Unavailability of textbooks, application-based exams causing academic stress among students: Parliamentary panel
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
संसद की एक समिति ने कक्षा नौ से 12 तक के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने और उसके क्रियान्वयन के बीच अंतर को रेखांकित करते हुए कहा है कि पाठ्यपुस्तकों की अनुपलब्धता और आवेदन-आधारित बोर्ड परीक्षा पद्धति छात्रों, खासकर 10वीं और 12वीं की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों में शैक्षणिक तनाव और भ्रम का कारण बन रही हैं।
‘देश में किफायती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए बजट एवं नीतिगत पहलुओं’’ से संबंधित प्राक्कलन समिति (2026-27) की 18वीं लोकसभा की दसवीं रिपोर्ट में यह टिप्पणी की गई है।
यह रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश की गई।
समिति ने कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा नौ से 12 के लिए पाठ्यचर्या को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) 2023 के उद्देश्यों के अनुरूप अपनाया है।
हालांकि, समिति ने कहा कि पाठ्यक्रम तैयार करने और उसे लागू करने के बीच काफी अंतर है क्योंकि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अभी भी कक्षा नौ से 12 के लिए नई पाठ्यपुस्तकें जारी करने की प्रक्रिया में है। इसके कारण स्कूलों को अक्सर पुरानी अध्ययन सामग्री की उपलब्धता के बीच नए और उच्च-स्तरीय पाठ्यक्रम को पढ़ाना पड़ रहा है।
समिति ने कहा, ‘‘पाठ्यपुस्तकों की अनुपलब्धता और नए, आवेदन-आधारित बोर्ड परीक्षा पद्धति छात्रों, विशेषकर कक्षा 10 और 12 की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों में महत्वपूर्ण शैक्षणिक तनाव और भ्रम पैदा कर रहे हैं।’’
समिति ने शिक्षा मंत्रालय से इस बदलाव से उत्पन्न अंतर को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने तथा सभी कक्षाओं के लिए शेष नई पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने, मुद्रण और देशभर में इनके वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया।
उसने एनसीईआरटी से नई पहलों को सफल बनाने के लिए सीबीएसई के साथ मिलकर काम करने को भी कहा।