगर फल मुख्य भोजन से करीब 90 मिनट पहले खाया जाए तो शरीर दोनों खाद्य पदार्थों को काफी हद तक अलग-अलग पचा सकता है। ऐसे में भोजन से ठीक पहले फल खाने से मिलने वाला संभावित लाभ कम हो सकता है।
अगर आपका उद्देश्य सामान्य स्वास्थ्य और पोषण है, तो फल खाने के लिए कोई एक अनिवार्य समय नहीं है। सुबह, दोपहर या शाम, सुविधानुसार फल खाया जा सकता है।
लेकिन अगर खासतौर पर भोजन के बाद रक्त शर्करा में होने वाली बढ़ोतरी को नियंत्रित करने की बात हो, तो 2023 के इस अध्ययन के आधार पर मुख्य भोजन से करीब 30 मिनट पहले फल खाना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि फलों को अपनी रोजमर्रा की संतुलित डाइट का हिस्सा बनाएं और जूस की जगह जहां संभव हो साबुत फल चुनें। किसी खास बीमारी या ब्लड शुगर की समस्या में अपनी डाइट डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तय करना बेहतर है।