मुस्लिम समुदाय ने हिंदू युवक को दी अंतिम विदाई

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 24-06-2026
An example of Hindu-Muslim unity in Assam's Ambari-Parerchar village: Muslim community performs last rites of a Hindu youth according to Hindu rituals.
An example of Hindu-Muslim unity in Assam's Ambari-Parerchar village: Muslim community performs last rites of a Hindu youth according to Hindu rituals.

 

निकुंज नाथ / गुवाहाटी 

आज के दौर में जब देशभर में धार्मिक ध्रुवीकरण, सामाजिक विभाजन और सांप्रदायिक तनाव की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती हैं, ऐसे समय में असम के बोंगईगांव जिले से इंसानियत, भाईचारे और हिंदू-मुस्लिम एकता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसने हर संवेदनशील व्यक्ति का दिल जीत लिया है। यहां एक मुस्लिम बहुल गांव के लोगों ने धर्म और जाति की दीवारों को तोड़ते हुए एक हिंदू युवक का अंतिम संस्कार पूरी श्रद्धा और हिंदू परंपराओं के अनुसार संपन्न कराया।

यह भावुक कर देने वाली घटना बोंगईगांव जिले के श्रीजंग्राम विधानसभा क्षेत्र स्थित अंबारी-परेरचर गांव की है। यह गांव मुस्लिम बहुल आबादी वाला क्षेत्र माना जाता है। हाल ही में गांव के निवासी प्रतीक भौमिक नामक एक हिंदू युवक का असामयिक निधन हो गया। युवक की अचानक हुई मौत से न केवल उसका परिवार बल्कि पूरा गांव गहरे शोक में डूब गया।

दुख की घड़ी में आगे आया पूरा मुस्लिम समुदाय

प्रतीक भौमिक के निधन के बाद गांव के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जिस संवेदनशीलता और मानवता का परिचय दिया, उसने सांप्रदायिक सद्भाव की एक नई मिसाल कायम कर दी। युवक के परिवार पर आए इस दुख के समय में गांव के मुस्लिम समुदाय के लोग स्वयं आगे आए और परिवार को हर संभव सहयोग प्रदान किया। गांव वालों ने न केवल शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी, बल्कि अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि हिंदू धर्म की सभी परंपराओं और रीति-रिवाजों का पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ पालन किया जाए।

अपने कंधों पर उठाया शव, निभाई इंसानियत की जिम्मेदारी

गांव के लोगों ने धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर प्रतीक भौमिक के पार्थिव शरीर को अपने कंधों पर उठाया और अंतिम संस्कार की व्यवस्था में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि दाह संस्कार की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो और हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सभी आवश्यक रस्में संपन्न हों। इस दौरान स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया कि इंसानियत किसी धर्म या जाति की मोहताज नहीं होती।

"हिंदू-मुस्लिम जैसी कोई चीज नहीं, हम सब इंसान हैं"

गांव के एक स्थानीय निवासी ने कहा, "हम प्रतीक भौमिक की मौत से बेहद दुखी हैं और उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं। आज हम असम के लोगों को यह संदेश देना चाहते हैं कि हिंदू-मुस्लिम जैसी कोई चीज नहीं होती। हम सभी इंसान हैं और दुख-सुख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहना ही सबसे बड़ा धर्म है। हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि प्रतीक भौमिक की आत्मा को शांति मिले।" यह बयान गांव की उस सोच को दर्शाता है जहां इंसानियत को धर्म से ऊपर रखा जाता है।

अबुल कलाम आजाद ने दिया एकता का संदेश

गांव के जागरूक निवासी अबुल कलाम आजाद ने भी इस अवसर पर सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कहा, "भले ही स्वर्गीय प्रतीक भौमिक एक हिंदू परिवार से थे, लेकिन हमारे मन में कभी हिंदू-मुस्लिम जैसी भावना नहीं रही। हम वर्षों से इस परिवार के साथ मिल-जुलकर रहते आए हैं। जीवन की हर समस्या और कठिन परिस्थिति में हम एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा कि प्रतीक भौमिक और उनके परिवार का गांव के लोगों के साथ गहरा जुड़ाव था और उनके कार्यों ने पूरे इलाके पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ा था। उनकी असमय मृत्यु से गांव के लोगों को गहरा दुख पहुंचा है।

सामाजिक माहौल बिगाड़ने वाली गतिविधियों पर जताई चिंता

अबुल कलाम आजाद ने समाज में बढ़ते धार्मिक ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक तनाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कुछ गतिविधियां हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच दूरी पैदा करने का प्रयास करती हैं, जो समाज के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और आपसी एकता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में क्षेत्र की शांति, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।

पूरे इलाके में हो रही है इस पहल की सराहना

धर्म की सीमाओं को तोड़कर कठिन समय में एक परिवार के साथ खड़े होने की इस मानवीय पहल ने पूरे इलाके का ध्यान आकर्षित किया है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और जागरूक नागरिकों ने अंबारी-परेरचर गांव के इस कदम को विभिन्न समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और आपसी सम्मान का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। लोगों का कहना है कि यह घटना साबित करती है कि सदियों से अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग आपसी सम्मान और सहयोग के साथ रह सकते हैं और यही भारत की असली पहचान है।

हिंदू-मुस्लिम एकता का जीवंत उदाहरण बना अंबारी-परेरचर गांव

ऐसे समय में जब देश और राज्य के कई हिस्सों में धार्मिक ध्रुवीकरण और सामाजिक विभाजन को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, बोंगईगांव जिले के अंबारी-परेरचर गांव के लोगों ने अपने व्यवहार से यह साबित कर दिया कि इंसानियत और भाईचारा किसी भी धर्म से बड़ा होता है। इस घटना ने एक बार फिर उस शाश्वत सत्य को जीवंत कर दिया है कि "इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता, इंसान की सबसे बड़ी पहचान उसकी इंसानियत होती है।"

धर्म केवल पूजा-पद्धति का माध्यम हो सकता है, लेकिन वह कभी भी लोगों के बीच दूरी या दीवार नहीं बनना चाहिए। अंबारी-परेरचर गांव के लोगों ने अपने कार्यों से हिंदू-मुस्लिम एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो न केवल असम बल्कि पूरे देश और दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।