मुजफ्फरपुर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देशवासियों से आह्वान किया है कि वे संविधान में निहित अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन कर भारत को विश्व का अग्रणी गणराज्य बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित आरएसएस के संभागीय कार्यालय ‘मधुकर निकेतन’ में ध्वजारोहण के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।
भागवत ने कहा कि संविधान केवल अधिकारों का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को उनके कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “संविधान हमें धर्म का बोध कराता है। इसका नियमित अध्ययन नागरिकों को अपने दायित्वों के प्रति सजग बनाता है। कानून का पालन करना प्रत्येक नागरिक का प्राथमिक कर्तव्य है।”
आरएसएस प्रमुख ने भारतीय संस्कृति में निहित उन अलिखित मूल्यों का भी उल्लेख किया, जो मानवता, सामाजिक समरसता और पारस्परिक सम्मान पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज सदियों से इन मूल्यों के सहारे आगे बढ़ता रहा है और आज भी यही मूल्य देश की एकता और अखंडता की आधारशिला हैं।
भागवत ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दिए गए बलिदानों को याद करते हुए कहा कि इन्हीं संघर्षों के कारण भारत आज स्वतंत्र और संप्रभु गणराज्य के रूप में खड़ा है। उन्होंने कहा, “भारत को एक सशक्त गणराज्य के रूप में सुरक्षित और मजबूत बनाए रखना हम सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी राष्ट्र बनाने के लिए केवल नीतियों या सरकारों की भूमिका पर्याप्त नहीं है, बल्कि सार्वजनिक जीवन में नागरिकों का आचरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने नागरिकों से निरंतर आदर्श व्यवहार अपनाने और सामाजिक जीवन में अनुशासन व नैतिकता बनाए रखने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में भागवत ने राष्ट्रीय ध्वज के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तिरंगे का केसरिया रंग त्याग, ऊर्जा और भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। सफेद रंग विचारों की शुद्धता और सत्य का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि हरा रंग प्रगति, समृद्धि और सतत विकास का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि ध्वज के मध्य स्थित अशोक चक्र यह संदेश देता है कि समस्त विकास और प्रगति धर्म और नैतिक मूल्यों से निर्देशित होनी चाहिए।
इस अवसर पर संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं के साथ हुआ।