आवाज़ द वॉयस/नई दिल्ली
गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर भारत सरकार द्वारा घोषित वीरता पुरस्कारों और पद्म सम्मानों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्र केवल सीमाओं की रक्षा करने वाले शूरवीरों को ही नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, कला, संस्कृति और समाज के हर क्षेत्र में योगदान देने वाली विभूतियों को भी समान श्रद्धा और सम्मान के साथ देखता है। इस ऐतिहासिक अवसर पर अंतरिक्ष से लेकर लोककला, साहित्य से लेकर सिनेमा तक भारत की विविध और समृद्ध प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित किया गया, जिसने देश की साझा विरासत और भविष्य की दिशा,दोनों को मजबूती से रेखांकित किया।

इस वर्ष की सबसे ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक घोषणा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुँचने वाले पहले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किए जाने की रही। यह सम्मान न केवल एक व्यक्ति की असाधारण उपलब्धि का प्रतीक है, बल्कि यह भारत के उभरते अंतरिक्ष सामर्थ्य, सामरिक सोच और वैज्ञानिक आत्मविश्वास का भी जीवंत प्रमाण है।
आम तौर पर अशोक चक्र युद्ध या अत्यंत जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में अद्वितीय साहस दिखाने वाले सैन्य कर्मियों को दिया जाता है। किसी अंतरिक्ष यात्री को यह सम्मान मिलना इस बात का संकेत है कि भारत अब अंतरिक्ष को भी राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक क्षमता और वैश्विक नेतृत्व के एक अहम क्षेत्र के रूप में देख रहा है।
“This is not my journey alone, but India’s collective journey.”
— DD News (@DDNewslive) January 26, 2026
Extended greetings to the nation on the 77th Republic Day, Group Captain Shubhanshu Shukla said that the goal of a Developed India by 2047 can be achieved only when every citizen takes it as their own… pic.twitter.com/DTwJdg0uYm
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कुल 70 सैन्य कर्मियों को वीरता पुरस्कार प्रदान करने की स्वीकृति दी, जिनमें अशोक चक्र से सम्मानित शुभांशु शुक्ला सबसे प्रमुख नाम रहे। जून 2025 में शुभांशु शुक्ला ने Axiom-4 (Ax-4) मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा कर इतिहास रचा। वे अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय और आईएसएस तक पहुँचने वाले पहले भारतीय बने। उनका यह 18 दिनों का अंतरिक्ष प्रवास 41 वर्षों बाद हुआ, जब 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत संघ के सोयुज़ मिशन से अंतरिक्ष की यात्रा की थी।
Ax-4 मिशन का संचालन अमेरिका की निजी कंपनी Axiom Space ने किया, जिसमें NASA, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की महत्वपूर्ण भागीदारी रही। इस मिशन के दौरान शुभांशु शुक्ला द्वारा किए गए अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगों को वैश्विक स्तर पर सराहना मिली और भारत की वैज्ञानिक क्षमता को नई पहचान प्राप्त हुई।
भारतीय वायुसेना के अनुभवी फाइटर पायलट शुभांशु शुक्ला के पास 2,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है। उन्होंने Su-30 MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar, Hawk, Dornier और An-32 जैसे अत्याधुनिक विमानों को उड़ाया है। वर्ष 2006 में वायुसेना में कमीशंड हुए लखनऊ निवासी शुक्ला आज देश के युवाओं के लिए साहस, अनुशासन और सपनों को साकार करने की प्रेरणा बन चुके हैं।
वीरता पुरस्कारों की इस सूची में भारतीय नौसेना की दो महिला अधिकारियों,लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए—का नाम भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जिन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। इन दोनों अधिकारियों ने INSV तारिणी पर सवार होकर आठ महीनों में करीब 21,600 नौटिकल मील की समुद्री यात्रा कर दुनिया का चक्कर लगाया।
Shubhanshu Shukla to get Ashoka Chakra, India’s highest peacetime military award🇮🇳#AshokChakra #ShubhanshuShukla pic.twitter.com/IBZWys42lc
— The Sacred Scroll (@SacredScroll) January 25, 2026
यह अभियान न केवल साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक था, बल्कि महिला सशक्तिकरण और भारतीय नौसेना की क्षमता का भी एक सशक्त उदाहरण बना। इसके अतिरिक्त इस वर्ष 13 शौर्य चक्र और कई कीर्ति चक्र प्रदान किए गए। कीर्ति चक्र से सम्मानित होने वालों में मेजर अरशदीप सिंह, नायब सूबेदार डोलेश्वर सुब्बा और ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर शामिल हैं, जो भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए प्रशिक्षित अंतरिक्ष यात्रियों में से एक रहे हैं। राष्ट्रपति ने कुल 301 विशिष्ट सेवा और वीरता पदकों को भी मंजूरी दी, जो सशस्त्र बलों और अन्य सेवाओं में उत्कृष्ट योगदान का सम्मान हैं।

इसी ऐतिहासिक संध्या पर भारत सरकार ने पद्म पुरस्कार 2026 की भी घोषणा की। देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल इन पुरस्कारों के तहत इस वर्ष कुल 131 पद्म पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। इस सूची में 19 महिलाएं, 6 विदेशी, एनआरआई, पीआईओ और ओसीआई श्रेणी के लोग तथा 16 मरणोपरांत पुरस्कार भी शामिल हैं।
