ममता के गुट ने ‘शहीद दिवस’ रैली के लिए बिड़ला तारामंडल के पास के मार्ग का सुझाव दिया

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 15-07-2026
Mamata's faction suggests route near Birla Planetarium for 'Martyrs' Day' rally
Mamata's faction suggests route near Birla Planetarium for 'Martyrs' Day' rally

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय को सुझाव दिया है कि अगर उन्हें 21 जुलाई को एस्प्लेनेड में विक्टोरिया हाउस के सामने शहीद दिवस रैली की अनुमति नहीं मिलती है तो उन्हें दक्षिण कोलकाता में बिड़ला तारामंडल के सामने रैली के आयोजन की मंजूरी दी जाए।
 
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली की अनुमति के लिए याचिका पेश करते हुए गुट के वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह रैली दो या तीन साल को छोड़कर 1993 से ममता बनर्जी के नेतृत्व में मध्य कोलकाता में ‘विक्टोरिया हाउस’ के सामने आयोजित की जाती रही है।
 
उन्होंने वैकल्पिक जगहों के तौर पर एस्प्लेनेड में मेट्रो चैनल या डोरिना क्रॉसिंग का भी सुझाव दिया।
 
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि वह विक्टोरिया हाउस के सामने रैली की अनुमति नहीं देंगे क्योंकि इससे कोलकाता के मध्य में स्थित मुख्य सड़क चितरंजन एवेन्यू पर जाम लग जाएगा।
 
कल्याण बनर्जी ने बताया कि पुलिस ने शहीद दिवस के आयोजन के लिए दो अन्य रैलियों की अनुमति दी है, एक रैली दूसरे गुट द्वारा मेयो रोड पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने और दूसरी कांग्रेस पार्टी द्वारा शहीद मीनार मैदान में आयोजित की जाएगी। दोनों ही रैलियां 21 जुलाई को होंगी।
 
ममता बनर्जी गुट की याचिका में एस्प्लेनेड में विक्टोरिया हाउस के आस-पास के इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत कोलकाता पुलिस द्वारा लगाए गए निषेधाज्ञा के आदेश को चुनौती दी गई है।
 
उन्होंने एस्प्लेनेड में मेट्रो चैनल या बिड़ला तारामंडल के सामने एक वैकल्पिक जगह का सुझाव दिया, जो उस दिन होने वाली अन्य दो रैलियों से लगभग कुछ किलोमीटर दूर है।
 
उन्होंने बताया कि 21 जुलाई 1993 को एक रैली के दौरान कांग्रेस के 13 कार्यकर्ता मारे गए थे। उस वक्त ममता बनर्जी युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। तब से इस दिन को पार्टी शहीद दिवस के रूप में मनाती आ रही है।
 
अदालत के सवाल पर वकील ने बताया कि इसमें लगभग 15,000 से 20,000 लोग शामिल होंगे।
 
महाधिवक्ता सुरोजित नाथ मित्रा ने कहा कि पुलिस को रैली की मंजूरी देने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन रैली किसी दूसरी जगह पर होनी चाहिए।
 
अदालत ने पूछा कि अगर दो रैलियों की इजाजत दी गई है तो उसी इलाके में पुलिस के पुख्ता इंतजाम के साथ एक और रैली की इजाजत क्यों नहीं दी जा सकती।
 
अदालत ने सुनवाई बुधवार दोपहर 12:30 बजे तक के लिए टाल दी। उस समय सुनवाई फिर शुरू होगी और महाधिवक्ता दूसरी जगहों के सुझावों पर सरकार का पक्ष रखेंगे।