मलिक असगर हाशमी
आज के दौर में हर युवा का सपना होता है कि वह बेहतर से बेहतर कॉलेज में दाखिला ले। कुछ छात्र तो विदेश जाकर अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं। काबिलियत होने के बावजूद कई बार परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति आड़े आ जाती है। महंगे कोर्स की फीस और रहने-खाने का खर्च देखकर कई होनहार छात्र अपने कदम पीछे खींच लेते हैं। अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं। केंद्र सरकार की एक खास योजना ऐसे ही प्रतिभावान युवाओं के सपनों को उड़ान देने का काम कर रही है।
नेशनल माइनॉरिटीज डेवलपमेंट एंड फाइनेंस कॉरपोरेशन यानी एनएमडीएफसी युवाओं के लिए बेहद सस्ती दरों पर एजुकेशन लोनदेता है। कॉलेजों में इस वक्त दाखिले का सीजन चल रहा है। छात्र अपनी पसंद के कोर्स चुन रहे हैं। ऐसे में पैसों की वजह से किसी की पढ़ाई न छूटे, इसके लिए यह योजना एक बड़ा सहारा बन सकती है।
यह स्कीम उन युवाओं के लिए एक वरदान की तरह है जो भारत या विदेश के किसी नामचीन संस्थान से तकनीकी या प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते हैं। सरकार इस योजना के जरिए होनहार बच्चों को आगे बढ़ने का पूरा मौका दे रही है।
क्या है एनएमडीएफसी की यह विशेष योजना
एनएमडीएफसी केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक सरकारी संस्था है। इस संस्था का मुख्य काम देश के अल्पसंख्यक समुदायों के आर्थिक और शैक्षणिक विकास को बढ़ावा देना है। इसमें मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन समुदाय के लोग शामिल हैं। संस्था का विशेष ध्यान महिलाओं और उन कामकाजी समूहों पर रहता है जिन्हें आगे बढ़ने के लिए थोड़े सहयोग की जरूरत होती है।
यह संस्था युवाओं को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए भारी-भरकम ब्याज दरों से मुक्ति दिलाती है। आमतौर पर बाजार में मिलने वाले एजुकेशन लोन काफी महंगे होते हैं। उनकी ब्याज दरें ज्यादा होने के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए लोन चुकाना एक बड़ा बोझ बन जाता है। एनएमडीएफसी इसी अंतर को पाटता है। वह छात्रों को बहुत ही कम और आसान ब्याज दरों पर मोटी रकम मुहैया कराता है।
पांच साल तक के कोर्स के लिए मिलती है मदद
सरकार की इस योजना के तहत उन सभी तकनीकी और प्रोफेशनल कोर्स के लिए लोन मिलता है जिनकी अवधि पांच साल से अधिक नहीं है। इसमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, लॉ और अन्य रोजगारपरक कोर्स शामिल हैं। संस्था का मानना है कि युवाओं को ऐसे कोर्स करने चाहिए जिससे वे जल्द से जल्द अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
लोन देने की इस पूरी प्रक्रिया को बेहतर ढंग से चलाने के लिए सरकार ने इसे दो अलग-अलग हिस्सों में बांटा है। इन्हें क्रेडिट लाइन 1और क्रेडिट लाइन 2का नाम दिया गया है। यह वर्गीकरण परिवार की सालाना आमदनी के आधार पर किया गया है ताकि समाज के हर वर्ग तक इसका लाभ सही तरीके से पहुंच सके।
क्रेडिट लाइन 1 का गणित और कम ब्याज दरें
क्रेडिट लाइन 1 के तहत उन परिवारों को रखा गया है जिनकी सालाना पारिवारिक आय 3लाख रुपये तक है। इस श्रेणी में आने वाले छात्रों को भारत में पढ़ाई करने के लिए अधिकतम 20लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है। अगर छात्र विदेश जाकर पढ़ना चाहता है तो उसे 30 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है।
