अब एक छत के नीचे मिलेगी भारतीय भाषाओं की पूरी कहानी, खुल रहा है 'शब्दलोक'

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 13-07-2026
'Shabdalok', dedicated to the heritage of Indian languages, to be launched on July 19.
'Shabdalok', dedicated to the heritage of Indian languages, to be launched on July 19.

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित देश का पहला संग्रहालय ‘म्यूज़ियम ऑफ वर्ड’ (शब्दलोक) अब जनता के लिए खुलने जा रहा है। कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय (नेशनल लाइब्रेरी) के ऐतिहासिक बेल्वेडियर हाउस में विकसित इस संग्रहालय का उद्घाटन 19 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद रहेंगे।
 
टेक्स्ट की फ़ोटो हो सकती है
 
यह संग्रहालय भारत की बहुभाषी परंपरा, भाषाओं के विकास, लिपियों, साहित्य और मौखिक विरासत को समर्पित अपनी तरह का देश का पहला संग्रहालय है। इसकी परिकल्पना वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई घोषणा के बाद की गई थी। इसका उद्देश्य भारत की मौखिक और लिखित भाषाई विविधता को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
 
लाइटिंग की फ़ोटो हो सकती है
 
पहले चरण में 14 करोड़ रुपये की लागत

शब्दलोक का पहला चरण बेल्वेडियर हाउस की पहली मंजिल और दूसरी मंजिल के एक हिस्से में विकसित किया गया है। इसे संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय पुस्तकालय द्वारा लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। पूरी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 41 करोड़ रुपये है। इसमें भविष्य में संग्रहालय का विस्तार भूतल (ग्राउंड फ्लोर) तक करना, भवन की बाहरी दीवारों पर लाइट एंड साउंड शो विकसित करना और अन्य सुविधाओं का निर्माण शामिल है।
 
नक्शा और टेक्स्ट की फ़ोटो हो सकती है
 
नौ दीर्घाओं में दिखेगी भारतीय भाषाओं की पूरी यात्रा

संग्रहालय में कुल 9 थीम आधारित गैलरी बनाई गई हैं। प्रत्येक गैलरी भारतीय भाषाओं, लिपियों, साहित्य और संस्कृति के अलग-अलग पहलुओं को प्रस्तुत करेगी। संग्रहालय केवल ऐतिहासिक वस्तुओं का प्रदर्शन नहीं करेगा, बल्कि आधुनिक तकनीक के जरिए आगंतुकों को एक इंटरएक्टिव और इमर्सिव अनुभव भी प्रदान करेगा। यहां आगंतुक मौखिक परंपराओं, प्राचीन पांडुलिपियों, मुद्रित पुस्तकों और आधुनिक डिजिटल सामग्री के माध्यम से भारतीय भाषाओं की विकास यात्रा को समझ सकेंगे। संग्रहालय भाषा को केवल संचार का माध्यम नहीं बल्कि समाज के साथ विकसित होने वाले एक जीवंत सांस्कृतिक तंत्र के रूप में प्रस्तुत करेगा।
 
पहली दो गैलरियों में मातृभाषा से जुड़ाव

संग्रहालय की पहली दो गैलरियां आगंतुकों को उनकी मातृभाषा और अन्य भारतीय भाषाओं से जोड़ने का प्रयास करेंगी। यहां विभिन्न इंटरएक्टिव मॉड्यूल के माध्यम से भाषाओं को अनुभव करने का अवसर मिलेगा। वहीं संग्रहालय की सबसे बड़ी गैलरी ‘भाषा की समयरेखा’ होगी, जिसमें भारतीय भाषाओं के विकास, विभिन्न लिपियों, भाषा परिवारों और भाषाई परंपराओं का विस्तृत इतिहास प्रस्तुत किया जाएगा।
 
टेक्स्ट की फ़ोटो हो सकती है
 
अन्य गैलरियों में यह दिखाया जाएगा कि भारत की सभ्यता में भाषा ने किस तरह ज्ञान, स्मृति और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने का कार्य किया। इसमें ध्वनि, वाणी, लोक एवं प्रदर्शन कलाएं, प्रतीक, शिलालेख, चित्रकला, मुद्रित साहित्य और नवरस की होलोग्राफिक प्रस्तुति भी शामिल होगी।
 
वह टेक्स्ट जिसमें '屋 จ' लिखा है की फ़ोटो हो सकती है
 
मुद्रण और पुस्तकालय आंदोलन का भी मिलेगा इतिहास

संग्रहालय में भारत में मुद्रण तकनीक के इतिहास, पुस्तकालय आंदोलन और विशेष रूप से राष्ट्रीय पुस्तकालय के विकास की कहानी भी प्रस्तुत की जाएगी। साथ ही विभिन्न भारतीय भाषाओं के महान साहित्यकारों और विद्वानों को भी सम्मानपूर्वक प्रदर्शित किया जाएगा।
 
फ़ोटो के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.
 
