आसिया फारूकी: एक शिक्षिका जिसने बदल दी स्कूल और गांव की तस्वीर

Story by  अर्सला खान | Published by  [email protected] | Date 31-08-2026
Aasiya Farooqui: A teacher who changed the face of school and village
Aasiya Farooqui: A teacher who changed the face of school and village

 

अर्सला खान/नई दिल्ली

कहते हैं कि अगर इंसान कुछ बदलने की ठान ले, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी छोटी पड़ जाती है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर की शिक्षिका आसिया फारूकी ने यह बात सच करके दिखाई है।

एक समय उनके स्कूल में सिर्फ 8 बच्चे पढ़ते थे। स्कूल की हालत बहुत खराब थी। चारों तरफ कूड़ा पड़ा रहता था और स्कूल की इमारत भी ठीक नहीं थी। लेकिन आज उसी स्कूल में 250 से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं। यह बदलाव आसिया फारूकी की मेहनत और हिम्मत की वजह से आया।
 
साल 2009 में शुरू हुआ सफर

आसिया फारूकी ने साल 2009 में फतेहपुर के प्राथमिक विद्यालय बुशेहरा, हथगाम से पढ़ाना शुरू किया। इसके बाद वह प्राथमिक विद्यालय आदर्श मसवानी में गईं। वहां उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के नए और आसान तरीके अपनाए। अपनी मेहनत से उन्होंने कुछ ही सालों में उस स्कूल को एक मॉडल स्कूल बना दिया लेकिन उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती साल 2016 में आई।
 
 
जब मिली एक बहुत खराब हालत वाला स्कूल

जुलाई 2016 में आसिया फारूकी को प्रमोशन मिला और उन्हें प्रधानाध्यापिका बनाकर प्राथमिक विद्यालय अस्ति नगर भेजा गया। जब वह स्कूल पहुंचीं तो वहां की हालत देखकर हैरान रह गईं। स्कूल की इमारत टूटी हुई थी। स्कूल के अंदर और आसपास कूड़े के बड़े ढेर पड़े रहते थे। आसपास के लोग स्कूल में कचरा फेंकते थे। कुछ लोग स्कूल परिसर में शराब पीते थे और वहां बच्चों के लिए अच्छा माहौल नहीं था। उस समय स्कूल में सिर्फ 8 बच्चे थे। आसिया स्कूल की इकलौती शिक्षिका थीं। शुरुआत में गांव के बहुत से लोग भी उनका साथ नहीं देना चाहते थे। लेकिन आसिया ने हार नहीं मानी। 
 
 
 
अकेले शुरू किया सफाई का काम 

आसिया ने किसी की मदद का इंतजार नहीं किया। उन्होंने खुद स्कूल को बदलने का काम शुरू किया। उन्होंने कुछ मजदूरों की मदद से स्कूल का कूड़ा साफ करवाया। इसके बाद वह आसपास के लोगों के घर गईं और उनसे कहा कि अब स्कूल में कचरा न फेंकें। फिर उन्होंने गांव के करीब 150 घरों में जाकर लोगों से बात की और बच्चों को स्कूल भेजने के लिए कहा। लेकिन वह जानती थीं कि सिर्फ बच्चों को बुलाना काफी नहीं है। स्कूल को बच्चों के लिए अच्छा और सुंदर बनाना भी जरूरी था। इसलिए उन्होंने गांव के कुछ लोगों की मदद से स्कूल में किचन गार्डन बनाया।
 
मुश्किलें आईं, लेकिन आसिया नहीं रुकीं

दशहरा की छुट्टियों में कुछ लोगों ने स्कूल में तोड़फोड़ कर दी। स्कूल में बनाई गई कई चीजों को नुकसान पहुंचाया गया। आसिया को फोन पर धमकियां भी मिलीं और उनकी गाड़ी को भी नुकसान पहुंचाया गया। लेकिन वह डरी नहीं। उन्होंने पुलिस में शिकायत की और पहले से ज्यादा मेहनत के साथ अपने काम में लग गईं।
 
बच्चों की बनाई 'ग्रीन आर्मी'

आसिया फारूकी ने बच्चों को भी स्कूल की जिम्मेदारी दी। उन्होंने बच्चों की एक 'ग्रीन आर्मी' बनाई। इस टीम का काम स्कूल के फूलों, पौधों, पेड़ों और सब्जियों की देखभाल करना था। इससे बच्चों में जिम्मेदारी की भावना पैदा हुई। बच्चे स्कूल को अपना समझने लगे।
 