इस श्रेणी की सबसे खास बात इसकी बेहद कम ब्याज दर है। लोन पर सालाना सिर्फ 3फीसदी की दर से ब्याज लिया जाता है। आज के समय में इतने कम ब्याज पर पढ़ाई के लिए कर्ज मिलना किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है। इससे गरीब परिवारों के बच्चों को भी दुनिया के बेहतरीन कॉलेजों में पढ़ने का हौसला मिलता है।

इन्फोग्राफिक्स को समझें स्कीम के बारे में. इन्फोग्राफिक्स: हाशमी
क्रेडिट लाइन 2 और महिलाओं के लिए विशेष छूट
क्रेडिट लाइन 2उन परिवारों के लिए बनाई गई है जिनकी सालाना आय 8लाख रुपये तक है। इस श्रेणी में भी लोन की राशि बिल्कुल समान है। देश में पढ़ाई के लिए 20लाख रुपये और विदेश जाने के लिए 30लाख रुपये तक की मदद मिलती है। इस श्रेणी के लिए सामान्य ब्याज दर 8फीसदी सालाना तय की गई है।
इस योजना में महिला सशक्तिकरण का भी विशेष ध्यान रखा गया है। सरकार ने क्रेडिट लाइन 2के तहत छात्राओं को ब्याज दर में 3फीसदी की भारी रियायत दी है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई लड़की इस श्रेणी में आवेदन करती है तो उसे 8फीसदी की जगह सिर्फ 5फीसदी सालाना ब्याज देना होगा। यह कदम देश की बेटियों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे लाने के लिए बेहद मददगार साबित हो रहा है।
लोन चुकाने के आसान नियम और राहत
एजुकेशन लोन लेते समय हर परिवार को सबसे बड़ी चिंता इस बात की होती है कि लोन की किस्तें कब से शुरू होंगी। कई बार पढ़ाई के दौरान ही बैंक पैसे मांगना शुरू कर देते हैं जिससे छात्रों पर तनाव बढ़ जाता है। एनएमडीएफसी ने इस चिंता को भी दूर कर दिया है। योजना के तहत छात्रों को एक मोरेटोरियम पीरियड यानी मोहलत की अवधि मिलती है।
कोर्स खत्म होने के बाद या छात्र को नौकरी मिलने के बाद, जो भी पहले हो, उसके 6महीने बाद तक कोई किस्त नहीं देनी होती है। यह 6महीने का समय छात्र को अपने पैरों पर खड़े होने और खुद को संभालने के लिए दिया जाता है। इसके बाद छात्र को अपना पूरा लोन चुकाने के लिए 5साल का लंबा समय मिलता है। इस आसान प्रक्रिया की वजह से छात्र बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
कैसे काम करती है यह व्यवस्था
एनएमडीएफसी इस योजना को सीधे खुद लागू नहीं करता है। इसके लिए हर राज्य में राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियां यानी एससीए बनाई गई हैं। ये एजेंसियां राज्य सरकारों द्वारा नामित की जाती हैं। इसके साथ ही सरकार ने कुछ बैंकिंग पार्टनर्स को भी इस काम में जोड़ा है। छात्र अपने राज्य की संबंधित एजेंसी या नामित बैंक के माध्यम से इस लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन करते समय छात्रों को अपनी योग्यता के दस्तावेज, कॉलेज का दाखिला पत्र और परिवार की आय का प्रमाण पत्र देना होता है। सभी दस्तावेजों की जांच के बाद लोन की राशि सीधे छात्र के संस्थान को जारी कर दी जाती है। इस पारदर्शी व्यवस्था के कारण किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती है।
यह योजना उन हजारों युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है जो पैसों की कमी के कारण अपने सपनों को दबा देते हैं। अगर आप भी इस साल किसी बड़े कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिला लेने की सोच रहे हैं तो बिना देर किए इस सरकारी योजना की जानकारी जुटाएं और इसका लाभ उठाएं। सही समय पर लिया गया एक फैसला आपके भविष्य की दिशा बदल सकता है।