प्रयागराज
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शुक्रवार को बसंत पंचमी स्नान पर्व पर सुबह आठ बजे तक एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाई। यह संख्या माघ मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और धार्मिक उत्साह को दर्शाती है।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले दिन रात से ही लोग संगम क्षेत्र में आने लगे थे। बसंत पंचमी पर सुबह आठ बजे तक 1.04 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था और भक्ति के साथ स्नान किया।
तीर्थ पुरोहित राजेंद्र मिश्रा ने बताया, “प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का वास होने के कारण बसंत पंचमी स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन पीले वस्त्र पहनने, पीली वस्तुएँ दान करने और मां सरस्वती की पूजा का विधान है। यह पर्व ऋतु परिवर्तन का प्रतीक भी माना जाता है और लोग इसे गुलाल और रंगों के साथ हर्षोल्लास से मनाते हैं।”
मंडल आयुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि माघ मेले के लिए कुल 800 हेक्टेयर क्षेत्र को सात सेक्टर में विभाजित किया गया है। पूरे मेला क्षेत्र में 25,000 से अधिक शौचालय और 3,500 से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं ताकि श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छता और सुविधा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि माघ मेले में छोटी अवधि का कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं के लिए टेंट सिटी बनाई गई है, जिसमें ध्यान, योग और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज पांडेय ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए मेला क्षेत्र में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, संचार व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है।
बसंत पंचमी पर गंगा-संगम में श्रद्धालुओं का यह विशाल संगम न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि माघ मेले की भव्यता और सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व को भी उजागर करता है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, ताकि यह धार्मिक पर्व शांति और सुव्यवस्था के साथ संपन्न हो सके।इस तरह, प्रयागराज में बसंत पंचमी स्नान ने न केवल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को प्रकट किया, बल्कि माघ मेले की सुरक्षा, सुविधा और आध्यात्मिक माहौल की भी मिसाल कायम की है।