आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांगो में एक तरफ इबोला वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या जहां बढ़ रही हैं वहीं स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की घटनाओं ने संकट को और बढ़ा दिया है।
पूर्वी कांगो में अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता नेटवर्क ‘रेड क्रॉस’ की स्वयंसेवक वैनी बिरुंगी जब भी इबोला के नवीनतम प्रकोप के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए बाहर जाती हैं तो उन्हें दोहरे खतरे का सामना करना पड़ता है क्योंकि वायरस का कोई इलाज उपलब्ध नहीं होने और स्वास्थ्य सुविधाओं की लचर स्थिति के कारण उन्हें और उनके जैसे अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को निवासियों के गुस्से और संदेह का सामना करना पड़ता है।
इबोला के दुर्लभ स्वरूप बुंडीबुग्यो से संक्रमण के कारण संदिग्ध मामलों की संख्या 1,000 के करीब पहुंच रही है, वहीं इसका कोई टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है।
बुनिया शहर के निवासियों द्वारा शहर में स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले और उन पर पत्थर फेंकने तथा गाली-गलौज की सूचनाएं मिली हैं।
बिरुंगी और उनके सहयोगियों ने चिलचिलाती धूप में एक श्रमिक वर्ग के इलाके में लोगों के समूहों से बात की। उन्होंने सोमवार को ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) को बताया, ‘‘हम उन्हें लगातार बताते रहते हैं कि बीमारी मौजूद है। कुछ लोग मानते हैं और कुछ नहीं मानते।’’
इस अस्थिर क्षेत्र में सहायताकर्मी विशेष रूप से जोखिम में हैं। अमेरिका और अन्य देशों द्वारा दी जाने वाली सहायता में कटौती के कारण ऐसी बीमारियों की निगरानी व्यवस्था कमजोर हो गई है।
संक्रमण के मामले 1,000 के करीब पहुंच गए हैं लेकिन स्वास्थ्य केंद्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
पिछले एक सप्ताह में तीन बार स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले हुए हैं। रविवार को गुस्साए युवकों ने एक अस्पताल पर धावा बोल दिया जहां इबोला रोगियों का इलाज हो रहा था। अस्पताल में गोलियों की आवाजें सुनी गईं और चिकित्सा कर्मचारियों ने रोगियों को बाहर निकाला।
मोनबगवालू के निवासियों के एक समूह ने शनिवार को ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ द्वारा इबोला के संदिग्ध और पुष्ट मामलों के लिए स्थापित एक तंबू पर हमला किया और उसमें आग लगा दी। हमले के दौरान संदिग्ध तौर पर इबोला संक्रमण से ग्रस्त कई लोग केंद्र से बाहर निकल गए।