आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने बुधवार को अपार्टमेंट मालिकों को आश्वासन दिया कि सरकार सभी हितधारकों से परामर्श के बाद उनके स्वामित्व अधिकारों की रक्षा के लिए एक व्यापक कानून बनाएगी।
शिवकुमार ने कहा कि प्रस्तावित कर्नाटक अपार्टमेंट (स्वामित्व एवं प्रबंधन) विधेयक, 2026 को विधानसभा में पेश करने से पहले इस पर व्यापक चर्चा की जाएगी।
बेंगलुरु में अपार्टमेंट एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए शिवकुमार ने कहा कि सरकार बिल्डर, संपत्ति दस्तावेजों और अपार्टमेंट प्रबंधन से जुड़े लंबित मुद्दों का भी समाधान करेगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि घर खरीदने वालों के हित सुरक्षित रहें।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इस मामले में पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। जब आपको संपत्ति दी जा रही है तो उस पर आपका अधिकार होना चाहिए। आप ही उसके मालिक हैं।’’
इसके साथ ही उन्होंने अपार्टमेंट मालिकों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा को और मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता रेखांकित की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस कानून को जल्दबाजी में नहीं लाएगी और अंतिम रूप देने से पहले अपार्टमेंट एसोसिएशन, बिल्डर, विधि विशेषज्ञों तथा राजनीतिक दलों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा सत्र से पहले हमारे पास समय है। विधेयक पहले मंत्रिमंडल के पास जाएगा और उसके बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। मैं इसे जल्दबाजी में विधानसभा से पारित नहीं कराना चाहता। मैं सभी हितधारकों से चर्चा करना चाहता हूं और जहां भी अच्छे सुझाव मिलेंगे, उन्हें शामिल किया जाएगा।’’
शिवकुमार ने कहा कि अपार्टमेंट मालिकों ने जीवनभर की कमाई से अपना घर खरीदा है और उन्हें पूर्ण कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘आपकी मेहनत की कमाई से खरीदी गई संपत्ति को पूरा कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए। इसका किसी भी तरह दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।’’
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जो बिल्डर खरीदारों को संपत्ति के मूल दस्तावेज नहीं सौंपेंगे, उन्हें चर्चा के लिए बुलाया जाएगा। उन्होंने बैंकों में संपत्ति गिरवी रखने के बाद भी दस्तावेज अपने पास रखने की प्रवृत्ति के खिलाफ चेतावनी दी।
शिवकुमार ने कहा कि सरकार की प्रस्तावित ‘भूमि गारंटी’, जिसे उन्होंने सरकार की छठी गारंटी बताया, के तहत संपत्ति मालिकों को बिना रिश्वत दिए ‘खाता’ प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 40 लाख संपत्तियों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है और 26 लाख ‘खाता’ जारी किए जा चुके हैं।