गुरुग्राम: 'बुलडोजर मैन' आरएस बाठ की नई पहल, नमाज और सफाई का अनोखा मॉडल

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 26-05-2026
Gurugram: 'Bulldozer Man' RS Bath's New Initiative—A Unique Model for Namaz and Sanitation
Gurugram: 'Bulldozer Man' RS Bath's New Initiative—A Unique Model for Namaz and Sanitation

 

मलिक असगर हाशमी/ गुरुग्राम (हरियाणा)

हरियाणा की 'मिलिनियम सिटी' गुरुग्राम अक्सर अपनी ऊंची इमारतों, कॉर्पोरेट कल्चर और चमचमाती जिंदगी के लिए जानी जाती है। लेकिन इसके साथ ही, यह शहर समय-समय पर जुम्मे की नमाज को लेकर भी देश की मीडिया और सोशल मीडिया की सुर्खियों में आ जाता है। इस बार भी गुरुग्राम चर्चा का केंद्र बना हुआ है, मगर सुर्खियां बटोरने की वजह वह पुराना विवाद या तनाव नहीं है जिसके लिए अक्सर लोग इस शहर की तरफ देखने लगते हैं।

इस बार कहानी बिल्कुल जुदा है। इस बार मामला सार्वजनिक स्थलों पर नमाज रोकने का नहीं, बल्कि आपसी समन्वय, स्वच्छता और जनभागीदारी का है। आगामी बकरीद और हर शुक्रवार को होने वाली जुम्मे की नमाज सुगमता से, बिना किसी रुकावट और विवाद के संपन्न हो सके, इसके लिए प्रशासन और आम जनता ने मिलकर एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। इस सकारात्मक बदलाव के पीछे हरियाणा शहारी विकास प्राधिकरण (HSVP) के डीटीपी (इन्फोर्समेंट) और नोडल अधिकारी आरएस बाठ (RS Batth) के सार्थक प्रयासों की बड़ी भूमिका रही है।

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मस्जिद की कमी और खुले मैदान का विकल्प

जनसंख्या के लिहाज से गुरुग्राम में मुस्लिम समुदाय की आबादी काफी बड़ी है, लेकिन उस अनुपात में शहर के भीतर पर्याप्त मस्जिदों की भारी कमी है। यही मुख्य वजह है कि कॉर्पोरेट सेक्टर और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों लोगों को मजबूरन सड़क किनारे, फुटपाथों या सार्वजनिक पार्कों में जुम्मे की नमाज अदा करनी पड़ती थी। सड़क किनारे नमाज पढ़ने के कारण शहर में अक्सर ट्रैफिक जाम और स्थानीय स्तर पर तमाम परेशानियां खड़ी होने लगी थीं।

इन प्रशासनिक और सामाजिक दिक्कतों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने करीब पांच-छह साल पहले खुले स्थानों पर इस तरह नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था। मगर इसके साथ ही, सरकार और प्रशासन ने एक व्यावहारिक रास्ता भी निकाला।

कॉर्पोरेट कर्मियों और आम नमाजियों को असुविधा न हो, इसके लिए सेक्टर 29स्थित हुडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन (अब मिलेनियम सिटी सेंटर) के ठीक पीछे बने लगभग 40एकड़ के एक बड़े सरकारी मैदान का एक हिस्सा नमाज के लिए आरक्षित कर दिया गया। तब से हर ईद, बकरीद और जुम्मे को लोग यहीं शांतिपूर्ण तरीके से नमाज अदा करते आ रहे हैं।

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गंदगी की शिकायत और प्रशासन का एक्शन

समय बीतने के साथ ही इस मैदान की देखरेख में कमी आने लगी। नमाज के समय जुटने वाली भारी भीड़ के कारण वहां बड़े पैमाने पर कूड़ा-करकट जमा हो गया था। मैदान के रखरखाव और सफाई व्यवस्था के ठप होने से वहां गंदगी का अंबार लग गया। ऐसे में वहां आने वाले कुछ प्रबुद्ध मुस्लिम नागरिकों ने खुद आगे बढ़कर पहल करने की सोची। उन्होंने सीधे एचएसवीपी (HSVP) के डीटीपी इन्फोर्समेंट विभाग से संपर्क साधा और मैदान की सफाई में सरकारी मदद की गुहार लगाई।

जनता की इस सकारात्मक सोच का डीटीपी इन्फोर्समेंट डिपार्टमेंट ने भी खुले दिल से स्वागत किया। नोडल अधिकारी आरएस बाठ ने तुरंत इस मांग को स्वीकार कर लिया और अपनी टीम को सफाई अभियान में सहयोग देने का निर्देश दिया। इस पूरे अभियान को जमीन पर उतारने और नमाजियों व सरकारी अमले के बीच तालमेल बैठाने का जिम्मा विभाग के एक अन्य कर्मठ अधिकारी राम आर्य ने संभाला।

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"शहर को साफ रखना हर नागरिक का फर्ज"

इस पूरे मामले पर 'आवाज द वॉयस' से विशेष बातचीत करते हुए डीटीपी और नोडल अधिकारी आरएस बाठ ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा: "गुरुग्राम जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के शहर को साफ-सुथरा और अतिक्रमण मुक्त रखना केवल प्रशासन का ही काम नहीं है, बल्कि यह हर एक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी भी है। जब जनता खुद आगे बढ़कर शहर की भलाई के लिए हाथ बढ़ाती है, तो हमारा विभाग ऐसी मुहिम को प्रोत्साहित करने में कभी पीछे नहीं रहता।"