दुर्लभ पांडुलिपियां और ऐतिहासिक धरोहर होंगी आकर्षण का केंद्र

शब्दलोक में कई दुर्लभ और ऐतिहासिक मूल कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें शामिल हैं:
 
11वीं और 14वीं शताब्दी के शिलालेखयुक्त ताम्रपत्र
18वीं शताब्दी की रागिनी आसावरी पेंटिंग (भारतीय संग्रहालय से)
एशियाटिक सोसाइटी की हितोपदेश, इंशा-ए-ग़ालिब और पृथ्वीराज रासो की पांडुलिपियां
विक्टोरिया मेमोरियल से डाक टिकट और दुर्लभ पुस्तकें
राष्ट्रीय पुस्तकालय की अमूल्य धरोहरें जैसे समाचार दर्पण, अरुणोदोई, खवारनामा और तिब्बती ज़ायलोग्राफ
 
इसके अलावा संग्रहालय में हड़प्पा सभ्यता की मुहरों की प्रतिकृतियां, प्राचीन सिक्के, पांडुलिपियां, मुखौटे, कठपुतलियां, पुराने लेटरहेड प्रिंटिंग मशीन तथा इंटरएक्टिव गेम्स भी प्रदर्शित किए जाएंगे।
 
फ़ोटो के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.
 
आधुनिक तकनीक से होगा जीवंत अनुभव

संग्रहालय को आधुनिक तकनीक से लैस बनाने में नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूज़ियम (NCSM) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहां ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR), ग्राफिक वॉल, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति और डिजिटल इंटरएक्टिव सिस्टम का उपयोग किया गया है। वहीं संग्रहालय की योजना, डिजाइन और गैलरियों के क्यूरेशन का कार्य डेवलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन फॉर नेचर, आर्ट्स एंड हेरिटेज (DRONAH) ने किया है।
 
फ़ोटो के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.
 
आगे के चरणों में होगा और विस्तार

एनसीएसएम, जो कोलकाता के साइंस सिटी और बिड़ला इंडस्ट्रियल एंड टेक्नोलॉजिकल म्यूज़ियम जैसे प्रमुख संस्थानों का संचालन करता है, अब संग्रहालय के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालेगा। एनसीएसएम के कार्यवाहक महानिदेशक के. एस. मुरली के अनुसार परियोजना के अगले दो चरण भी जल्द शुरू होंगे।
 
दूसरे चरण में बेल्वेडियर हाउस की बाहरी दीवारों पर लाइट एंड साउंड शो विकसित किया जाएगा तथा आगंतुकों के लिए कैफेटेरिया बनाया जाएगा। तीसरे चरण में संग्रहालय का विस्तार बेसमेंट तक किया जाएगा, जिससे प्रदर्शनी क्षेत्र और अधिक बड़ा हो सके।
 
टेक्स्ट की फ़ोटो हो सकती है
 
छात्रों को मिलेगी रियायती टिकट

संग्रहालय में प्रवेश के लिए टिकट की व्यवस्था की जाएगी। लाइट एंड साउंड शो के लिए भी अलग टिकट होगा। हालांकि छात्रों को रियायती दर पर प्रवेश की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
 
टेक्स्ट की फ़ोटो हो सकती है
 
भारतीय भाषाओं की जीवंत विरासत का नया केंद्र

‘शब्दलोक’ केवल एक संग्रहालय नहीं बल्कि भारत की भाषाई विविधता, साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करने वाला एक जीवंत केंद्र होगा। यहां प्राचीन पांडुलिपियों से लेकर डिजिटल माध्यमों तक भारतीय भाषाओं की हजारों वर्षों की यात्रा को एक ही छत के नीचे देखा और अनुभव किया जा सकेगा। यह संग्रहालय भारत की भाषाई अस्मिता को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
 
टेक्स्ट की फ़ोटो हो सकती है
 
'शब्दलोक – द म्यूज़ियम ऑफ़ वर्ड' भारत का अपनी तरह का पहला म्यूज़ियम है जो पूरी तरह से देश की समृद्ध भाषाई विरासत को समर्पित है। कोलकाता में नेशनल लाइब्रेरी के कैंपस में मौजूद ऐतिहासिक 'बेल्वेडियर हाउस' में स्थित यह म्यूज़ियम, शानदार और आकर्षक गैलरीज़ के ज़रिए भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं के विकास को दिखाता है। 
 
मुख्य विशेषताएं: 

इंटरैक्टिव टेक्नोलॉजी: यह म्यूज़ियम शब्दों और लिपियों के इतिहास को सभी के लिए दिलचस्प बनाने के लिए एडवांस्ड AR/VR अनुभव, दुर्लभ पांडुलिपियों और प्राचीन शिलालेखों का इस्तेमाल करता है। 
 
भाषाई विविधता: यह भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं जिनमें असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, तेलुगु और तमिल शामिल हैं की भाषाई जड़ों का जश्न मनाता है और मशहूर कवियों और लेखकों के योगदान को उजागर करता है। 
 
लोकेशन: यह मशहूर और ऐतिहासिक 'बेल्वेडियर हाउस' में स्थित है, जो यहाँ आने के अनुभव में आर्किटेक्चर और इतिहास का एक खास पहलू जोड़ता है।
 
pics credit: The Times of India