Urfana Amin: Worked for the education of special children, received the National Teacher Award
अर्सला खान/नई दिल्ली
कहते हैं कि एक अच्छा शिक्षक सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाता, बल्कि बच्चों का भविष्य भी बनाता है। श्रीनगर की शिक्षिका उर्फाना अमीन ने भी अपने काम से यही साबित किया है।
उर्फाना अमीन ने बच्चों को पढ़ाने के लिए नए तरीके अपनाए। खासकर उन्होंने उन बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दिया, जिन्हें पढ़ने-लिखने में ज्यादा मदद की जरूरत होती है। उनकी मेहनत और शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे काम के लिए उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया।
साल 2002 में शुरू हुआ सफर
उर्फाना अमीन ने साल 2002 में एक शिक्षिका के रूप में अपना सफर शुरू किया था। शुरुआत में वह जनरल लाइन टीचर थीं। धीरे-धीरे उन्होंने अपने पढ़ाने के तरीके और मेहनत से एक अलग पहचान बनाई। आज वह श्रीनगर के गवर्नमेंट बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल, सौरा में मास्टर ग्रेड टीचर हैं।
खास बच्चों की पढ़ाई पर दिया ध्यान
उर्फाना अमीन ने विशेष जरूरतों वाले बच्चों की शिक्षा के लिए खास काम किया। ऐसे बच्चों को अक्सर पढ़ाई में अलग तरह की मदद की जरूरत होती है। उन्होंने यह कोशिश की कि कोई भी बच्चा अपनी किसी परेशानी की वजह से पढ़ाई से पीछे न रह जाए। उर्फाना को ब्रेल लिपि की भी अच्छी जानकारी है। ब्रेल के जरिए दृष्टिबाधित बच्चे पढ़ना और लिखना सीखते हैं। ब्रेल में उनकी जानकारी ने कई बच्चों की पढ़ाई को आसान बनाने में मदद की।
छोटे बच्चों की पढ़ाई पर भी किया काम
उर्फाना अमीन ने छोटे बच्चों की शुरुआती पढ़ाई और देखभाल से जुड़े ECCE कार्यक्रमों में भी काम किया। उनका मानना है कि अगर बच्चे को शुरुआत से अच्छी शिक्षा मिले, तो उसका भविष्य बेहतर बन सकता है।
दूसरे शिक्षकों की भी मदद की
उर्फाना सिर्फ अपने स्कूल के बच्चों तक ही सीमित नहीं रहीं। उन्होंने दूसरे शिक्षकों के साथ भी अपना अनुभव साझा किया। वह नेशनल रिसोर्स पर्सन के रूप में भी काम कर चुकी हैं। इसके अलावा, उन्होंने शिक्षा से जुड़ी कई समितियों और समूहों के साथ काम किया है।
मिला राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार
साल 2024 में उर्फाना अमीन की मेहनत को देशभर में पहचान मिली। उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2024 के लिए चुना गया। देशभर से चुने गए 75 शिक्षकों में उर्फाना अमीन भी शामिल थीं। शिक्षक दिवस, यानी 5 सितंबर, के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें इस सम्मान से सम्मानित किया। इस पुरस्कार के साथ उन्हें सम्मान पत्र, 50 हजार रुपये की राशि और रजत पदक दिया गया।
जम्मू-कश्मीर के लिए गर्व की बात
उर्फाना अमीन को यह सम्मान मिलना सिर्फ उनकी अपनी सफलता नहीं है, बल्कि उनके स्कूल और पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कई सालों तक बच्चों की शिक्षा के लिए काम किया। खासकर उन बच्चों के लिए, जिन्हें पढ़ाई में ज्यादा सहारे की जरूरत थी।
एक शिक्षिका, जिसने हर बच्चे को आगे बढ़ाने की कोशिश की उर्फाना अमीन की कहानी हमें सिखाती है कि एक शिक्षक की असली पहचान सिर्फ उसके पुरस्कारों से नहीं होती।
एक अच्छे शिक्षक की पहचान इस बात से होती है कि वह बच्चों के जीवन में कितना बदलाव लाता है। साल 2002 में शुरू हुआ उर्फाना अमीन का शिक्षिका बनने का सफर आज राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार तक पहुंच चुका है। उर्फाना अमीन ने साबित किया है कि अगर शिक्षक बच्चों की जरूरत को समझकर पढ़ाए, तो वह हर बच्चे को आगे बढ़ने का मौका दे सकता है।