दिल्ली यूनिवर्सिटी: बकरीद के दिन परीक्षा पर विवाद, छात्र ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 26-05-2026
Delhi University: Controversy over Exam on Eid al-Adha; Student Challenges Decision in High Court
Delhi University: Controversy over Exam on Eid al-Adha; Student Challenges Decision in High Court

 

आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली  

दिल्ली विश्वविद्यालय की परीक्षा और बकरीद की छुट्टी को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने अब कानूनी रूप ले लिया है। विश्वविद्यालय के एक लॉ छात्र ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए उस निर्णय को चुनौती दी है, जिसमें 28 मई को परीक्षा आयोजित करने का कार्यक्रम जारी रखा गया है, जबकि केंद्र सरकार ने आधिकारिक रूप से ईद-उल-अजहा (बकरीद) की छुट्टी को 27 मई से बदलकर 28 मई कर दिया था।

यह मामला दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ लॉ के इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स (छठे सेमेस्टर) के एक छात्र द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि विश्वविद्यालय का 25 मई 2026 का ऑफिस मेमोरेंडम, जिसके तहत 28 मई को परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया, पूरी तरह से मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है। छात्र ने अदालत से इस निर्णय को रद्द करने की मांग की है।

याचिका में विस्तार से कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा बकरीद की छुट्टी को 28 मई 2026 पर स्थानांतरित करने के बाद यह अपेक्षित था कि सभी शैक्षणिक संस्थान उसी के अनुसार अपने अकादमिक कैलेंडर में बदलाव करेंगे। लेकिन इसके बावजूद दिल्ली विश्वविद्यालय ने परीक्षा कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया और तय तारीख पर ही परीक्षाएं आयोजित करने का निर्णय लिया, जिससे छात्रों में असंतोष और चिंता का माहौल पैदा हो गया।

याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया है कि देश के कई संवैधानिक संस्थानों और सार्वजनिक प्राधिकरणों, यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने भी केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप बकरीद की छुट्टी को 28 मई को स्थानांतरित कर दिया है। ऐसे में विश्वविद्यालय का यह रुख न केवल असंगत है, बल्कि समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक सिद्धांतों के भी खिलाफ है।

छात्र ने अपनी याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 25 और 29 का हवाला देते हुए कहा है कि यह निर्णय मुस्लिम छात्रों के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। अनुच्छेद 14 समानता के अधिकार की गारंटी देता है, अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है, अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है, जबकि अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यक समुदायों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की सुरक्षा करता है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का दायित्व होता है कि वह छात्रों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान करते हुए परीक्षा कार्यक्रम तय करे, विशेषकर तब जब सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर छुट्टी की तारीख में परिवर्तन किया गया हो। इस स्थिति में परीक्षा को उसी दिन रखना छात्रों के लिए अनुचित कठिनाई उत्पन्न करता है।

यह मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है और इस पर सुनवाई के दौरान यह तय किया जाएगा कि क्या विश्वविद्यालय का निर्णय संवैधानिक प्रावधानों और प्रशासनिक निष्पक्षता के अनुरूप है या नहीं। इस विवाद ने न केवल विश्वविद्यालय प्रशासन की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में संवेदनशील त्योहारों और छुट्टियों के समन्वय को लेकर एक व्यापक बहस भी शुरू कर दी है।

अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि परीक्षा कार्यक्रम और धार्मिक अवकाश के बीच संतुलन कैसे साधा जाए, ताकि न तो शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो और न ही छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो।