Eat probiotic foods to keep your gut healthy during the monsoon.
नई दिल्ली
मानसून का मौसम अपने साथ ठंडक और राहत तो लाता है, लेकिन इस दौरान पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। नमी, दूषित पानी, भोजन में बैक्टीरिया और संक्रमण के कारण पेट खराब होना, गैस, अपच, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे समय में विशेषज्ञ आंतों (गट) की सेहत का विशेष ध्यान रखने की सलाह देते हैं। इसके लिए प्रोबायोटिक युक्त खाद्य पदार्थ बेहद फायदेमंद माने जाते हैं।
प्रोबायोटिक्स ऐसे जीवित और लाभकारी सूक्ष्मजीव (अच्छे बैक्टीरिया) होते हैं, जो हमारी आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। ये पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और हानिकारक बैक्टीरिया से शरीर की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मानसून में क्यों जरूरी हैं प्रोबायोटिक्स?
बरसात के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने के कारण बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव तेजी से पनपते हैं। दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ आंतों के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं और पाचन संबंधी परेशानियों का जोखिम कम कर सकते हैं।
इन प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों को करें आहार में शामिल
दही:
घर का ताजा दही प्रोबायोटिक्स का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया पाचन को बेहतर बनाते हैं और आंतों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। मानसून में ताजा और स्वच्छ दही का सीमित मात्रा में सेवन लाभकारी हो सकता है।
मट्ठा (छाछ):
दही से तैयार छाछ हल्की, सुपाच्य और पेट को ठंडक देने वाली होती है। यह आंतों में अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है। हालांकि इसमें अधिक नमक या मसाले मिलाने से बचना चाहिए।
केफिर:
केफिर दूध से तैयार एक किण्वित (फर्मेंटेड) पेय है, जिसमें कई प्रकार के लाभकारी बैक्टीरिया और यीस्ट पाए जाते हैं। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और आंतों की सेहत सुधारने में सहायक माना जाता है।
इडली और डोसा:
इडली और डोसा का घोल प्राकृतिक रूप से किण्वित होता है। इस प्रक्रिया में बनने वाले लाभकारी सूक्ष्मजीव पाचन के लिए अच्छे माने जाते हैं। ये दोनों व्यंजन हल्के होते हैं और बरसात के मौसम में आसानी से पच जाते हैं।
किण्वित सब्जियां:
घर पर स्वच्छ तरीके से तैयार की गई किण्वित सब्जियां, जैसे गाजर या खीरा, भी अच्छे बैक्टीरिया का स्रोत हो सकती हैं। इन्हें तैयार करते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है ताकि संक्रमण का खतरा न रहे।
फाइबर भी है उतना ही जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल प्रोबायोटिक्स ही नहीं, बल्कि प्रीबायोटिक और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ भी आंतों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण हैं। फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और दालें लाभकारी बैक्टीरिया को पोषण देने का काम करती हैं और पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करती हैं।
मानसून में रखें इन बातों का भी ध्यान
हमेशा उबला या सुरक्षित पेयजल ही पिएं।
खुले और बासी भोजन से बचें।
भोजन बनाने और खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं।
कटे हुए फल या सड़क किनारे खुले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें।
भोजन को साफ और ढककर रखें।
संतुलित आहार है सबसे बड़ा उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में स्वस्थ रहने के लिए केवल एक-दो खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित और पौष्टिक आहार लेना जरूरी है। प्रोबायोटिक और फाइबर युक्त भोजन, पर्याप्त पानी, स्वच्छता और सुरक्षित खानपान की आदतें मिलकर पाचन तंत्र को मजबूत बनाती हैं। यदि लगातार पेट दर्द, दस्त, उल्टी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो स्वयं इलाज करने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।