स्कूल में बच्चों की अपनी सरकार

आसिया फारूकी ने स्कूल में बच्चों का एक मंत्रिमंडल भी बनाया। स्कूल में चुनाव होते हैं। बच्चे चुनाव लड़ते हैं, भाषण देते हैं और वोट डालते हैं। मंत्रिमंडल में 11 बच्चे अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हैं। कोई प्रधानमंत्री बनता है, कोई स्वास्थ्य मंत्री, कोई खेल मंत्री और कोई सफाई मंत्री। इससे बच्चों को लोकतंत्र और वोट की ताकत समझने में मदद मिलती है। अब स्कूल की तस्वीर पूरी तरह बदल गई आज प्राथमिक विद्यालय अस्ति नगर बहुत बदल चुका है। यहां सुंदर कक्षाएं हैं। बच्चों की बनाई पेंटिंग और पोस्टर दीवारों पर लगे हैं। स्कूल में लाइब्रेरी है, खेल का कमरा है, एक्टिविटी हॉल है और कंप्यूटर से पढ़ाई की सुविधा भी है।
बच्चों के लिए पढ़ाई को मजेदार और आसान बनाया गया है। आज यह सरकारी स्कूल किसी अच्छे निजी स्कूल से कम नहीं लगता।
 
 
8 बच्चों से 250 से ज्यादा बच्चों तक का सफर

आसिया फारूकी की मेहनत का सबसे बड़ा नतीजा बच्चों की बढ़ती संख्या है। जिस स्कूल में पहले सिर्फ 8 बच्चे थे, आज वहां 250 से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं।
आसिया ने पढ़ाई को मजेदार बनाया। बच्चों को खेल-खेल में सिखाया। नई तकनीक का इस्तेमाल किया और बच्चों को जिम्मेदार भी बनाया।
 
 लड़कियों और महिलाओं के लिए भी किया काम

आसिया फारूकी का काम सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं है। उन्होंने लड़कियों को पढ़ाई के लिए आगे बढ़ाया और परिवारों को बेटियों को स्कूल भेजने के लिए समझाया। उन्होंने महिलाओं को घरेलू हिंसा और नशे जैसी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी प्रेरित किया। कई महिलाओं को छोटे काम और कारोबार शुरू करने के लिए भी मदद और जानकारी दी, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
 
700 से ज्यादा पढ़ाई के वीडियो

आसिया फारूकी ने पढ़ाई के लिए तकनीक का भी खूब इस्तेमाल किया। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर करीब 700 पढ़ाई से जुड़े वीडियो बनाए हैं। उनकी कुछ पढ़ाई की सामग्री DIKSHA प्लेटफॉर्म पर भी डाली गई है। उन्होंने स्कूल की एक पत्रिका भी शुरू की, जिसका नाम है 'अस्ति की उड़ान'।
 
 
मिले कई सम्मान

उनके अच्छे काम के लिए आसिया फारूकी को उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षक पुरस्कार और मिशन शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि जिन गांव वालों ने शुरुआत में उनका साथ नहीं दिया, आज वही लोग उनके काम की तारीफ करते हैं। जो लोग कभी चाहते थे कि वह स्कूल छोड़कर चली जाएं, आज वही चाहते हैं कि वह स्कूल को कभी न छोड़ें।
 
एक शिक्षिका, जिसने नहीं मानी हार

आसिया फारूकी की कहानी हमें एक बड़ी सीख देती है। मुश्किलें कितनी भी हों, अगर इंसान हिम्मत न हारे और लगातार मेहनत करता रहे, तो बदलाव जरूर आता है। एक समय आसिया एक ऐसे स्कूल में पहुंची थीं, जहां कूड़ा, डर और सिर्फ 8 बच्चे थे। आज उसी स्कूल में 250 से ज्यादा बच्चे हैं, सुंदर कक्षाएं हैं और पढ़ाई का अच्छा माहौल है।
 
आसिया फारूकी ने सिर्फ एक स्कूल नहीं बदला, बल्कि बच्चों, लड़कियों और पूरे गांव की सोच बदलने का काम किया है। उनकी कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है, जो सोचता है कि अकेला व्यक्ति कोई बड़ा बदलाव नहीं ला सकता। आसिया फारूकी ने साबित कर दिया कि एक अच्छी शिक्षिका सिर्फ बच्चों को पढ़ाती नहीं, बल्कि उनका भविष्य भी बदल सकती है।