गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार भैरव बटालियन और ‘सूर्यास्त्र’ की गूंज, भारत की बढ़ती सैन्य ताकत

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 26-01-2026
For the first time, the Bhairav ​​Battalion and the 'Suryastra' system were showcased at the Republic Day parade, displaying India's growing military might.
For the first time, the Bhairav ​​Battalion and the 'Suryastra' system were showcased at the Republic Day parade, displaying India's growing military might.

 

नई दिल्ली

77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड में इस वर्ष भारत की सैन्य क्षमता और स्वदेशी रक्षा शक्ति का नया और सशक्त स्वरूप देखने को मिला। परेड में पहली बार भैरव लाइट कमांडो बटालियन, शक्तिबाण रेजिमेंट, अत्याधुनिक रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ‘सूर्यास्त्र’ और कई स्वदेशी हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस वर्ष परेड की खास बात यह रही कि पहली बार दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट और ज़ांस्कर टट्टू भी इसमें शामिल किए गए। इनके प्रदर्शन ने सीमावर्ती और ऊंचाई वाले इलाकों में भारतीय सेना की तैयारी और अनुकूलन क्षमता को रेखांकित किया। इसके साथ ही, ऐतिहासिक 61वीं कैवलरी के घुड़सवार पहली बार लड़ाकू वर्दी में नज़र आए। पारंपरिक रूप से औपचारिक वर्दी के लिए पहचानी जाने वाली इस टुकड़ी का नेतृत्व एक बार फिर कैप्टन अहान कुमार ने किया, जो हनोवरियन नस्ल के घोड़े ‘रणवीर’ पर सवार थे।

परेड में पहली बार भारी थर्मल वर्दी पहने मिश्रित स्काउट्स की एक टुकड़ी भी शामिल हुई। इस दल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट अमित चौधरी ने किया। यह क्षण उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी भावुक रहा, क्योंकि उनके पिता वर्ष 1990 में औपचारिक परेड का हिस्सा रह चुके थे। विशेष जूते, बहुस्तरीय पोशाक और धूप से बचाने वाले चश्मों के साथ जब यह दल कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ा, तो दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।

इस वर्ष पहली बार शक्तिबाण रेजिमेंट को भी प्रदर्शित किया गया, जिसे तोपखाने की क्षमताओं को नई ऊंचाई देने के लिए गठित किया गया है। इस रेजिमेंट में ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और लोइटर म्यूनिशन को शामिल किया गया है, जो आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं।

भैरव लाइट कमांडो बटालियन, जो अक्टूबर में गठित की गई थी, ने राष्ट्रीय राजधानी में पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लिया। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह विशेष पैदल सेना इकाई पारंपरिक इन्फेंट्री और विशेष बलों की क्षमताओं का संगम है और उच्च-तीव्रता वाले अभियानों में सबसे पहले तैनात की जाती है। ‘भैरव’ नाम भगवान शिव के उग्र और रक्षात्मक स्वरूप से प्रेरित है, जो नियंत्रित आक्रामकता और अजेयता का प्रतीक माना जाता है।

इसके अलावा परेड में ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल प्रणाली, एमआरएसएएम, एटीएजीएस, धनुष तोप और विभिन्न ड्रोन का भी प्रदर्शन किया गया। डीआरडीओ ने लंबी दूरी की पोत-विध्वंसक हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-ASHM) को भी प्रदर्शित किया, जो भारत की अत्याधुनिक रक्षा अनुसंधान क्षमता का सशक्त उदाहरण है।

इस भव्य प्रदर्शन ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है, बल्कि स्वदेशी तकनीक के दम पर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में भी सक्षम है।