आरएस बाठ ने बताया कि जब सेक्टर 29के हुडा ग्राउंड (HUDA Ground Gurugram) में सफाई अभियान की योजना बनी, तो वे खुद को कार्यालय तक सीमित नहीं रख सके। वे खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचे और अधिकारियों व नमाजियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने हाथों से कूड़ा उठाया। उन्होंने कहा कि जब एक जिम्मेदार अधिकारी खुद जमीन पर काम करता है, तो जनता का भरोसा प्रशासन पर और मजबूत होता है।

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अतिक्रमण और हॉकर्स को सख्त नसीहत

आरएस बाठ ने ग्राउंड की जमीनी हकीकत पर बात करते हुए यह भी बताया कि जुम्मे या ईद के मौके पर यहां हजारों की संख्या में भीड़ जुटती है। इस भीड़ का फायदा उठाने के लिए मैदान के आसपास बिरयानी, स्नैक्स और अन्य खाने-पीने के सामानों की रेहड़ियां (Street Vendors) लग जाती हैं। धीरे-धीरे ये लोग मैदान के कोनों पर पक्का अतिक्रमण करने की कोशिश करने लगते हैं और कूड़ा भी वहीं फेंक देते हैं।

सफाई अभियान के दौरान प्रशासन ने ऐसे सभी रेहड़ी-पटरी वालों और दुकानदारों को सख्त चेतावनी दी। उन्हें समझाया गया कि वे धार्मिक आयोजन की आड़ में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा या अतिक्रमण न करें। साथ ही, नमाज खत्म होने के तुरंत बाद वहां फैले डिस्पोजल और कचरे को डस्टबिन में डालने की हिदायत दी गई।

बाठ ने यह भी साफ किया कि प्रशासन शहर के अन्य धार्मिक स्थलों जैसे मंदिरों और गुरुद्वारों के आसपास भी स्वच्छता को लेकर बेहद गंभीर है। मंदिरों के पास मीट-मुर्गे की अवैध दुकानें न चलें, इसके लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस रद्द किए जा रहे हैं।

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'बुलडोजर मैन' की नई छवि से सोशल मीडिया गदगद

dddगुरुग्राम के प्रशासनिक हलकों और आम जनता के बीच आरएस बाठ को 'बुलडोजर मैन' (Bulldozer Man of Gurugram) के नाम से जाना जाता है। शहर में जहां भी अवैध निर्माण या सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत मिलती है, वे खुद पीले पंजे के साथ वहां पहुंच जाते हैं। रोजाना शहर के अलग-अलग कोनों से अतिक्रमण हटाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है।

यही कारण है कि जब उनकी यह 'सॉफ्ट' और 'सहयोगात्मक' छवि सामने आई, तो शहरवासी हैरान भी हुए और खुश भी। आरएस बाठ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इस सफाई अभियान का एक वीडियो साझा किया, जिसके बाद इंटरनेट पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। इस वीडियो के साथ उन्होंने लिखा:

"मुस्लिम समाज ने सेक्टर 29में हर शुक्रवार को नमाज़ के बाद एक बड़े ग्राउंड की सफ़ाई का जिम्मा लिया और HSVP डिपार्टमेंट का साथ भी मांगा। JE रामपाल जी ने कोऑर्डिनेट किया और ऐसी मुहिम को मोटिवेट करने के लिए मैं भी पहुँचा।

इसके साथ ही हज़ारों लोगों ने यह भी कहा कि अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। गुरुग्राम एक अनोखा उदाहरण है जिसमें public participation और public interaction के साथ enforcement एक मॉडल बन चुका है। अपने शहर को अपनाये और उसको सुंदर बनाये।"

सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाओं की बाढ़

इस वीडियो के पोस्ट होते ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मिली-जुली लेकिन बड़े पैमाने पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग अधिकारी के काम करने के तरीके और इस सांप्रदायिक सौहार्द की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

श्वेता सिंह नाम की यूजर ने लिखा, "सर, आपके काम करने का तरीका मुझे बहुत पसंद है। आप हमेशा गुड़गांव में ही रहना।" वहीं वकार नाम के एक यूजर ने देश को बदलने की बात कहते हुए लिखा, "बिल्कुल, देश बदलना है तो खुद को बदलना पड़ेगा, सफाई का ध्यान रखना पड़ेगा।"मोहम्मद साकिब ने कमेंट किया, "आज तो सैल्यूट बनता है सर।"

वहीं साहिर ने उन्हें एक 'ईमानदार अधिकारी' बताया। हालांकि, कुछ लोगों ने शहर की अन्य समस्याओं की तरफ भी ध्यान खींचा। आदिल नामक यूजर ने एक सामाजिक सवाल उठाते हुए लिखा, "व्यवस्था गरीब ही क्यों खराब करता है?" तो वहीं कुछ अन्य यूजर्स ने दिल्ली के स्वरूप नगर और गुरुग्राम के सेक्टर 43स्थित व्यापार केंद्र से भी दुकानदारों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने की मांग कर डाली।

निश्चित रूप से, गुरुग्राम का यह प्रयोग देश के अन्य शहरों के लिए भी एक नजीर है। जहां एक तरफ कानून व्यवस्था को कड़ाई से लागू करना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ यदि प्रशासन जनता को विश्वास में लेकर, संवाद  के जरिए समस्याओं का समाधान निकाले, तो बड़े से बड़े विवाद को भी स्वच्छता और भाईचारे के उत्सव में बदला जा सकता है।