पद्म पुरस्कारों की यह सूची इस मायने में विशेष रही कि इसमें समाज के उन गुमनाम नायकों को भी स्थान मिला, जिनकी दशकों की निःस्वार्थ सेवा ने स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाया, लेकिन जिन्हें अब तक राष्ट्रीय पहचान नहीं मिल पाई थी।
#PadmaAwards2026 :
— IndiaGlitz Telugu™ (@igtelugu) January 25, 2026
131 Padma Awards Approved For 2026
- Padma Vibhushan - 5
- Padma Bhushan - 13
- Padma Shri - 113
Presentation in MARCH-APRIL#PadmaShri #News #PadmaAwards pic.twitter.com/UlR6Qgn3I0
पद्म पुरस्कार 2026 की सूची में मुस्लिम समाज की कई प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति भी खास रही, जिन्होंने भारत की साझा संस्कृति, ज्ञान परंपरा और कलात्मक विरासत को समृद्ध किया है। कश्मीर के प्रख्यात विद्वान, कवि, भाषाविद् और अनुवादक प्रोफेसर शफी शौक को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। कश्मीरी भाषा और साहित्य को अपना जीवन समर्पित करने वाले प्रोफेसर शफी शौक ने सौ से अधिक पुस्तकों का लेखन, संकलन और अनुवाद किया है। उनकी कृतियाँ कश्मीरी भाषा और साहित्य की आधारशिला मानी जाती हैं। उन्होंने इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय कश्मीर की साहित्यिक और बौद्धिक परंपरा के लिए गौरव का क्षण बताया।
राजस्थान के मेवात क्षेत्र के लोक कलाकार ग़फ़ूरुद्दीन मेवाती जोगी को भी पद्म श्री से सम्मानित किया गया। ‘भीपांग’ और ‘पंदन का कड़ा’ जैसी लगभग विलुप्त हो चुकी लोक परंपराओं को उन्होंने छह दशकों तक जीवित रखा। गांव की चौपाल से लेकर लंदन और पेरिस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक उनकी कला की गूंज सुनाई दी है। यह सम्मान केवल एक कलाकार को नहीं, बल्कि मेवात की लोक संस्कृति और उस साझा विरासत को मिला सम्मान है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम परंपराएं एक-दूसरे में घुली-मिली हैं।
राजस्थान के भपंग की गूंज को राष्ट्रीय सम्मान मिला है - अलवर के लोक कलाकार गफ़रू दीन मेवाती को पद्म पुरस्कार की घोषणा हुईं है ! #PadmaAwards2026 #alwar #padma pic.twitter.com/CJL7P57BFg
— Manish Bhattacharya (INDIA TV)﮷ (@Manish_IndiaTV) January 25, 2026
गुजरात के मीर हाजीभाई कासिम को ढोलक वादन और सामाजिक सेवा के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने ढोलक को ग़ज़ल, कव्वाली और भक्ति संगीत में एक नई पहचान दी और साथ ही गौ-संरक्षण जैसे सामाजिक अभियानों से भी खुद को जोड़ा। उनकी कला और सामाजिक प्रतिबद्धता ने यह सिद्ध किया कि लोकवाद्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने की शक्ति भी रखते हैं।
असम के प्रख्यात मूर्तिकार और कला निर्देशक नूरुद्दीन अहमद को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। कठपुतली कला से लेकर रंगमंच और मूर्तिकला तक फैला उनका योगदान असम की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच तक ले गया है। उन्होंने इस सम्मान को जनता के प्रेम और समर्थन का परिणाम बताया और इसे आगे बेहतर काम करने की प्रेरणा कहा।
Congratulations to all the Padma Awardees for their outstanding contributions to our nation. Their excellence, dedication and service across diverse fields enrich the fabric of our society. The honour reflects the spirit of commitment and excellence that continues to inspire… https://t.co/Bpf8eze4Bp
— Narendra Modi (@narendramodi) January 25, 2026
पद्म भूषण से सम्मानित किए गए मलयालम सिनेमा के महान अभिनेता और फिल्म निर्माता ममूटी का नाम भारतीय सिनेमा की जीवंत विरासत के रूप में स्थापित है। पांच दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है और मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी सिनेमा में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इससे पहले वे पद्म श्री और अनेक राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। पद्म भूषण के रूप में यह सम्मान उनके असाधारण योगदान की राष्ट्रीय स्वीकृति है।
क्रिकेट के दोनों दिग्गज भी पद्म पुरस्कार सम्मानित
कुल मिलाकर, गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर घोषित ये सभी सम्मान यह संदेश देते हैं कि भारत की आत्मा उसकी विविधता में बसती है। अंतरिक्ष में तिरंगा लहराने वाले वैज्ञानिक और सैनिक, सीमाओं की रक्षा करने वाले जवान, भाषा और साहित्य को जीवित रखने वाले विद्वान, लोक परंपराओं को संजोने वाले कलाकार और सिनेमा के माध्यम से समाज को आईना दिखाने वाले अभिनेता,सभी राष्ट्र निर्माण के समान भागीदार हैं। अशोक चक्र से लेकर पद्म पुरस्कारों तक, ये सम्मान केवल अतीत की उपलब्धियों का उत्सव नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह आह्वान भी हैं कि वे सपने देखें, जोखिम उठाएं और अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर भारत के भविष्य को और उज्ज्वल बनाएं।