नई दिल्ली।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एसएनएससी) के उप सचिव ग़दीर निज़ामीपोर ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की। यह मुलाकात 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) बैठक के समापन के बाद हुई, जिसकी अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने की थी।
भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी साझा की। दूतावास ने अपने बयान में कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव डॉ. ग़दीर निज़ामीपोर ने मंगलवार शाम नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक समाप्त होने के बाद हुई।
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात से पहले ग़दीर निज़ामीपोर ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल से भी द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की थी।
BRICS has vital role in deepening security cooperation, addressing shared challenges.
— News Arena India (@NewsArenaIndia) June 23, 2026
- PM Modi after meeting BRICS NSAs pic.twitter.com/0YNqJpYa03
इस बीच, मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच तनाव खुलकर सामने आया। ईरानी अधिकारियों ने औपचारिक रूप से यूएई पर अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए सैन्य अभियानों में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने का आरोप लगाया।
भारत में ईरानी दूतावास ने एक्स पर जारी एक पोस्ट में कहा कि ग़दीर निज़ामीपोर ने बैठक के दौरान यूएई प्रतिनिधिमंडल के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने ईरान के खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के लिए अमेरिका और इज़राइल को जिम्मेदार ठहराया।
दूतावास के अनुसार, निज़ामीपोर ने कहा कि पूरी दुनिया ने देखा है कि अमेरिका और "जायोनी शासन" ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और संकट की शुरुआत की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन हमलों का एक हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात की धरती पर स्थित ठिकानों से संचालित किया गया।
ईरानी अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि यूएई ने न केवल अपने क्षेत्र का इस्तेमाल हमलों के लिए होने दिया, बल्कि ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाने वाली कार्रवाइयों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल भी रहा।
निज़ामीपोर ने यूएई प्रतिनिधिमंडल से अपनी नीतियों में बदलाव करने का आग्रह करते हुए कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए "प्रचार और साहसिक नीतियों" से बचना आवश्यक है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी शत्रुता को समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर काम चल रहा है। दोनों पक्षों के बीच हाल ही में तकनीकी वार्ताओं का पहला चरण संपन्न हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने एक उच्च स्तरीय समिति के गठन तथा 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर सहमति व्यक्त की है। इस पहल का उद्देश्य पश्चिम एशिया में तनाव कम करना और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स मंच पर भारत, ईरान और अन्य सदस्य देशों के बीच बढ़ता संवाद न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।